महारानी अहल्याबाई होल्कर की जीवनी | Ahilyabai Holkar Biography in Hindi

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Ahilyabai Holkar Biography in Hindi
Ahilyabai Holkar Biography in Hindi

अपनी प्रशासनिक क्षमता , दानशीलता और धैर्य के लिए भारतीय महिलाओं में अपना विशेष स्थान रखने वाली अहल्याबाई (Ahilyabai Holkar) का जन्म 1735 ईस्वी में महाराष्ट्र के एक गाँव में एक साधारण गृहस्थ परिवार में हुआ था | एक बार इंदौर के महाराजा मल्हारराव होल्कर की दृष्टि इन पर पड़ी और बालिका को उसके पिता मनकोनी की सहमति से वे इंदौर ले आये और अपने पुत्र खाण्डेराव के साथ उसका विवाह कर दिया | अहल्याबाई (Ahilyabai Holkar) के वैवाहिक जीवन के आरम्भिक नौ वर्ष सुख चैन से बीते |

मल्हारराव इनका बड़ा विश्वास करते थे और बहुधा राजकाज में भी इनको सम्मिलित रखते थे | इस प्रकार बुद्धिमति अहल्याबाई (Ahilyabai Holkar) गृहस्थी के साथ राजकाज भी सीख गयी | यही शिक्षा आगे चलकर उनके बड़े काम आयी | एक बार भरतपुर के जाटो ने इंदौर के मराठा शासको को चौथ देने से इनकार कर दिया तो मल्हारराव ने अपने पुत्र खंडेराव के साथ उन पर चढाई कर दी | इस युद्ध में खंडेराव की मृत्यु हो गयी | उस समय की प्रथा के अनुसार अहल्याबाई सती होना चाहती थी पर ससुर के कहने पर कि मुझे सहारा कौन देगा , उन्होंने अपना विचार त्याग दिया |

कुछ समय बाद मल्हारराव की भी मृत्यु हो गयी और अहल्याबाई (Ahilyabai Holkar) का अत्याचारी पुत्र मालीराव गद्दी पे बैठा किन्तु नौ महीने बाद ही उसका देहांत हो गया | अब अहल्याबाई ने गंगाधर राव को मंत्री बनाकर स्वयं स्वयं राजकाज देखना आरम्भ कर दिया | उधर स्वार्थी गंगाधर राव रानी से राज्य छीनना चाहता था | उसने अपने चाचा के साथ इंदौर पर आक्रमण कर दिया | सेना और जनता रानी के पक्ष में थी | यह देखकर आक्रमणकारी पीछे हट गये |

रानी ने अपना ध्यान प्रजा के हित के कार्यो में केन्द्रित किया | उन्होंने घोषणा की कि जो व्यक्ति राज्य को लुटेरो से मुक्ति दिलाएगा ,उसके साथ वे अपनी पुत्री मुक्ताबाई का विवाह्र कर देगी | युवक यशवंतराव फणसे ने दो वर्ष के अंदर राज्य में शान्ति स्थापित कर दी और रानी ने दोनों का विवाह कर दिया | अहल्याबाई (Ahilyabai Holkar) को उनके समाज सेवा के कार्यो के लिए अधिक स्मरण किया जाता है | उन्होंने जन-साधारण की सुविधा के लिए सडके ,मन्दिर , धर्मशालाए ,घाट और कुए बनवाये |

भारत के विभिन्न तीर्थो में उनकी बनवाई धर्मशालाये ,घाट अदि आज भी मौजूद है | उन्होंने अपने राज्य में विधवा को पति की सम्पति का अधिकार दिलवाया | सादा जीवन बितानेवाली अहल्याबाई (Ahilyabai Holkar) आत्मप्रशंसा से दूर रहती थी पर उनके कार्यो ने सारे उत्तर भारत में उनकी ख्याति फैलाई | उनका व्यक्तिगत जीवन दुखो से भरा हुआ था | पति , पुत्र , जमाता और नाती की मृत्यु उनके सामने हुयी और पुत्री भी सती हो गयी | पर रानी ने अपना संतुलन नही खोया न वह लोकहित के कार्यो से विरत हुयी | 1795 में 60 वर्ष की उम्र में अहल्याबाई (Ahilyabai Holkar) का देहांत हो गया |

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