मुगल बादशाह अकबर की जीवनी | Akbar the Great Biography in Hindi

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Akbar Biography in Hindi
Akbar Biography in Hindi

मुगल वंश का तीसरा और सबसे यशस्वी शासक अकबर (Akbar) का पूरा नाम जलालुदीन मुहम्मद अकबर था | अकबर का पिता हुमायूँ जब अपना राज्य छिन जाने के कारण भागा-भागा फिर रहा था तभी 3 नवम्बर 1542 को सिंध के रेगिस्तान में स्थित अमरकोट के किले में उसका जन्म हुआ | हुमायु को उसे छोडकर फारस जाना पड़ा और अकबर का बचपन अपने चाचा की देखरेख में काबुल में बीता | अकबर (Akbar) को अस्त्र-शस्त्र चलाने का शौक बचपन से ही था किन्तु पढने लिखने का अवसर नही मिला | तब भी अपने प्रतिभा के बल पर उसने सभी कलाओं में निपुणता प्राप्त की और अपने दरबार में एक से बढकर एक कलाकारों-विद्वानों को जगह दी |

अकबर (Akbar) हिंदी में कविता करता था | उसकी कविताये “शिवसिंह सरोज” में संकलित है | हुमायूँ ने 1555 में दिल्ली पर फिर से कब्जा कर लिया तो अकबर भी अपने पिता के साथ भारत आया | एक साल बाद ही 1556 में हुमायूँ की मृत्यु हो गयी | उस समय अकबर (Akbar) के उम्र कुल 13 वर्ष चार महीने थे | उसी छोटी उम्र में उसे भारत का सम्राट घोषित किया गया | उस समय उसके अधीन थोडा सा क्षेत्र था पर पानीपत के दुसरे युद्ध में हेमू को पराजित करने के बाद पंजाब ,दिल्ली , आगरा और निकटवर्ती पूरा क्षेत्र मुगल साम्राज्य के अंतर्गत आ गया |

अकबर (Akbar) अब तक अपने पिता के सेनापित बैरम खां की छत्रछाया में था पर जब उसने बैरम खां को स्वेच्छाचारी होते देखा तो उसे पदच्युत कर दिया | उसके विद्रोह को भी दबा दिया | अक अकबर ने अपने राज्य का विस्तार आरम्भ किया | अगले 20 वर्षो में उसने पुरे उत्तर भारत को अपने राज्य में मिला लिया | राजपूतो से अवश्य उसे करारी टक्कर लेनी पड़ी | जयपुर और जोधपुर के राज्यों ने अकबर से संधि करके स्वयं उसके तथा राजकुमारों के साथ अपने घरानों की लडकियों के वैवाहिक सम्बंध जोड़ लिए थे पर चित्तोड़ और रणथम्भोर को जीतने के लिए मुगल सेना को नाको चने चबाने पड़े | उदय सिंह और राणा प्रताप ने कभी मुगल सत्ता स्वीकार नही की |

अकबर (Akbar) का साम्राज्य पश्चिम में काबुल से पूर्व में बंगाल तक और उत्तर में हिमालय की तराई से लेकर दक्षिण में नर्मदा नदी तक फैला था | इस विस्तृत साम्राज्य को संगठित करने के लिए अकबर ने बड़ी समझदारी से काम लिया | वह पढ़ा लिखा न होने पर भी बुध्दिमान था | उसने हिन्दू और मुसलमान दोनों सम्प्रदायों के सुयोग्य व्यक्तियों को अपना दरबारी नियुक्त किया | अपने पूर्वव्रतियो के नीतियों के विपरीत दोनों धर्मावलम्बियों को महत्व देने के कारण प्रजा में उसकी लोकप्रियता बढी |

साम्राज्य को व्यवस्था की दृष्टि से 15 सुबो में बांटा गया | राजा टोडरमल की सहायता से भूमि की पैमाइश करके मालगुजारी की नई व्यवस्था आरम्भ की गयी | वह पहला और शायद एकमात्र ऐसा शासक था जिसने अनुभव किया कि भारत का बादशाह केवल मुसलमानों का बादशाह नही है | उसने देशी राजाओं को गुलाम बनाकर अपमानित नही किया और केवल हिन्दुओ पर लगने वाला “जजिया” कर समाप्त किया | उसकी दृष्टि उदार थी | विभिन्न धर्मो की धार्मिक पुस्तके पढवाकर सुनने और विद्वानों के शास्त्रार्थ से ज्ञान अर्जित करने में उसकी बड़ी रूचि थी |

सभी धर्मो की समान अच्छी बाते सम्मिलित करके उसने “दीन-ए-इलाही” नाम से उदार धर्म चलाने का प्रयत्न भी किया | अकबर (Akbar) को बड़ी और खुबसुरत इमारते बनवाने तथा संगीत का शौक था | संगीत सम्राट तानसेन उसके नौरत्नो में से था | अपने उदार निति के कारण अकबर को कट्टर मुसलमानों के विरोध का भी सामना करना पड़ा , पर वह अपने मार्ग से विचलित नही हुआ | 7 अक्टूबर 1605 ईस्वी में अकबर की मृत्यु हो गयी और उसकी हिन्दू रानी जोधाबाई का पुत्र सलीम जहांगीर के नाम से गद्दी पर बैठा | अकबर (Akbar) के शासनकाल को मुगलकालीन भारत का स्वर्णयुग कहा जाता है |

अकबर का जीवन एक नजर में | Akbar Facts in Hindi

जन्म नाम  जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर
जन्म तारीख 15 अक्टूबर 1542
जन्म स्थान उमरकोट , राजपुताना (सिंध , वर्तमान पाकिस्तान)
मृत्यु 27 अक्टूबर 1605 (आयु 63)
मृत्यु स्थान फतेहपुर सीकरी ,आगरा
समाधि सिकन्दरा ,आगरा
पत्नियाँ सलीमा सुल्ताना बेगम
मरियम उज जमानी
कसिमा बानू बेगम
बीबी दौलत शाद
भक्कारी बेगम
गौहर-उन-निसा बेगम
बच्चे हसन मिर्जा
हुसैन मिर्जा
जहागीर
खानुम सुल्तान बेगम
मुराद मिर्जा
दानियाल मिर्जा
श्करुनिस्सा बेगम
आराम बानू बेगम
श्मशुनिस्सा बेगम
माही बेगम
पूरा नाम अबुल फतेह जलालुद्दीन अकबर
पिता हुमायूँ
माता हमीदा बानो बेगम
धर्म सुन्नी इस्लाम ,दीन-ए-इलाही
शासनकाल 11 फरवरी 1556 – 27 अक्टूबर 1605
राजतिलक 14 फरवरी 1556
अग्राधिकारी हुमायु
उत्तराधिकारी जहांगीर
संरक्षक बैरम खान (1556–1560)
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