Ambica Charan Mazumdar Biography in Hindi | अम्बिकाचरण मजुमदार की जीवनी

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Ambica Charan Mazumdar Biography in Hindi
Ambica Charan Mazumdar Biography in Hindi

कांग्रेस के एतेहासिक लखनऊ अधिवेशन (1916) के अध्यक्ष अम्बिकाचरण मजुमदार (Ambica Charan Mazumdar) का जन्म 1850 इस्वी में पूर्वी बंगाल के फरीदपुर जिले में हुआ था | उन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज कोलकाता में एम.ए. और कानून की डिग्री ली तथा कुछ समय तक अपने ही जिले में वकालत की | सार्वजनिक कार्यो में श्री मजुमदार (Ambica Charan Mazumdar) की आरम्भ से ही रूचि थी अत: कोलकाता में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के द्वितीय अधिवेशन (1886) में वे सम्मिलित हुए |

प्रसिद्ध नेता सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के सम्पर्क का भी उनपर गहरा प्रभाव पड़ा और उनके साथ 1905 के “बंग-भंग” का उन्होंने आगे बढकर विरोध किया | वे बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे और कांग्रेस के हर अधिवेशन में आगे बढकर भाग लेते रहे | आगे चलकर अम्बिकाचरण मजुमदार (Ambica Charan Mazumdar) 1916 की लखनऊ कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गये | इस कांग्रेस की दो मुख्य विशेषताए थी | लोकमान्य तिलक के जिस नरम दल के लिए 1907 की सुरत कांग्रेस ने अपने द्वार बंद कर दिए थे लखनऊ में पुरी कांग्रेस उसके प्रभाव में आ गयी |

इसी अधिवेशन में कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच समझौता भी हुआ था | अम्बिकाचरण मजुमदार (Ambica Charan Mazumdar) नरम विचारों के राजनीतिज्ञ थे | गोपाल कृष्ण गोखले से उनके मैत्री थी | वे लिबरल फाउंडेशन के गठन में भी सहायक बने | वे उच्च कोटि के  वक्ता थे और उनकी गणना अपने समय के प्रमुख नेताओ में होती थी | 1922 में अम्बिकाचरण मजुमदार (Ambica Charan Mazumdar) का देहांत हो गया |

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