Amrita Shergill Biography in Hindi | मशहूर चित्रकार अमृता शेरगिल की जीवनी

Amrita Shergill Biography in Hindi

Amrita Shergill Biography in Hindi

नयी चित्रकला की प्रतीक अमृता शेरगिल (Amrita Shergill) का जन्म 1913 में हुआ था | संसार में बहुत थोड़े व्यक्ति हुए है जिन्होंने अपने छोटे से जीवन में अपने कार्यक्षेत्र को एक नई दिशा देने के साथ साथ ऐसे कार्य किये जिनके कारण उनके नाम को इतिहास के पृष्टो से पृथक करना अत्यंत कठिन है | अमृता शेरगिल (Amrita Shergill) की विशेषता यह है कि उन्होंने चित्रकला के प्रारम्भिक काल में ऐसे यथार्थवादी चित्रों की रचना की जिनकी संसार भर में चर्चा हुयी  उन्होंने भारतीय ग्रामीण महिलाओं को चित्रित करने का और भारतीय नारी की वास्तविक स्थिति को चित्रित करने का जो प्रयत्न किया वह अत्यंत सराहनीय है |

अमृता (Amrita Shergill) मजीठा के उमराव सिंह शेरगिल की पुत्री थी | उनका जन्म हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में हुआ था | उनकी माता हंगेरियन महिला थी | उमराव सिंह जब फ्रांस गये तो उन्होंने अपनी पुत्री की शिक्षा के लिए पेरिस में प्रबंध किया | जब वे पेरिस के एक प्रसिद्ध आर्ट स्कूल में शिक्षा प्राप्त कर रही थी तो उनके मन में अपने कुछ संबधियो के विचारों के कारण भारत आने की इच्छा जागृत हुयी | 1921 में उन्होंने इटली के फ्लोरेंस नगर में चित्रकला की शिक्षा ली , वहा उन्होंने एक नग्न महिला का चित्रण किया था |

इसके कारण उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया | वे अब तक अनुभव कर चुकी थी कि उनके जीवन का वास्तविक ध्येय चित्रकार बनना ही है इसलिए वह पेरिस में आकर पुन: शिक्षा प्राप्त करने लगी | धीरे धीरे उनके जीवन में हंगरी की चित्रकला का प्रभाव कम होता गया और उनका रुझान वास्तविकता की ओर बढने लगा ,जिसका प्रमाण उनके चित्रों में स्पष्ठ दिखाई देता है | “एक युवक सेब लिए हुए ” और “आलू छीलनेवाला” आदि उनके प्रमुख चित्र है |

भारत आने के बाद उन्होंने शिमला में अपना स्टूडियो आरम्भ किया और जिस प्रकार अपना स्वरूप बदलकर उसे भारतीय नारी का बनाया ,उसी प्रकार ऐसे अन्यतम चित्रों की रचना की जिसके कारण उनकी ख्याति बहुत जल्दी फैलने लगी | वे अपने भारतीय मूल को जागृत करना चाहती थी | 1936 में उन्होंने अजन्ता का दौरा किया तो उनके चित्रण में फिर बदलाव आया | उन्होंने लम्बे-चौड़े चित्रों के बजाय छोटे वास्तविक चित्रण का निर्माण आरम्भ किया |

इस प्रकार उन्होंने भारतीय चित्रकला को भी एक नई दिशा देकर प्रभावित किया | उनके बहुत से चित्र अवनींद्रनाथ ठाकुर और चुगताई के कार्य से प्रभावित दिखाई देते है | उनके चित्रों की विविधता उस समय ओर भी बढ़ गयी जब उन्होंने दक्षिण भारत का दौरा किया | दक्षिण भारत “ब्रह्मचारी” और “दक्षिण भारतीय ग्रामीण” “बाजार की ओर जाते हुए” “केले बेचने वाला” आदि ऐसे अनेक चित्र इस परिवर्तन क दिखाते है | उनका रुझान भारत की वास्तविक आधुनिकता की ओर था न कि उस समय शान्ति निकेतन में चले रहे प्राचीन कला आन्दोलन की ओर |

अमृता शेरगिल (Amrita Shergill) ने अपनी माता के एक सम्बधी से विवाह किया था जिसका नाम विक्टर इगान था और जो पेशे से डॉक्टर था परन्तु उनका विवाहित जीवन अल्पकालीन रहा | 1941 में केवल 28 वर्ष की आयु में एक रहस्यपूर्ण रोग के कारण उनकी मृत्यु हो गयी | 28 वर्ष में ही उन्होंने इतना और विविधतापूर्ण कार्य कर दिया था जिसके कारण उन्हें 20वी सदी के महत्वपूर्ण कलाकारों में गिना जाता है |

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