Anju Bobby George Biography in Hindi | अंजू बॉबी जार्ज की जीवनी

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Anju Bobby George Biography in Hindi | अंजू बॉबी जार्ज की जीवनी
Anju Bobby George Biography in Hindi | अंजू बॉबी जार्ज की जीवनी

भारतीय एथेलीट की दुनिया में आज अंजू बॉबी (Anju Bobby George) का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है | खेलकूद की दुनिया में लम्बी छलांग लगाने की काबिलियत के कारण अंजू ने विश्व स्तर पर अपना लोहा मनवाया है | केरल के कोट्टायम जिले के छोटे से गाँव चीरनचीरा में अंजू बॉबी जोर्ज (Anju Bobby George )का जन्म 19 अप्रैल 1977 को हुआ था | उनके बचपन का नाम अंजू मार्कोस था | अंजू अपने बचपन में सेंट एनी गर्ल्स स्कूल चंग ताचेरी में पढती थी तथा पांच वर्ष की आयु में ही एथेलेटिक्स स्पर्धाओं में भाग लेना शुरू कर दिया था | उनके पिता का नाम के.टी.मार्कोस तथा माँ का नाम ग्रेसी था | उन्होंने बचपन से ही अपनी बेटी को प्रेरित और प्रोत्साहित किया | उनके पिता एक फर्नीचर व्यवसायी है |

अंजू मार्कोस के स्कूल ने उसके लिए लम्बी कूद , थ्रो तथा दौड़ने के लिए अलग से कार्यक्रम बनाकर उसे अभ्यास का पर्याप्त मौका दिया | इसके बाद अंजू सीके केश्वरन स्मारक हाई स्कूल  , कोरुथोडू चली गयी | वहा पर सर थॉमस ने उसकी कला को चमकाया और तब अंजू ने स्कूल को लगातार 13वे साल ओवर आल खिताब दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया | यहाँ [पर उसने ऊँची कूद ,लम्बी कूद 100 मीटर दौड़ और हैप्थलोन आदि सभी खेलो की प्रैक्टिस की | उनका आदर्श पी.टी.उषा थी | अंजू (Anju Bobby George )का विवाह रोबर्ट बॉबी जोर्ज से हुआ जो कि लम्बी कूद के लिए विश्व प्रसिद्ध है | उनके नाम लम्बी कूद का विश्व रिकॉर्ड है | अंजू के घर और ससुराल दोनों जगह खेल का महौल है | उनके पति ने अंजू के लिए अपना ट्रिपल जम्प में करियर छोड़ दिया ताकि वह पूरा समय अंजू को दे सके | अंजू के अनुसार वह आज जहां पर ही वह अपने पति की वजह से ही है |

World Athletics Championship में लम्बी कूद में कांस्य पदक जीतने पर अंजू ने कहा कि देश के लिए पदक जीतकर तथा दुनिया में देश का नाम रोशन करने पर मै गर्व महसूस करती हुआ और अपने इस पदक को मै अपने राष्ट्र को समर्पित करती हु | वास्तव में यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी क्योंकि इसमें दुनिया के 210 देशो में भाग लिया था अंजू ने उन प्रतियोगियों के बीच पदक प्राप्त किया | यह किसी भी भारतीय एथीलेट द्वारा किया गया सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था |

अंजू (Anju Bobby George )के पुरे खेल जीवन की विशिष्ट उपलब्धिया थी जिससे उनका नाम खेल जगत में प्रसिद्ध हो गया | अंजू ने विश्व एथेलेटिक्स में पदक जीतने वाली प्रथम भारतीय एथेलीट है | उन्होंने वर्ष 2003 में पेरिस में “विश्व एथलेटिक्स” चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता | वर्ष 1999 में अंजू ने दक्षिण कोरियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में रजत पदक जीता | वर्ष 2001   में अंजू ने लम्बी कूद का रिकॉर्ड कायम किया उन्होंने 6.74 मीटर लम्बी छलांग लगाई | अंजू को पुरे विश्व में 13वी रैंकिंग भी मिल चुकी है | उन्होंने मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलो में कांस्य पदक जीता था | इसके बाद उन्होंने वर्ष 2002 में बुसान एशियाई खेलो में स्वर्ण पदक जीता | वर्ष 2004 में हुए एथेंस ओलम्पिक में अंजू को ध्वजवाहक का सम्मान प्राप्त हुआ |

इन तमाम उपलब्धियों के लिए वर्ष 2004 में उन्हें देश का खेल सम्मान “राजीवं गांधी खेल रत्न अवार्ड” प्राप्त हुआ | वर्ष 2005 में “हीरो हौंडा अकादमी” ने एथेलेटिक्स में अंजू बोबी जोर्ज को श्रेष्टतम खिलाड़ी नामांकित किया | दिसम्बर 2006 में हुए दोहा एशियाई खेलो में उन्होंने रजत पदक प्राप्त किया | वर्ष 1999 में एक बार उन्हें लगने लगा था कि शायद अब वे नही खेल पाएंगी और उनका खेल जीवन समाप्त हो जायगा | परन्तु दक्षिण एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीत लिया | परन्तु उनके टखने  में गहरा जख्म भी हो गया | इस चोट के कारण वे सिडनी ओलम्पिक में भाग नही ले सकी और दो वर्षो तक उन्हें खेलो से दूर रहना पड़ा |

वर्ष 2001 में अंजू पुन: उभरी और 6.74 मीटर लम्बी कूद का रिकॉर्ड कायम किया | इसके बाद अंजू ने भारत के ट्रिपल जम्प के राष्ट्रीय चैंपियन रोबर्ट बॉबी जोर्ज से सहायता ली | बाद में उन्ही के साथ अंजू ने दुनिया के जाने माने एथेलीट माइक पावेल से प्रशिक्षण लिया तथा एथेंस ओलम्पिक खेलो तक जारी रही | उनके खेल में सुधार हुआ | भारतीय ओलम्पिक संघ और सैमसंग इंडिया लिमिटेड ने मिलकर एथेंस में होने वाले 2004 के ओलम्पिक में भारतीय खिलाडियों को प्रायोजित करने का निर्णय लिया | सैमसंग ने एक ओलम्पिक फंड शुरू किया जिसने भारत के टॉप एथेलीटस को स्पोंसरशिप प्रदान की | इन प्रमुख पांच खिलाडियों में अंजू बॉबी जोर्ज (Anju Bobby George) का नाम भी शामिल था | इस फंड के द्वारा खिलाडियों के लिय सभी प्रकार की सुविधाए एवं ट्रेनिंग की व्यवस्था की गयी थी |

13 अगस्त 2004 को शूरु होने वाले एथेंस ओलम्पिक में भारतीय ध्वजवाहक का सम्मान अंजू बॉबी जोर्ज (Anju Bobby George) को दिया गया | पहले ध्वजवाहक के लिए कर्णम मल्लेश्वरी का नाम सबसे उपर था | इसके अतिरिक्त लीएंडर पेस ,धनराज पिल्लै तथा अंजली भागवत का नाम इस सूची में शामिल था लेकिन अंतत: भारतीय टीम का नेतृत्व एवं ध्वजवाहक सम्मान अंजू बॉबी जोर्ज को दिया गया | अंजू बॉबी जोर्ज के कोच एवं पति रोबर्ट जोर्ज को द्रोणाचार्य पुरुस्कार से सम्मानित किया गया | यह पुरुस्कार अंजू एवं रोबर्ट जोर्ज को 21 सितम्बर 2004 को राष्ट्रपति के द्वारा प्रदान किये गये | अंजू को पुरुस्कार के अलावा पांच लाख रूपये का नकद पुरुस्कार दिया गया | इस प्रकार अंजू बॉबी जोर्ज ने अपने खेल जीवन में अपनी कड़ी मेहनत , लग्न और एकाग्रता से ऐसी उपलब्धिया अर्जित की है जिन्हें भारतीय खेल इतिहास में सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित किया जायगा | वे युवा खिलाडियों की प्रेरणा स्त्रोत एवं पथ प्रदर्शक का कार्य करती रहगी |

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