अभिनेता अशोक कुमार की जीवनी | Ashok Kumar Biography in Hindi

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Ashok Kumar Biography in Hindi
Ashok Kumar Biography in Hindi

अभिनेता अशोक कुमार (Ashok Kumar) के पिता का नाम कुंजलाल गांगुली तथा माता का नाम गौरी देवी था | उनके पिता वकील थे और माँ एक सम्पन्न परिवार से थी | उनका जन्म बिहार के भागलपुर जिले में हुआ तथा उनके बचपन का नाम कुमुदलाल गांगुली था | यह गांगुली परिवार ब्राह्मण परिवार मध्यप्रदेश में खंडवा स्थान में बस गया था | अशोक कुमार के दो भाई अनूप कुमार तथा किशोर कुमार थे तथा एक बहन थी सती देवी | उनके दोनों भाई भी फिल्मो में अभिनय करते थे तथा गीत गाते थे |

अशोक कुमार (Ashok Kumar) का विवाह शोभा देवी से हुआ | उनकी बेटी प्रीटी गांगुली ने भी कई फिल्मो में अभिनय किया | प्रीटी गांगुली ने ही 1993 में अकादमी ऑफ़ ड्रामेटिक आर्ट्स की स्थापना की | अशोक कुमार को प्यार से दादा मोनी पुकारा जाता था | कलकत्ता के प्रेसीडेंसी कॉलेज से पढाई कर उन्होंने बॉम्बे टॉकीज में हिनाशु रॉय के अधीन लैब अस्सिटेंट का कार्य किया | 1936 में “जीवन नैया” में प्रथम बार जो अभिनय किया तो फिर पीछे मुडकर नही देखा |

6 दशको के लम्बे फ़िल्मी अभिनय के सफर में उस समय की परम्परा के अनुसार अशोक कुमार (Ashok Kumar) ने गीत भी गाये | इज्जत (1937), निर्मला (1938), सावित्री (1937) , कंगन (1939), बंधन (1940), झुला (1941), महल (1949) आदि फिल्मो से वे प्रसिद्ध हो गये | देविका रानी , लीला चिटनीस , मधुबाला और मीना कुमारी के साथ उन्होंने बतौर नायक फिल्म रोल किये | दूरदर्शन के प्रथम सोप ओपेरा “हम लोग” के रूप में उनकी भूमिका बहुत जानदार रही | उनकी अंतिम फिल्म 1997 में प्रदर्शित थी जिसका नाम था “आँखों में तुम हो” |

भारतीय फिल्मो में उनका महत्वपूर्ण स्थान रहा है | सहज स्वाभाविक अभिनय के अतिरिक्त होम्योपैथी का अध्ययन तथा दवा देना भी उनका शौक था | वे एक कुशल चित्रकार भी थे | उनके यादगार अभिनय के लिए उन्हें बहुत से सम्मान प्राप्त हुए | फिल्मो के अतिरिक्त अनेक बंगला भाषा के नाटको में भी उन्होंने अभिनय किया | उनके द्वारा अभिनीत फिल्मो की संख्या 275 है | 10 दिसम्बर 2001 को हृदयाघात से 90 वर्ष की उम्र में दादा मोनी का देहांत हो गया |

उपलब्धिया

  • 1998 में दादा साहब फाल्के अवार्ड
  • 1998 में भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण
  • 1959 में संगीत नाटक अकादमी सम्मान
  • 1962 में सर्वोत्तम नायक का फ़िल्मफेयर अवार्ड
  • 1963 में आवारा और गुमराह के लिए बग्ला फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन से सम्मानित
  • 1994 में स्टार स्क्रीन का लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड
  • 1995 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड

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