मौर्य वंश के सम्राट अशोक की जीवनी | Ashoka Biography in Hindi

0
125
मौर्य वंश के सम्राट अशोक की जीवनी | Ashoka Biography in Hindi
मौर्य वंश के सम्राट अशोक की जीवनी | Ashoka Biography in Hindi

बिन्दुसार के पुत्र औ मौर्यवंश के महान सम्राट अशोक (Ashoka) का जन्म 297 ईस्वी पूर्व माना जाता है | यह बिन्दुसार के 100 पुत्रो में से एक था और पिता इसे उत्तराधिकारी बनाने के पक्ष में नही थे | अशोक (Ashoka) को उज्जैन का सूबेदार (कुमार) नियुक्त किया गया था | कुछ समय बाद जब बड़ा भाई सुसीम तक्षशिला की ओर विद्रोह दबाने के लिए चला गया था अशोक को पिता के बीमार पड़ने की सुचना मिली | वह तुरंत पाटलीपुत्र आया और पिता की मृत्यु होते ही उसने राजगद्दी पर अधिकार कर लिया |

कुछ जनश्रुतियो के अनुसार अशोक (Ashoka) ने अपने सगे भाई को छोडकर सभी भाइयो का वध करवा दिया था पर इतिहासकार इस पर विश्वास नही करते | वे इतना मानते है कि गद्दी के लिए भाइयो में कुछ संघर्ष अवश्य हुआ होगा इसलिए 272 ईस्वी पूर्व में गद्दी पर अधिकार कर लेने पर भी अशोक का राज्याभिषेक चार वर्ष बाद ही हो सका | राज्याभिषेक के बाद उसने “प्रियदर्शी” और “देवानाप्रिय” उपाधियाँ धारण की | उसका पूरा नाम अशोकवर्द्धन था |

अपने राज्यकाल के आरम्भिक वर्ष अशोक ने आमोद-प्रमोद में बिताये | आठवे वर्ष में उसे राज्य विस्तार की सूझी | उसने महानदी और गोदावरी के बीच बंगाल की खाड़ी में स्थित कलिंग पर आक्रमण कर दिया | स्वतंत्रता प्रेमी कलिंगवासी अपनी आजादी बचाने के लिए कटिबद्ध थे | भयंकर युद्ध हुआ यद्यपि अंत में अशोक की सेना की विजय हुयी पर युद्ध में एक लाख व्यक्ति मरे ,डेढ़ लाख को कैद कर लिया गया और युद्ध के बाद पड़े अकाल तथा महामारी से मरने वालो की संख्या कई लाख पहुच गयी |

इस महाविनाश का अशोक (Ashoka) के हृदय पर व्यापक प्रभाव पड़ा | उसे अपनी करनी पर बड़ा पश्चाताप हुआ और वह युद्ध से घृणा करने लगा | यद्यपि उसके बाद वह लगभग 31 वर्ष तक आगे भी शासक था पर कलिंग युद्ध के बाद उसने कोई युद्ध नही किया| अशोक (Ashoka) ने बौद्ध धर्म अपनाया और शस्त्र विजय के स्थान पर “धर्म-विजय” के मार्ग पर चल पड़ा | उसने शिकार खेलना और माँसाहार बंद कर दिया | राज्य में “धर्म महामात्य” नामक अधिकारी नियुक्त करके उसे धर्म की वृद्धि का काम सौंपा |

देशभर में मनुष्यों और पशुओ के लिए अस्पताल खुलवाये , सडको के किनारे छायादार वृक्ष लगवाये और कुँओं का निर्माण कराया | बौद्ध धर्म का , जो गौतम बुद्ध के समय में देश के अंदर तक सिमित था अशोक के प्रयत्नों से व्यापक प्रचार हुआ | उसने सीरिया , मिस्त्र ,मेसीदोनिया, बर्मा और श्रीलंका सहित अनेक देशो में अपने धर्म प्रचारक भेजे | श्रीलंका के इतिहास ग्रंथो के अनुसार उसने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को धर्म प्रचार के लिए वहा भेजा था |

अशोक (Ashoka) ने बौद्ध धर्म से संबधित भारत के प्रमुख स्थानों की यात्राये की और स्थान स्थान पर स्तूप बनवाये तथा शिलालेखो में अपने संदेश अंकित कराये | ये शिलालेख उसकी भावना व्यक्त करते है | वह प्रजा को अपनी सन्तान समझता था | अशोक की मान्यता थी कि “लोकहित” से बढकर दूसरा कोई धर्म नही है | जो कुछ पुरुषार्थ मै करता हु वह लोगो पर उपकार नही इसलिए कि मै उनसे ऋण हो जाऊ और उन्हें इहलौकिक सुख और परमार्थ प्राप्त कराऊ |

मान्यता है कि उसने एक हजार स्तुपो का निर्माण कराया था | आधुनिक तकनीक के विकास से पहले एक पत्थर के इतने लम्बे स्तुपो का निर्माण , उनका एक स्थान से दुसरे स्थान पर ले जाना और उनपर आश्चर्यजनक पालिश एक चमत्कार माना जाता है | सारनाथ में प्राप्त अशोक स्तम्भ का शीर्ष , जो भारत का राजचिन्ह है तत्कालीन कला का अद्भुद नमूना है | अशोक (Ashoka) का राज्य उत्तर पश्चिम में हिन्दुकुश से पूर्व में बंगाल तक और उत्तर में हिमालय की तराई से दक्षिण में वर्तमान आंध्रप्रदेश और कर्नाटक तक फैला था |

अशोक (Ashoka) की धर्म पर आधारित राजनीति के संबध में दो मत व्यक्त किये जाते है | कुछ का कहना है कि यदि अशोक ने अपने दादा और पिता की भांति राज्य का विस्तार जारी रखा होता तो भारतीय साम्राज्य रोमन साम्राज्य की भांति विस्तृत होता | उसकी निति से सैन्य शक्ति दुर्बल हो गयी और यूनानियो के आक्रमणों का सामना न कर सकी | दुसरे इतिहासकार मानते है कि उसकी धर्म पर आधारित निति से स्थापत्य और मूर्तिकला विकसित हुयी | एक लिपि का प्रचार हुआ , सह-अस्तित्व ,उदारता ,सहिष्णुता और अंतर्राष्ट्रीय बन्धुत्व को बल मिला | इससे अन्तर्राष्ट्रीय जगत में भारत की प्रतिष्ठा बढी |

जो भी हो , इतना निश्चित है कि अशोक ने तत्कालीन बर्बर कृत्यों के इतिहास को अपनी शान्ति की निति से नया मोड़ दिया | इस अर्थ में वह संसार भर में अकेला सम्राट था जिसे “बर्बरता के महासागर में शान्ति और संस्कृति का एकमात्र द्वीप” कहा गया है | अशोक (Ashoka) का राज्यकाल 272 ईस्वी पूर्व से 232 ईस्वी पूर्व तक माना जाता है | बौद्धों की तीसरी संगति उसी समय में हुयी थी | उसका निधन तक्षशिला में बताया जाता है | उसके बाद उसका पोता दशरथ गद्दी पर बैठा |

सम्राट अशोक का जीवन एक नजर में | Samrat Ashoka Facts in Hindi

जन्म तिथि अज्ञात
जन्म स्थान पाटलीपुत्र (वर्तमान पटना)
मृत्यु तिथि 232 ईसा पूर्व
मृत्यु स्थान पाटलीपुत्र (वर्तमान पटना)
पत्नीयाँ असंधिमित्रा
देवी
करुवाकी
पद्मावती
तिश्यर्क्षा
बच्चे महेंद्र
तिवल
कुनाल
जलूका
चारुमती
संघमित्रा
वंश मौर्य वंश
पिता  बिन्दुसार
माता सुभद्रांगी
मौर्य वंश का तीसरा सम्राट
शासनकाल 268 ईसा पूर्व – 232 ईसा पूर्व
राजतिलक 268 ईसा पूर्व
पूर्वाधिकारी बिन्दुसार
उतराधिकारी दशरथ

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here