Baba Amte Biography in Hindi | समाजसेवी बाबा आम्टे की जीवनी

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Baba Amte Biography in Hindi
Baba Amte Biography in Hindi

विख्यात समाजसेवक बाबा आम्ते (Baba Amte) का जन्म 24 दिसम्बर 1914 को वर्धा के निकट एक ब्राह्मण जागीरदार परिवार में हुआ | उनका पूरा नाम मुरलीधर देवीदास आम्टे है | बचपन से माता-पिता उन्हें बाबा पुकारते थे इसलिए बाद में भी वे बाबा आम्टे (Baba Amte) के नाम से प्रसिद्ध हुए | उनके अंदर सबके प्रति समान व्यवहार की और सेवा की भावना बचपन से ही थी | 9 वर्ष के थे तभी एक अंधे भिखारी को देखकर इतने द्रवित हुए कि उन्होंने ढेरो रूपये उसकी झोली में डाल दिए थे |

बाबा आम्टे (Baba Amte) ने कानून की शिक्षा ली और वर्धा में वकालत करने लगे परन्तु जब उनका ध्यान अपने तालुके के लोगो की गरीबी की ओर गया तो वकालत छोडकर वे अत्य्न्जो और हरिजनों की सेवा में लग गये | उनका विवाह भी एक सेवा धर्मी युवती साधना से विचित्र परिस्थिथियो में हुआ | उसके बाद उन्होंने कुष्ट रोग से पीड़ित लोगो की सेवा और सहायता का काम हाथ में लिया | कुष्ट रोगियों के लिए बाबा आम्टे ने सर्वप्रथम ग्यारह साप्ताहिक औषधालय किये , फिर “आनन्दवन” नामक संस्था की स्थापना की |

उन्होंने कुष्ट की चिकित्सा का प्रशिक्षण तो लिया ही , अपने शरीर पर कुष्ट निरोधी औषधियों का परीक्षण भी किया | 1951 में “आनन्दवन” की रजिस्ट्री हुयी | सरकार से इस सेवा कार्य के विस्तार के लिए भूमि मिली | बाबा आम्टे के प्रयत्न से दो अस्पताल बने ,विश्वविद्यालय स्थापित हुआ , एक अनाथालय खोला गया ,नेत्रहीनो के लिए स्कूल बना और तकनीकी शिक्षा की भी व्यवस्था हुयी | “आनन्दवन” आश्रम अब पुरी तरह आत्मनिर्भर है और लगभग 5000 व्यक्ति उससे अपनी आजीविका चला रहे है |

बाबा आम्टे (Baba Amte) ने 1985 में कश्मीर से कन्याकुमारी तक “भारत जोड़ो” आन्दोलन आरम्भ किया | 1988 में इसे अगले चरण के रूप में आसाम से गुजरात्त चलाया | बाबा को और उनके परिवार को अनेक पुरुस्कार मिले | इस रूप में मिला डेढ़ करोड़ रुपया भी उन्होंने आनन्दवन को दे दिया | राष्ट्रपति ने उनको पद्मविभूषण के सम्मान से अलंकृत किया | 9 फरवरी 2008 को उनका देहांत हो गया |

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