Bankim Chandra Chatterjee Biography in Hindi | महान कवि बंकिम चन्द्र चटर्जी की जीवनी

Bankim Chandra Chatterjee Biography in Hindi

Bankim Chandra Chatterjee Biography in Hindi

बंग्ला भाषा के प्रसिद्ध लेखक बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय (Bankim Chandra Chatterjee) का जन्म 27 जून 1888 को बंगाल के परगना जिले के कांठलपाड़ा नामक गाँव में एक सम्पन्न परिवार में हुआ था | “वन्दे मातरम” राष्ट्र गीत के रचियता होने के नाते वे बड़े सम्मान के साथ याद किये जायेंगे | उनकी शिक्षा बंगला के साथ साथ अंग्रेजी , संस्कृत में भी हुयी थी | आजीविका के लिए उन्होंने सरकारी सेवा की परन्तु राष्ट्रीयता और स्वभाषा प्रेम उनमे कूट कूट कर भरा हुआ था | युवावस्था में उन्होंने अपने एक मित्र का अंग्रेजी में लिखा हुआ पत्र बिना पढ़े ही इस टिप्पणी के साथ लौटा दिया था कि अंग्रेजी ना तो तुम्हारी मातृभाषा है और ना ही मेरी | सरकारी सेवा में रहते हुए भी वे कभी अंग्रेजो से दबे नही |

बंकिम (Bankim Chandra Chatterjee) ने साहित्य के क्षेत्र में कुछ कविताये लिखकर प्रवेश किया | उस समय बंग्ला में गध्य या उपन्यास कहानी की रचनाये कम लिखी जाती थी | बंकिम (Bankim Chandra Chatterjee) ने इस दिशा में पथ-प्रदर्शक का काम किया | 27 वर्ष की उम्र में उन्होंने “दुर्गेशनंदिनी ” नाम का उपन्यास लिखा | इस एतेहासिक उपन्यास से ही साहित्य में उनकी धाक जम गयी | फिर उन्होंने “बंग दर्शन” नामक साहित्यिक पत्र का प्रकाशन आरम्भ किया | रवीन्द्रनाथ ठाकुर “बंग दर्शन” में लिखकर ही साहित्य के क्षेत्र में आये | वे बंकिम को अपना गुरु मानते थे | उनका कहना था कि बंकिम बंगला लेखको के गुरु और बंग्ला पाठको के मित्र है |

बंकिम (Bankim Chandra Chatterjee) के दुसरे उपन्यास “कपाल कुंडलिनी” “मृणालिनी” “विषवृक्ष” “कृष्णकान्त का वसीयतनामा” “रजनी” “चंद्रशेखर” आदि प्रकाशित हुए | राष्ट्रीय दृष्टि से “आनन्दमठ” उनका सबसे प्रसिद्ध उपन्यास है | इसी में सर्वप्रथम “वन्दे मातरम्” गीत प्रकाशित हुआ था | एतेहासिक और सामजिक तानेबाने से बुने हुए इस उपन्यास ने देश में राष्ट्रीयता की भावना जागृत करने में बहुत योगदान दिया | लोगो ने यह समझ लिया था कि विदेशी शासन से छुटकारा पाने की भावना अंग्रेजी भाषा या यूरोप का इतिहास पढने से नही जायगी | इसका प्रमुख कारण था अंग्रेजो द्वारा भारतीयों का अपमान और उन पर तरह तरह के अत्याचार | बंकिम (Bankim Chandra Chatterjee) के दिए “वन्दे मातरम्” मन्त्र ने देश के सम्पूर्ण स्वतंत्रता संग्राम को नई चेतना से भर दिया |

“देवी चौधरानी” उनका एक अन्य उपन्यास और “कमलाकांत का रोजनामचा” गम्भीर निबन्धों का संग्रह है | एक ओर विदेशी सरकार की सेवा और देश के नवजागरण के लिए उच्च कोटि के साहित्य की रचना करना यह काम बंकिम (Bankim Chandra Chatterjee) के लिए ही सम्भव था | आधुनिक बंगला साहित्य के राष्ट्रीयता के जनक इस नायक का 8 अप्रैल 1894 को देहांत हो गया |

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