Bhai Parmanand Biography in Hindi | राष्ट्रवादी भाई परमानंद की जीवनी

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Bhai Parmanand Biography in Hindi
Bhai Parmanand Biography in Hindi

राष्ट्रीय विचारों के लिए विदेशी सरकार ने जिनके मृत्युदंड की घोषणा की और जो हिन्दू महासभा के प्रमुख नेता बने , उन भाई परमानन्द (Bhai Parmanand) का जन्म 1874 ईस्वी में पंजाब के झेलम जिले में हुआ था | उन्होंने D.A.V. कॉलेज लाहौर और पंजाब यूनिवर्सिटी से अपनी शिक्षा पुरी की | वे आरम्भ में ही आर्यसमाज के नेता लाला लाजपत राय और महात्मा हंसराज के प्रभाव में आ गये थे | अत: D.A.V. कॉलेज में अध्यापन कार्य करने के साथ ही वे आर्यसमाज का प्रचार करते रहे | 1905 में वे दक्षिणी अफ्रीका गये और वहा समाज की शाखा स्थापित की |

दक्षिणी अफ्रीका से वे इतिहास का अध्ययन पूरा करने के लिए लन्दन गये और 1908 में भारत आकर D.A.V. लाहौर में फिर अध्यापन लरने लगे | उन्होंने बर्मा की ओर दुबारा दक्षिणी अफ्रीका की यात्रा की | इस बीच उन्होंने उर्दू में “तवारिखे हिन्दू” नामक भारत के इतिहास की पुस्तक लिखी | इसे सरकार ने जब्त कर लिया | उनके घर की तलाशी हुयी और तीन वर्ष तक अच्छा चाल-चलन रखने के लिए उनसे जमानत देने को कहा |

इस पर भाई परमानन्द (Bhai Parmanand) ने भारत छोड़ दिया और ब्रिटेन ,गायना और त्रिनिनाद होते हुए अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया में जा पहुचे | वहा परमानन्द के बचपन के मित्र लाला हरदयाल गदर पार्टी का काम कर रहे थे | 1913 में भाई परमानन्द (Bhai Parmanand) लौटे तो गदर पार्टी के नेता के रूप में गिरफ्तार करके उन पर भी प्रथम लाहौर षड्यंत्र केस में मुकदमा चला और 1915 में फांसी की सजा घोषित हो गयी | बाद में वायसराय ने आजीवन कारावास में बदल दिया और वे सजा काटन के लिए अंडमान की सेलुलर जेल भेज दिए गये |

1920 में सी.एफ.एंड्रूज की मध्यस्था से उन्हें रिहा कर दिया गया था | जेल से बाहर आने पर वे नेशनल कॉलेज लाहौर के कुलपति बने और कुछ समय तक असहयोग आन्दोलन में भाग लिया किन्तु आन्दोलन बंद होने के बाद देश में जो साम्प्रदायिक दंगे हुए उन्हें देखकर भाई परमानन्द (Bhai Parmanand) के विचार बदल गये | उन्होंने कांग्रेस पर मुस्लिम परस्ती का आरोप लगाकर हिन्दुओ से हिन्दू महासभा के झंडे के नीचे संघठित होने का आह्वान किया | हिन्दुओ का पक्ष प्रस्तुत करने के लिए 1933 में वे इंग्लैंड गये और उसी वर्ष महासभा के अजमेर अशिवेशन की अध्यक्षता की | हिन्दुओ के हित रक्षा के लिए संघर्षरत भाई परमानन्द का 18 दिसम्बर 1947 को देहांत हो गया |

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