Biju Patnaik Biography in Hindi | आधुनिक उडीसा के निर्माता बीजू पटनायक की जीवनी

Biju Patnaik Biography in Hindi

Biju Patnaik Biography in Hindi

आधुनिक उडीसा के निर्माता के रूप में प्रसिद्ध राजनेता और उद्योगपति बीजू पटनायक (Biju Patnaik) का जन्म 5 मार्च 1916 को कटक में हुआ था | वे आरम्भ से ही बड़े साहसी प्रवृति के थे  स्नातक की शिक्षा अधूरी छोडकर पटनायक पायलट बन गये | द्वितीय विश्वयुद्ध में उन्होंने अंग्रेजो की वायुसेना में काम किया | युद्ध की समाप्ति के बाद उन्होंने राजनीति और उद्योग क्षेत्रो में प्रवेश किया | उन्होंने “कलिंग इंटरप्राइजेज” की स्थापना की | कलिंग एयरलाइन नामक हवाई बेड़ा खड़ा किया |

1945 में बीजू पटनायक (Biju Patnaik) अपने साहसिक कार्य के कारण अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में चर्चा में आ गये | जापानियों के हाथो पराजित डच अधिकारी युद्ध के बाद इंडोनेशिया पर कब्जा करके वहा के राष्ट्रीय नेताओं को देश से बाहर ले जाने की योजना बना रहे थे | तभी नेहरु जी के कहने पर बीजू पटनायक अकेले अपना जहाज लेकर जकार्ता पहुचे और शहरयार सहित वहा के राष्ट्रीय नेताओं को सुरक्षित बाहर निकाल लाये थे | इस उपकार के लिए इंडोनेशिया ने उन्हें अपना सर्वोच्च पुरुस्कार “भूमिपुत्र” दिया था |

इसी प्रकार 1948 में क्बाइलो और छद्म वेश में पाकिस्तानी सैनिको ने कश्मीर पर आक्रमण किया तो भारतीय सेना को सबसे पहले श्रीनगर के हवाई अड्डे पर बीजू पटनायक ने ही उतारा था | 1960 के बाद वे चुनावी राजनीति में प्रविष्ट हुए और उडीसा के मुख्यमंत्री बने | उनकी क्षमता और योग्यता को देखकर 1962 में चीनी आक्रमण के बाद नेहरु जी ने बीजू (Biju Patnaik) को दिल्ली बुला लिया और वे “गोपनीय” कार्यो में प्रधानमंत्री की सहायता करते रहे |

फिर वे उडीसा की राजनीति में लौटे पर शीघ्र ही अनेक विवादों के घेरे में आ गये | 1975 के आपातकाल एम् अन्य नेताओं के साथ उन्हें भी जेल में बंद रहना पड़ा | जब मोरारजी देसाई की सरकार बनी तो बीजू (Biju Patnaik) इस्पात मंत्री के रूप में केंद्र सरकार में सम्मिलित हो गये पर यह सरकार अधिक दिन नही चली | उसके बाद बीजू पटनायक फिर उडीसा की जनता दल सरकार के मुख्यमंत्री बने | पांच वर्ष तक इस पद पर रहकर अपने प्रदेश में अनेक निर्माण कार्य करने के बाद 1996 में बीजू लोकसभा के सदस्य चुने गये | बीजू पटनायक (Biju Patnaik) का नाम विजयानंद था पर उन्हें कभी इस नाम से पुँकारा नही गया | 81 वर्ष की उम्र में 17 अप्रैल 1997 को उनका देहांत हो गया |

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