Bina Das Biography in Hindi | क्रांतिकारी बीना दास की जीवनी

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Bina Das Biography in Hindi
Bina Das Biography in Hindi

क्रांतिकारी बीना दास (Bina Das) का जन्म 24 अगस्त 1911 को कृष्णानगर में हुआ था | उनके पिता बेनी माधव दास बहुत प्रसिद्ध अध्यापक थे और नेताजी सुभाषचंद्र बोस भी उनके छात्र रह चुके थे | बीना की माता सरला दास भी सार्वजनिक कार्यो में बहुत रूचि लेती थी और निराश्रित महिलाओं के लिए उन्होंने “पुण्याश्रम” नामक संस्था बनाई थी | ब्रह्म समाज का अनुयायी यह परिवार शुरू से ही देशभक्ति से ओत-प्रोत था | इसका प्रभाव बीना दास और उनकी बहन कल्याणी दास पर भी पड़ा | साथ बंकिमचन्द्र चटर्जी और मेजिनी , गेरी वाल्डी जैसे लेखको की रचनाओं ने उनके विचारों को नई दिशा दी |

1928 में साइमन कमीशन के बहिष्कार के समय बीना (Bina Das) ने कक्षा की कुछ अन्य छात्राओं के साथ अपने कॉलेज के फाटक पर धरना दिया | वे स्वयंसेवक के रूप में कांग्रेस अधिवेशन में भी सम्मिलित हुयी | उसके बाद वे “युगांतर” दल के क्रान्तिकारियो के सम्पर्क में आयी | उन दिनों क्रान्तिकारियो का एक काम बड़े अंग्रेज अधिकारियों को गोली का निशाना बनाकर यह दिखाना चाहता था कि भारतवासी उनसे कितनी नफरत करते है | बीना दास को बी.ए. की परीक्षा पुरी करके दीक्षांत समारोह में अपनी डिग्री लेते समय वे दीक्षांत भाषण देने वाले बंगाल के गर्वनर स्टेनली जेक्सन को अपनी गोली का निशाना बनायेगी |

6 जनवरी 1932 की बात है | दीक्षांत समारोह में गर्वनर ज्यो ही भाषण देने लगा , बीना दास अपनी सीट पर से उठी और तेजी से गर्वनर के सामने जाकर रिवाल्वर चला दी | उन्हें आता देखकर गर्वनर थोडा सा हिला जिससे निशाना चुक गया और वह बच गया | बीना को वही पकड़ लिया गया | मुकदमा चला जिसकी सारी कारवाई एक ही दिन में पुरी करके बीना दास (Bina Das) को नौ वर्ष की कड़ी कैद की सजा दे दी गयी | अपने अन्य साथियो का नाम बताने के लिए पुलिस ने उन्हें बहुत सताया , पर बीना ने मुह नही खोला |

1937 में प्रान्तों में कोंग्रेसी सरकार बनने के बाद अन्य राजबंदियो के साथ बीना भी जेल से बाहर आ गयी | “भारत छोड़ो आन्दोलन” के समय उन्हें तीन वर्ष के लिए नजरबंद कर लिया गया था | 1946 से 1951 तक वे बंगाल विधानसभा की सदस्य रही | गांधीजी की नौआखाली यात्रा के समय लोगो के पुनर्वास के काम में बीना (Bina Das) ने भी आगे बढकर भाग लिया |

 

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  1. महान क्रातिंकारी श्रीमती बीना दास को शत शत नमन

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