Charles Dickens Biography in Hindi | उपन्यासकार चार्ल्स डिकेंस की जीवनी

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Charles Dickens Biography in Hindi | उपन्यासकार चार्ल्स डिकेंस की जीवनी
Charles Dickens Biography in Hindi | उपन्यासकार चार्ल्स डिकेंस की जीवनी

चार्ल्स डिकेंस (Charles Dickens) एक अंग्रेजी लेखक और समाज सेवक थे | चार्ल्स (Charles Dickens) में विश्व की सुप्रसिद्ध काल्पनिक पात्रो को जन्म दिया था जिसके कारण उन्हें उनके दौर का सबसे महान उपन्यासकार माना जाता है | शिक्षा की कमी होने के बावजूद होन्हे अपने 20 साल के लेखन काल में 15 उपन्यास  और सौ से भी ज्यादा छोटी कहानिया लिखी थी | उनके अधिकतर लेखो में समाज से जुड़े मुद्दे होते थे जिसके कारण उनके उपन्यास और लेखो को बहुत पसंद किया गया था | आइये आज हम आपको इस महान उपन्यासकार की जीवनी से रूबरू करवाते है |

चार्ल्स डिकेंस (Charles Dickens) का जन्म 7 फरवरी 1812 को इंग्लैंड के लैंडपोर्ट शहर के पोटर्समाउथ इलाके में हुआ था | वह विक्टोरियन युग के सबसे लोकप्रिय अंग्रेजी उपन्यासकार थे | न केवल उपन्यासकार बल्कि एक महान चिंतक भी थे | उन्होंने अपनी रचनाओ से सामजिक कुरीतियों के खिलाफ जमकर आवाज उठाई थी | डिकेंस के पिता मामूली सरकारी क्लर्क थे | वह सदा आमदनी से अधिक खर्च करते थे और इस कारण उन्हें आजीवन आर्थिक संकट झेलना पड़ा था |

जब डिकेंस के पिता छोटे थे उनके पिता ऋणग्रस्त होने के कारण जेल गये और डिकेंस को बूट पॉलिश बनाने वाली फक्ट्री में नौकरी करनी पड़ी | इस अनुभव को डिकेंस ने दो उपन्यासों “डेविड कॉपरफील्ड ” और “लिटिल ड़ोरिट” में अंकित किया है | डिकेंस की माँ बहुत समझदार नही थी तथा शिक्षा के विरुद्ध थी | उनका क्रूर चित्र मिसेज निकिलबी नामक पात्र में है | उनके पिता का चित्रण मिस्टर मिकोबर और मिस्टर डोरिट जैसे किरदारों के रूप में हुआ है |

डिकेंस (Charles Dickens) की प्रसिद्ध रचनाओं में “पिकविक पेपर्स” “ओलिवर ट्विस्ट” “निकोलस निकिलबी” “टेल ऑफ़ टू सिटिज ” आदि शामिल है | इन कथाओं में डिकेंस ने तत्कालीन अंग्रेजी समाज एके कुप्रथाओ और कुरीतियों पर प्रहार किया है | उन्होंने सैकड़ो अम्र पात्रो का सृजन किया ,जो जनता की स्मृति में सुरक्षित है | वह किस्सोंगोई के मामले में दक्ष थे किन्तु मनोरंजन के साथ उन्होंने पाठक संसार का सांस्कृतिक और नैतिक धरातल भी उंचा किया |

गरीब और उजड़े-बिखरे लोग चार्ल्स डिकेंस की कहानियों में जीते जागते किरदार के रूप में आते थे | ठीक वैसे ही जैसे जमींदार ,डॉक्टर ,वकील या गुंडे मवाली आते थे | हकला वहा हकलाता हुआ और नाक से बोलने वाला नकियाता हुआ आता था | अंग्रेजी व्याकरण और वर्तनी की चिंता उन्होंने कभी नही की थी | डिकेंस की सबसे ज्यादा आलोचना इसके लिए होती है कि उनकी कहानिया हमेशा सुखद और हल्के नोट पर खत्म होती है | क्लासिक रचनाओ की तरह अपने पाठको को बेधती नही लेकिन अब इसका क्या करे कि उनके किरदार जो एक बार दिमाग पर चढ़ते है तो फिर अपने विचित्र नामो और संवादों समेत उतरने का नाम नही लेते है |

असल में डिकेंस (Charles Dickens) खुद में एक क्लास है जिस वजह से आधुनिक क्लासिक प्रसिद्ध लेखक लियो टॉलस्टॉय उनको 19वी सदी का सबसे बड़ा कथाकार कहते थे | इस अमर साहित्यकार का निधन 9 जून 1870 को हुआ था | कहते है कि उनकी कब्र को खुला ही छोड़ दिया गया था | यह मिट्टी से नही उनके प्रशंसको के चढाये गुलदस्तो से भरी जिसमे कई तो सिर्फ चिथड़ो में लिपटे जंगली फूलो के गुच्छे भरे थे | ये अनोखे गुलदस्ते गलियों में भटकने वाले बेसहारा बच्चो की ओर से उस लेखक को भेंट किये गये थे जिसने मानव इतिहास में पहली बार उनके मन में झाँककर देखा था | परियो ,राजाओ की तरह उन्हें भी कहानियों का हिस्सा बनाया था |

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