क्रिस्टोफर कोलम्बस की जीवनी | Christopher Columbus Biography in Hindi

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क्रिस्टोफर कोलम्बस की जीवनी  | Christopher Columbus Biography in Hindi
क्रिस्टोफर कोलम्बस की जीवनी | Christopher Columbus Biography in Hindi

क्रिस्टोफर कोलम्बस (Christopher Columbus) विश्व के महानतम साहसी व्यक्तियों में से एक थे जिन्होंने अपने अदम्य आत्मविशवास से मार्ग में आने वाली अनेक कठिनाईयों एवं बाधाओं का सामना किया | जीवन भर तिरस्कार और अपमान की पीड़ा भोगते हुए भी उन्होंने जो कारनामा कर दिखाया , उसके लिए इतिहास में अमर हो गये | कोलम्बस ने न केवल अमेरिका की खोज की थी अपितु समुद्री मार्गो का पता भी लगाया | उन्होंने पृथ्वी की कर्क रेखा की वास्तविक स्थिति की खोज की | आइये कोलम्बस की जीवने के बारे में आपको विस्तार से बताते है |

कोलम्बस (Christopher Columbus) के जीवन के सम्बन्ध में कोई प्रामाणिक तथ्य उपलब्ध नही है तथापि कोलम्बस के बारे में यह कहा जाता है कि उनका जन्म इटली के समुद्रतट पर बसे नगर गेनेआ में सन 1451 में हुआ था | उनके पिता डोमिनिको कोलम्बो पेशे से जुलाहा थे | बाद में उनका परिवार गेनेआ से सेओना शहर आ बसा | कोलम्बस को बचपन से ही समुद्री यात्राओं का बहुत शौक था | मात्र 14 साल की उम्र में उन्होंने समुद्री यात्राओं का जोखिम उठाना आरम्भ कर दिया था | उन्होंने कई समुद्री युद्ध भी जीते थे |

कोलम्बस (Christopher Columbus) का विवाह पुर्तगाल की फिलिपा पेरेस्टोला के साथ सन 1478 में हुआ था | 1479 में उनके एक पुत्र हुआ जिसका नाम उन्होंने डीगो रखा था | इसके बाद कोलम्बस अपने बहनोई के द्वीप मेडीरा रहने चले गये | वहा दक्षिण अटलांटिक महासागर की कई समुद्री यात्राए करके उन्होंने कई अनुभव प्राप्त किये | लिस्बन आकर उन्होंने मार्कोपोलो की समुद्री यात्रा का अध्ययन करने के साथ साथ टॉलमी के नक्शे का अध्ययन कर पश्चिम दिशा से पूर्व दिशा की ओर यानि एशिया महाद्वीप की यात्रा करने की सोची थी | इस हेतु उन्होंने पुर्तगाल तथा ब्रिटेन के सम्राट से अनुमति माँगी किन्तु उन्हें निराशा ही हाथ लगी |

कोलम्बस (Christopher Columbus) ने अपनी इस योजना को स्पेन के राजा फरदीनन्द तथा रानी इसाबेला के सामने रखा | सन 1486 में इस यात्रा हेतु उन्हें सहमती मिल गयी | कोलम्बस ने विश्वास दिलाया कि वह ऐसे स्थान पर जा रहे है जहा सोना ,चांदी तथा बहुमूल्य रत्न मिलेंगे और वहा पर सपना का शासन भी स्थापित होगा | राजा द्वारा बनाई समिति ने 4 साल तक कोई निर्णय नही लिया जिसके कारण यह योजना ठंडे बस्ते पड़ी रही | निराश कोलम्बस को स्पेन के पादरी तथा नक्षत्र विज्ञानी एंटोनियो तथा एक जहाज मालिक मार्टिन एल्न्सो पिंजों से सहयोग मिला |

जहाज और धन की व्यवस्था होते ही कोलम्बस यात्रा के लिए निकल पाते तो राजा फरदीनन्द ने कोलम्बस से पूछा “खोज में जो कुछ भी मिलेगा तो कोलम्बस उसका क्या मूल्य लेगा ?” कोलम्बस ने बड़ी दृढ़ता के साथ कहा “सामंत का दर्जा ,ग्रैंड अडमिरल और वायसराय की पदवी मेरे तथा मेरे परिवार को दी जाए “| राजा ने इसे नामंजूर कर दिया | बाद में रानी इसाबेला ने कहने पर उनकी शर्ते मान ली गयी | कोलम्बस को धन और यात्रासुलभ सभी प्रकार की सुविधाए प्रदान की गयी |

3 अगस्त 1942 को कोलम्बस (Christopher Columbus) पुरी तैयारी के साथ छोटे से जहाज पर सवार होकर 12 अगस्त को केनेरी द्वीप पहुचे | 6 सितम्बर 1942 को कोलम्बस तीन जहाजो (पिंटा , निना और सांतामारिया) का नेतृत्व करते हुए अपने दोनों मित्रो के साथ पश्चिम दिशा की ओर चल निकले | समुद्र की अनंत सीमा के बीच पहुचकर कोलम्बस ने अपने आत्मविशवास के साथ 700 किमी दूर धरती पर पहुचने का संकल्प लिए बढ़ चले थे | उनके साथी भयभीत थे | 3 दिन पूरा होते होते कोलम्बस अनिश्चित रास्तो से बढ़ते हुए भी स्पेन जा पहुचे थे |

सुखद आश्चर्य से भरे हुए कोलम्बस ने सपने की धरती पर अपना झंडा गाड़ दिया था | एक सप्ताह तक द्वीप की सुन्दरता तथा उससे प्राप्त होने वाले सोने की आशाओं में भटकते रहे | निराश होकर वे आगे की यात्रा पर बढ़ चले | इस बीच कोलम्बस का सहयात्री जहाज पिंटा गायब हो गया था | वे आशंकाओं से भरकर उसे खोजते हुए हाईतू द्वीप पहुचे | वहा के निवासियों से मिलकर वे बहुत पर प्रभावित हुए | सोने की खोज में क्यूबा पहुचने पर उन्हें सोने की बजाय तम्बाकू मिला |

हाईतू द्वीप पर कोलम्बस (Christopher Columbus) ने एक किले का निर्माण भी करवाया था | उनका सांतामारिया जहाज भी नष्ट हो चूका था | अब वह एकमात्र जहाज नीना पर सवार थे | स्पेन लौटना मुश्किल था फिर भी वे स्पेन लौटे | रास्ते में उन्हें पिंटा जहाज के साथ पिजोन मिला | पिजों और कोलम्बस के बीच काफी कहीसूनी हुयी फिर दोनों यूरोप की यात्रा पर निकल पड़े | खराब मौसम ,समुद्री तूफ़ान की भयानकता अचानक बाधा बनकर उनके सामने थी | पिंटा जहाज फिर भटक गया | कोलम्बस नीना के क्षतिग्रस्त होने पर काफी घबराए | उन्होंने इस अपनी अंतिम यात्रा जानकर खोज की हुयी सारी जानकारियाँ लिखकर एक लकड़ी के डब्बे में सुरक्षित जहाज पर रख दी |

इसी यात्रा के दौरान कोलम्बस (Christopher Columbus) ने अमेरिका की खोज भी कर डाली थी | 15 मार्च 1493 को स्पेन पहुचने पर राजा और रानी ने कोलम्बस को शर्त के अनुसार न केवल पदविया दी बल्कि उन्हें अपार धनराशि और अगली यात्रा हेतु सहमति भी दी | वे सितम्बर 1493 को 17 पोतो पर करीब डेढ़ हजार लोगो को अपने साथ ले जाकर अमेरिका और आसपास के द्वीपों पर बसाना चाहते थे क्योंकि वहा बहुत सोना था | पादरी ,डॉक्टर ,सर्जन किसान के साथ साथ कोलम्बस अपने साथ डीगो को भी ले गये |

कोलम्बस (Christopher Columbus) हाईतू द्वीप पर भी जा पहुचे थे जहा उन्होंने एक किले का निर्माण कर 38 स्पेनवासियों को उसकी रखवाली हेतु छोड़ दिया था | स्थानीय लोगो ने उन 38 लोगो की हत्या कर  डाली थी | कोलम्बस का यहा बहुत अपमान हुआ | उनके स्वभाव में कठोरता और गुस्से होने की वजह से वे लोगो को नाराज कर देते थे | पश्चिमी दिशा की ओर अपनी समुद्री यात्रा में वह वेस्ट इंडीज द्वीप जा पहुचे थे | एशिया द्वीप की खोज में भटकते भटकते वो अमेरिका के खोजकर्ता बन गये |

वेस्ट इंडीज से जैसे ही वह हाईतू द्वीप पहुचे वहा 5 महीनों तक बीमारी के साथ साथ स्थानीय विद्रोह से ग्रसित रहे | विद्रोहियों को जहाजो में भरकर स्पेन भेजा गया | 10 मार्च 1946 को कोलम्बस को स्वागत सम्मान के साथ तीसरी यात्रा की स्वीकृति भी मिली | 6 जहाजो पर 200 लोगो को सवार कर वे त्रिनिदाद द्वीप समूह को खोज निकालने में सफल रहे | यहा उन्हें सोना नही मिला | तीसरी यात्रा में पुन: हाईतू द्वीप पहुचने पर कोलम्बस को भारी विद्रोह का सामना करना पड़ा | उनकी शिकायते राजा फरदीनन्द तक भी जा पहुची थी |

कोलम्बस और उनके भाइयो को सम्पति ,किला ,हथियार भंडार सब कुछ सौंपने को कहा | मना करते ही कोलम्बस और उनके भाइयो को जंजीरों से जकड़कर स्पेन लाया गया | जंजीर से बंधे कोलम्बस ने दुःख और क्षोभ में कुछ नही कहा यद्यपि कोलम्बस को मुक्त यात्रा की सुविधा दे दी गयी थी | किन्तु चौथी यात्रा के लिए अपने अपमान के कारण कोलम्बस पुरी तरह टूट चुके थे | राजा रानी के विश्वासघात के धक्के ने उन्हें बीमार कर दिया | इसके बाद भी उन्होंने जमैका की खोज की | 29 मई 1506 को मृत्यु के साथ सागर में समा गये |

कोलम्बस (Christopher Columbus) एक साहसी , परिश्रमी ,दूरदर्शी ,दृढ़संकल्पी यात्री थे | उन्होंने अपनी समुद्र यात्रा के दौरान अपार सम्मान पाया था | जब उन्हें जंजीरों से पकड़कर स्पेन लाया जा रहा था तो लोग उनकी जंजीरों को खोल देना चाहते थे किन्तु कोलम्बस ने ऐसा करने से उन्हें रोक दिया | अपने परिश्रम , संघर्ष और राष्ट्रभक्ति का उन्हें जो दंड मिला उसने उन्हें भीतर तक हिला दिया था | संसार को सीख देने के लिए ही शायद उन्होंने अपनी जंजीरों को अपनी कब्र पर रखवाया था |

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