भारतीय सिनेमा के पितामह दादासाहब फाल्के की जीवनी | Dadasaheb Phalke Biography in Hindi |

1
139
भारतीय सिनेमा के पितामह दादासाहब फाल्के की जीवनी | Dadasaheb Phalke Biography in Hindi |
भारतीय सिनेमा के पितामह दादासाहब फाल्के की जीवनी | Dadasaheb Phalke Biography in Hindi |

भारतीय सिनेमा (Indian Cinema) के पितामह कहे जाने वाले दादा साहब फाल्के (Dadasaheb Phalke) भारतीय सिनेमा के मील के पत्थर एवं आधार स्तम्भ है | यह कहना कोई गलत नही होगा कि यदि दादा साहब फाल्के (Dadasaheb Phalke) न होते तो भारतीय फिल्मे इतनी जल्दी विश्व की आधुनिक फिल्म निर्माण कला में भी चुनौती के रूप में कही खडी नही हो पाती | चाहे फिर वह वी.शांताराम ,राजकपूर ,गुरुदत्त ,विमल रॉय ,सत्यजीत रे ,मृणाल सेन की फिल्मो का विदेश में प्रदर्शन हो या फिर शेखर कपूर द्वारा एलिज़ाबेथ निर्माण हेतु उत्कृष्ट वेशभूषा के लिए ऑस्कर अवार्ड का चुना जाना हो | ये सभी उपलब्धिया दादासाहब फाल्के की प्रेरणा का ही प्रतिफल है |

दादा साहेब फाल्के (Dadasaheb Phalke) का पूरा नाम धुंडीराज गोविन्द फाल्के उर्फ़ D.R.Phalke उर्फ़ दादा साहेब फाल्के था | उनका जन्म सन 1870 को महाराष्ट्र की भूमि में हुआ था | दादा साहेब फाल्के (Dadasaheb Phalke) विदेश में बनने वाली उस समय की फिल्मो को देखकर यही सोचा करते थे कि क्या कभी भारतीय ऐसी फिल्मे नही बना सकते ? उन्होंने भारतीयों का इस क्षेत्र में दखल करने का दृढ़ संकल्प किया | यह तो उनका स्वप्न था किन्तु स्वप्न साकार करने के लिए चाहिए होता है पैसा |

दादा साहेब फाल्के (Dadasaheb Phalke) के पास स्वप्न के पास केवल स्वप्न था पैसा नही | अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने पैसा इकट्ठा करना शुरू किया | इधर परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था पत्नी और 9 बच्चो का भरा-पूरा परिवार | उन्होंने ऐसे ही क्रिसमस के एक दिन The Life of Christ फिल्म देखी | इस फिल्म में जब उन्होंने Jesus को देखा तो उन्होंने अपने हिन्दू देवी देवताओ की चमत्कारपूर्ण लीलाओं पर फिल्म प्रारम्भ करने का निश्चय किया | पत्नी ने गहने बेच डाले |

अब उन्हें एक Script की तलाश थी | अत: उन्होंने अपने साथ कुछ उत्साही लोगो को लेकर फाल्के फिल्म कम्पनी बनाई | 1913 में “राजा हरिश्चन्द्र” बनी हिंदी की पहली फिल्म | इस फिल्म का निर्देशन उन्होंने ही किया | इसके लिए दादा ने फोटोग्राफी सीखी | फिल्मो के सेट निर्माण की कला सीखी | रंगमंच की सारी कलाओं को फिल्मो में ढाला | कलाकारों से अभिनय करवाना ,डायलोग बुलवाना यह सब उनके लिए बड़ा कठिन कार्य था | फिल्म वितरण कैसे किया जाता है इसकी बारीकियाँ भी दादा ने सीखी |

“राजा हरिश्चन्द्र ” “राम वनवास” “नल दमयन्ती” “भस्मासुर मोहिनी” “लंका दहन” “कृष्ण जन्म” “गंगावतरण” “परशुराम” आदि 95 फिल्मो और 26 लघु फिल्मो का निर्माण किया | अपने 19 वर्ष के फिल्म निर्माण काल में दादा ने फिल्म के क्षेत्र में अनेक प्रयास किये | सन 1913 में उन्होंने पहली बार एक अभिनेत्री को उतारा ; क्योंकि उस समय अभिनय का पेशा स्त्रियों के लिए वर्जित था | पुरुष ही महिलाओं की भूमिका निभाते थे | इसके पहले मूक फिल्मे बनती थी |

दादा (Dadasaheb Phalke) ने फिल्मो में आवाज दी | 1930 में उन्होंने फिल्म निर्माण का कार्य छोड़ दिया | दादा ने फिल्मो में उत्कृष्ठता लाने के लिए विदेशो में जाकर कैमरे की तकनीक ,फोटोग्राफी की तकनीक से लेकर सभी प्रकार की तकनीको के लिए प्रशिक्षण दिलवाया | इसके लिए उन्होंने आर्थिक बोझ भी सहा | आने वाले फिल्मकारों को दादा ने सही रास्ता दिखाया |

दादा साहेब (Dadasaheb Phalke) ने पौराणिक फिल्म के चमत्कारपूर्ण दृश्यों को दिखाने के लिए फिल्मो की विषयवस्तु और ट्रिक फोटोग्राफी में काफी नये परिवर्तन किये | मूक फिल्मो से बोलती फिल्मो की ओर ले जाने का श्रेय दादा साहेब फाल्के को ही जाता है | दादा ने भारत की पहली स्वदेशी फीचर फिल्म का निर्माण किया | वस्तुत : वे फिल्मो के जनक है | उनके फिल्म क्षेत्र में अमूल्य योगदान के लिए “दादा साहेब फाल्के” नामक पुरूस्कार की घोषणा की | इस पुरुस्कार को सुचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा भारत के राष्ट्रपति स्वयं प्रदान करते है |फिल्म क्षेत्र में यह सबसे बड़ा और सम्मानीय पुरुस्कार है | यह पुरुस्कार फिल्म क्षेत्र में सभी प्रकार के विशिष्ट और उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया जाता है | इस पुरुस्कार में 2 लाख रूपये की राशि और स्वर्ण कमल दिया जाता है | यह 1970 से प्रदान किया जाता है | अब तक यह 40 से अधिक व्यक्तियों को दिया जा चूका है |

दादा साहब फाल्के का जीवन एक नजर में 

नाम धुंडीराज गोविन्द फाल्के
जन्म तारीख 30 अप्रैल 1870
जन्म स्थान  त्रिम्बक , बॉम्बे
मृत्यु 16 फरवरी 1944 (73 वर्ष)
मृत्यु स्थल  नासिक ,महाराष्ट्र
कार्यक्षेत्र  फिल्म निर्माण
वैवाहिक स्थिति विवाहित
पत्नी सरस्वती बाई फाल्के
पुत्र यशवंतराव (दत्तक पुत्र)
चर्चित फिल्मे राजा हरिश्चन्द्र (1913)
मोहिनी भमासुर (1913)
सत्यवान सावित्री (1914)
लंका दहन (1917)
श्री कृष्णजन्म (1918)
कालिया मर्दन (1919)
बुद्धदेव (1923)
सेतु बन्धम (1932)
गंगावतावरम (1937)

1 COMMENT

  1. हिन्दी फिल्मो के भगवान दादा साहेब जिन्होंने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया फिल्म जगत को जो कभी भी भुलाया नहीं जा सकता
    धन्यवाद आपका जो आपने पोस्ट के माध्यम से दादासाहेब फाल्के के जीवन के बारे में बताया हम सभी को और उनके योगदान के बारे में बताया..

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here