Edmond Halley Biography in Hindi | विश्वप्रसिद्ध खगोलशास्त्री एडमंड हैली की जीवनी

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Edmond Halley Biography in Hindi | विश्वप्रसिद्ध खगोलशास्त्री एडमंड हैली की जीवनीहेली धूमकेतु क नाम हम सभी ने सुना है | यह एक ऐसा कोमेट है जो हर 75 वर्ष के बाद आकाश में दिखाई देता है | यह सन 1911 में दिखाई दिया हटा उसके बाद सन 1986 में दिखाई दिया था | क्या आप जानते है कि इस धूमकेतु की खोज सबसे पहले एडमंड हैली (Edmond Halley)  ने की थी | उन्ही के नाम पर इसका नाम हेली कोमेट रखा गया था | हेली ब्रिटेन (Edmond Halley) के जान माने खगोलशास्त्री थे |

एडमंड हैली (Edmond Halley) का जन्म 8 नवम्बर 1656 को लन्दन में हुआ था | बचपन से ही उन्हें आकाशीय पिंडो में बहुत अधिक रूचि थी | वो ग्रहों ,उपग्रहों और सितारों की गति के विषय में कुछ न कुछ सोचते रहते थे | कुछ धूमकेतु आकाश में अचानक ही दिखाई देने लगते थे और कुछ ही अरसे में उनका आकाश में दिखाई देना बंद हो जात था | आज इस बात का कारण विशेषज्ञों को पता लग गया है लेकिन हैली के समय में वैज्ञानिकों के लिए यह एक बहुत बड़ी समस्या थी |

सर्वप्रथम हैली (Edmond Halley) ने इस समस्या का समाधान किया और हेली धूमकेतु की खोज करके संसार में नाम कमाया | हेली ने 24 धूमकेतुओ का अध्ययन किया और उनके विषय में नये नये तथ्यों की जानकारी दी | उन्होंने पहली बार यह बताया कि कुछ आकाशीय पिण्ड नियमित रूप से आकाश में भ्रमण करते रहते है | उन्होंने यह भी दिखाया कि कुछ धुमेकतु कुछ ही समय बाद आकाश में दिखाई देते है इनमे से सबसे कम अंतराल 3 वर्ष 6 महीने का है |

सन 1986 में जब हेली कॉमेट दिखाई दिया तो सारे संसार में इसे देखने की उत्सुकता पैदा हो गयी थी | विश्व की अनेक प्रयोगशालाओं में इस धूमकेतु को देखने के लिए जगह जगह अनेक यंत्र लगा दिए गये थे जिनकी मदद से इस धूमकेतु के विषय में अनेक तथ्यों का पता लगाया गया | शक्तिशाली दूरदर्शीयो की सहायता से इसकी अनेक तस्वीर खींची गयी | खगोल विज्ञान में अनेक रहस्यों का उद्घाटन इस महान वैज्ञानिक एडमंड हेली (Edmond Halley) ने किया |

हेली (Edmond Halley) ने न्यूटन के कार्यो में भी सहायता की | सर्वप्रथम उन्होंने यह बताया कि धूमकेतु सौर परिवार का सदस्य है और नियमित रूप से सूर्य की परिक्रमा करते रहते है | विश्वविख्यात एडमंड हेली (Edmond Halley) ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर बने | वे जीवन भर खगोल विज्ञान की सेवा करते रहे | यह महान खगोलज्ञ सन 1742 को भगवान को प्यारे हो गये | सन 1986 में इस धूमकेतु को देखने के लिए भारत के अनेक खगोलज्ञो की दिली इच्छा थी | बहुतो ने इसे सं 1986 में देखा और धूमकेतुओ के विषय में ज्ञान प्राप्त किया |

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