Edmund Hillary Biography in Hindi | एडमंड हिलेरी की जीवनी

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Edmund Hillary Biography in Hindi | एडमंड हिलेरी की जीवनी
Edmund Hillary Biography in Hindi | एडमंड हिलेरी की जीवनी

सर एडमंड हिलेरी (Edmund Hillary) का जन्म न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में 20 जुलाई 1919 को हुआ था | उनके पिता मधुमक्खी पालने का काम करते थे | जब वह हाई स्कूल में थे तभी से उन्होंने पहाड़ो पर चढना शुरू कर दिया था | यह उनके अदम्य साहस और आत्मविश्वास का ही नतीजा था जिसने उन्हें दुनिया की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवेरेस्ट फतह करके बीसवी सदी का सबसे महान पर्वतारोही बना दिया | कहते है पूत के पाँव पालने में ही दिख जाते है | ऐसा ही हिलेरी (Edmund Hillary) के साथ भी हुआ | वह द्वीतीय विश्वयुद्ध में पायलट रहे |

सिर्फ 16 साल की उम्र में वह पर्वतारोहियों के दल में शामिल हो गये थे | तब कोई नही कह सकता था कि मधुमक्खी पालने वाला कमजोर सा दिखने वाला यह लड़का एक दिन पर्वतारोहियों के लिए मिसाल बन जाएगा | पहले उन्होंने न्यूजीलैंड की चोटिया चढी फिर एल्प्स पहाडियों को फतेह किया | इसके बाद उनकी निगाह उठी हिमालय की ओर | उन्होंने हिमालय की 20 हजार फुट ऊँची 11 चोटियाँ फतेह कर ली | इससे उनका आत्मविश्वास ओर मजबूत हो गया |

एवेरेस्ट फतेह करने के लिए कई देशो के पर्वतारोहियों ने कोशिशे की लेकिन नाकाम रहे | सन 1953 में दुनिया की सबसे ऊँची चोटी पर चढने का लक्ष्य लेकर सन 1951 में ब्रिटिश पर्वतारोहियो ने अभियान शुरू किया | हिलेरी भी इसमें शामिल हो गये | हिलेरी (Edmund Hillary) की प्रतिभा देखकर इस एवेरेस्ट एक्सपीडिशन के नेता सर जॉन हंट बहुत प्रभावित हुए | मई 1953 में यह दल साउथ पीक पहुचा तो ज्यादातर सदस्यों पर थकान इतनी हावी हो गयी कि उन्होंने लौटने का फैसला कर दिया | सिर्फ दो लोग नही डिगे  ,एक एडमंड हिलेरी और दुसरे नेपाली शेरपा तेनजिंग नोर्गे | दोनों का अडिग इरादा और जोश रंग लाया और एवेरेस्ट की 29028 फुट ऊँची चोटी पर 29 मई 1953 को पहली बार उन्होंने कदम रखे |

हिलेरी (Edmund Hillary) और तेनजिंग में एवेरेस्ट पर सिर्फ 15 मिनट बिताए | इस दौरान हिलेरी ने तेनजिंग की तस्वीर खिंची | एवेरेस्ट को सम्मान स्वरूप उन्होंने अपने गले में पहना हुआ क्रॉस उतारकर चढाया | शूरू में हिलेरी और तेनजिंग ने कहा था कि हम दोनों ने एवेरेस्ट पर एक साथ कदम रखा लेकिन सन 1986 में तेनजिंग की मौत के बाद हिलेरी ने खुलासा किया कि मै तेनजिंग से करीब 10 फूट आगे था | यह संयोग ही था कि हिलेरी के इस हैरतअंगेज कारनामे का एलान ब्रिटेन में तब किया गया जब महारानी की ताजपोशी होने वाली थी | हिलेरी न्यूजीलैंड के थे | इस लिहाज से वह कॉमनवेल्थ के नागरिक हुए इसलिए ब्रिटेन ने भी इस ख़ास मौके को एक उपलब्धि के रूप में मनाया | हिलेरी को नाईटहुड की उपाधि दी गयी |

इसके बाद अगले दो दशको में हिलेरी ने हिमालय में 10 अन्य चोटियाँ फतेह की | कॉमनवेल्थ ट्रांस अन्टार्टिक एक्सपीडिशन के तहत सन 1958 में दक्षिणी ध्रुव तक भी पहुचे | सन 1977 में जेटबोट अभियान का नेतृत्व करते हुए वह गंगा नदी के मुहाने से उसके उद्गम स्थल तक पहुचे | हिलेरी ने अपना ज्यादातर जीवन उन शेरपाओ के कल्याण में लगा दिया जो विभिन्न अभियानों के दौरान उनसे मिले | उन्होंने सन 1964 में हिमालय ट्रस्ट की स्थापना की | इस ट्रस्ट ने क्लिनिक , अस्पताल और स्कूल बनवाये | दो हवाई पट्टिया भी बनवाई |

नेपाल और शेरपाओ के लिए उन्होंने बहुत काम किया | इससे प्रभावित होकर एवेरस्ट फतह की 50वी सालगिरह पर नेपाल सरकार ने उन्हें अपनी नागरिकता प्रदान की | न्यूजीलैंड ही नही , विदेशो में भी बहुत से स्कूलों और संस्थाओं का नामकरण उनके नाम पर किया गया | वह भारत में दो साल तक न्यूजीलैंड के उच्चायुक्त भी रहे थे | हिलेरी (Edmund Hillary )की निजी जिन्दगी सन 1975 में उस वक्त विखर गयी , जब एक विमान दुर्घटना में उनकी पत्नी और बेटी की मौत हो गयी | इस सदमे से उबरने में उन्हें बहुत लम्बा वक्त लग गया | 11 जनवरी 2008 को 88 वर्ष की उम्र में उनका देहांत हो गया |

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