Gautama Buddha Biography in Hindi | गौतम बुद्ध की जीवनी

Gautama Buddha Biography in Hindi

Gautama Buddha Biography in Hindi

बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध (Gautama Buddha) का जन्म लगभग 563 ईस्वी पूर्व बैशाख पूर्णिमा के दिन शाक्यो की राजधानी कपिलवस्तु के निकट लुम्बिनी में हुआ था | उस समय इनकी माता महामाया अपने पति शुद्धोधन की राजधानी कपिलवस्तु से अपने पिता के घर जा रही थी | लुम्बिनी अब नेपाल के अंदर भारत की सीमा से 5 मील दूर है | बालक का नाम सिद्धार्थ रखा गया किन्तु पुत्र जन्म के बाद ही माता महामाया का देहांत हो गया |

इस पर उसकी मौसी महाप्रजापति गौतमी ने उसका पालन-पोषण किया | कुछ का मत है कि इसी कारण यह गौतम कहलाये | अन्य के अनुसार इनका पौत्र गौतम था | शाक्य वंश के कारण इन्हें “शाक्यमुनि” नाम मिला | सिद्धार्थ बचपन से ही दयालु और निर्विकार भाव के थे | यह कथा प्रचलित है अपने चचेरे भाई देवदत्त के तीर से घायल पक्षी को यह कहकर उसे देने से इनकार कर दिया कि मारनेवाले से बचाने वाले का अधिकार अधिक होता है |

कहते है बालक के जन्म के समय ही उसके लक्षणों को देखकर असित ऋषि ने उनके बुद्धत्व की भविष्यवाणी कर दी थी | इससे चिंतीत पिता ने पुत्र के आमोद-प्रमोद का पूरा प्रबंध किया | उनको व्याधि , जरा और मरण से दूर , संगीत ,यौवन और सौन्दर्य के वातावरण में रखा गया | सुंदर युवती यशोधरा से उनका विवाह हुआ | इससे राहुल नामक पुत्र भी पैदा हुआ | किन्तु यह सारे प्रबंध सिद्धार्थ को मनुष्य की दुःखपूर्ण स्थिति पर विचार करने से नही रोक सके |

संयोग से एक वृद्ध , एक रोगेई और एक मृत को देखकर सिद्धार्थ ने समझ लिया कि यह स्थिति मनुष्य मात्र की होती है अत: इसके निवारण का मार्ग खोजना चाहिये | 29 वर्ष की उम्र में युवती पत्नी और पुत्र का मोह त्यागकर सिद्धार्थ ने रात्रि में गृह त्याग किया और ज्ञान की खोज में निकल पड़े | वे साधक का वेश धारण करके तपस्वियों से मिले किन्तु उनकी शंका का समाधान नही हो सका | फिर उन्होंने निरंजना नदी के तट पर पांच वर्ष तक कठोर तपस्या की |

जब इससे भी संतोष नही मिला तो उन्होंने ध्यान द्वारा ज्ञान प्राप्त करने का निश्चय किया | इस पर कौन्डिल्य आदि पंचवर्गीय परिव्राजको ने तपोभ्रष्ट कहकर उनका साथ छोड़ दिया था | इसके बाद सिद्धार्थ ने गया के निकट पीपल के वृक्ष के नीचे बैठकर ध्यानावस्थित करना और स्वयं अपनी बुद्धि का मार्ग खोजना आरम्भ किया | इस प्रकार सात वर्ष बीते और एक दिन सिद्धार्थ को आत्मज्ञान की अनुभूति हो गयी | वह दिन भी बैशाखी पूर्णिमा था | उन्हें सांसारिक दुखो से मुक्ति का मार्ग मिल गया | वे सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध (Gautama Buddha) हो गये |

गौतम बुद्ध (Gautama Buddha) ने आत्मज्ञान जग के कल्याण के लिए प्राप्त किया था | गया से वे सर्वप्रथम वारणासी के निकट सारनाथ गये | यहा उन्हें वे पंचवर्गीय परिव्राजक मिले जिन्होंने तपोभ्रष्ट कहकर गौतम का साथ छोड़ दिया था | गौतम बुद्ध ने सारनाथ में ऋषिपट में पहला उपदेश उन्ही को दिया | यह उपदेश “धर्म चक्र प्रवर्तक ” के नाम से प्रसिद्ध है | धीर धीरे उनके शिष्यों की संख्या बढती गयी | गौतम बुद्ध ने उन्हें विभिन्न दिशाओं में प्रचार के लिए भेजा | राजगुह में उन्होंने स्वयं राजा बिम्बिसार को दीक्षा दी | यही उनका मोद्ग्ल्यायन और सारीपुत्र प्रमुख शिष्य मिले |

गौतम बुद्ध (Gautama Buddha) 45 वर्षो तक धर्म का प्रचार करते हुए उत्तर प्रदेश और बिहार के जनपदों में घूमते रहे | उन्होंने मध्यम मार्ग का प्रवर्तन किया | उनका अधिकांश निवास श्रावस्ती ,राजगृह ,वैशाली और कपिलवस्तु में रहा | अंत में विषाक्त भोजन के कारण 80 वर्ष की उम्र में 483 ईसा पूर्व के लगभग उत्तर प्रदेश के कुशीनगर नामक स्थान पर उन्होंने शरीर त्याग दिया | बौद्ध धर्म का आविर्भाव वस्तुत: हिन्दू धर्म के दोषों को दूर करने के लिए एक सुधारवादी आन्दोलन के रूप में माना जाता है जिसने बाद में पृथक धर्म का रूप धारण कर लिया | इस धर्म में वर्ण व्यवस्था तथा जाति-पांति के लिए कोई स्थान नही है और इश्वर के अस्तित्व के संबध में भी यह मौन है |

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