Ghanshyam Das Birla Biography in Hindi | घनश्यामदास बिरला की जीवनी

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Ghanshyam Das Birla Biography in Hindi
Ghanshyam Das Birla Biography in Hindi

भारत के अग्रणी औद्योगिक समूह बी.के.के.एम.बिरला समूह के संस्थापक थे | घनश्यामदास बिरला (Ghanshyam Das Birla) का जन्म राजस्थान के पिलानी नामक स्थान पर सन 1894 में हुआ था | उनके पिता का नाम बी.डी.बिरला था | कपड़ा , बिस्कुट , फिलामेंट,यार्न .सीमेंट ,रासायनिक पदार्थ , बिजली , उर्वरक , दूरसंचार . वित्तीय सेवा और एलुमिनियम बिरला समूह का प्रमुख व्यवसाय है जबकि जबकि अग्रणी कम्पनियाँ ग्रासिम इंडस्ट्रीज और सेंचुरी टेक्सटाइल है | ये स्वाधीनता सेनानी और बिरला परिवार के एक प्रभावशाली सदस्य भी थे |

वे गांधीजी के मित्र , सलाहकार ,प्रशंशक एवं सहयोगी थे | भारत सरकार ने सन 1957 में उन्हें पद्म विभूषण की उपाधि से सम्मानित किया | एक स्थानीय गुरु से अंकगणित तथा हिंदी की आरम्भिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पिता बी.डी.बिरला की प्रेरणा एवं सहयोग से घनस्याम दास बिरला ने अपने ससुर एम.सोमानी की मदद से दलाली का काम करना प्रारम्भ कर दिया | 1918 में घनस्याम दास बिरला ने बिरला ब्रदर्स की स्थापना की | कुछ ही समय बाद घनश्यामदास बिरला ने दिल्ली की एक पुरानी कपड़ा मिल खरीद दी | उद्योगपति के रूप में यह घनश्यामदास बिरला (Ghanshyam Das Birla) का पहला अनुभव था |

1919 में घनश्याम दास बिरला (Ghanshyam Das Birla) ने जुट उद्योग में भी कदम रखा | 1921 में ग्वालियर में कपड़ा मिल की स्थापना की और 1923 से 1924 में उन्होंने केसोराम कॉटन मिल खरीद ली | ये 1928 में पूंजीपति संघठन भारतीय वाणिज्य उद्योग महामंडल के अध्यक्ष बने | 30 वर्ष की अवस्था तक पहुचते पहुचते घनश्याम दास बिरला का औद्योगिक जगत में काफी बोलबाला हो चूका था | बिरला एक स्व-निर्मित व्यक्ति थे और अपनी सच्चरित्र अरु इमानदारी के लिए विख्यात थे | उन्होंने अपने पैतृक स्थान पिलानी में भारत के सर्वश्रेष्ठ निजी तकनीकी संस्थान बिरला प्रोद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान पिलानी की स्थापना की |

कुछ अन्य उद्योगपतियों के साथ मिलकर उन्होंने सन 1927 में इंडियन चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की स्थापना की | सन 1942 में उन्होंने हिन्दुस्तान टाइम्स एवं हिंदुस्तान एवं हिन्दुस्तान मोटर्स की नीव डाली | घनश्यामदास बिरला एवं सच्चे स्वदेशी और स्वतंत्रता आन्दोलन के कट्टर समर्थक थे तथा महात्मा गांधी की गतिविधियों के लिए धन उपलब्ध करने के लिए तत्पर रहते थे | और पूंजीपतियों से राष्ट्रीय आन्दोलन का समर्थन करने एवं कांग्रेस के हाथ मजबूत करने की अपील की | इन्होने सविनय अवज्ञा आन्दोलन का समर्थन किया | इन्होने राष्ट्रीय आन्दोलन के लिए आर्थिक सहायता दी | उन्होंने सामाजिक कुरीतियो का भी विरोध किया और 1932 में हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष बने | जून 1983 में घनश्याम दास बिरला (Ghanshyam Das Birla) अक देहांत हो गया |

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