बेतार के तार के अविष्कारक मार्कोनी की जीवनी | Guglielmo Marconi Biography in Hindi

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बेतार के तार के अविष्कारक मार्कोनी की जीवनी | Guglielmo Marconi Biography in Hindi
बेतार के तार के अविष्कारक मार्कोनी की जीवनी | Guglielmo Marconi Biography in Hindi

संचार व्वयस्था के क्षेत्र में टेलीफोन ,टेलीग्राफ ने जो क्रान्ति ला दी थी उसके बाद बेतार के तार के आविष्कार ने तो विद्युत उर्जा एवं संचार क्षेत्र में नया आयाम प्रस्तुत किया | वैसे हम यह जानते है कि मार्कोनी (Guglielmo Marconi) ने जिस बेतार के तार का आविष्कार किया उसका श्रेय तो सर जगदीश चन्द्र बसु नामक महान भारतीय वैज्ञानिक को ही मिलना था | गुलामी की कीमत बसु को आखिर चुकानी पड़ी | यह आविष्कार उनके नाम पेटेंट न होकर मार्कोनी (Guglielmo Marconi) के नाम ही हो गया | इटली के मार्कोनी के इस आविष्कार को मान्यता मिली |

मार्कोनी (Guglielmo Marconi) का जन्म 25 अप्रैल 1874 को इटली के बोलोग्ना में हुआ | उनके पिता गुस्सिपे एक बड़े जमींदार थे | उन्होंने अपनी पहली पत्नी के निधन के उपरान्त अपने से 21 वर्ष छोटी एनी जेंसन से भागकर शादी कर ली | 5 साल के मार्कोनी का पालन पोषण एनी ने किया | बचपन से ही कुलीन तथा शांत स्वभाव के मार्कोनी प्रकृति में खोये रहते थे | उन्होंने प्रारम्भिक पढाई बोलोग्ना में और तकनीकी पढाई लेघोर्न के तकनीकी विद्यालय में पुरी की | यहा उन्होंने भौतिक शास्त्र के सिद्धांतो का अध्ययन किया |

विज्ञान के प्रोफेसर के यहा प्रयोगशाळा में उन्हें शोधकार्य करने की अनुमति मिली तो उन्होंने अपना सारा ध्यान इसी में लगा दिया | एक विज्ञान पत्रिका में उन्होंने Radio Wave Theory पर लेख पढ़ा कि 1 लाख 86 हजार प्रति सैकंड की गति से तरंगे चलती है अत: उन्होंने रेडियो तरंगे भेजने के लिए शोधकार्य शूरू कर दिया | गिने चुने उपकरणों की सहायता से उन्होंने सर्वप्रथम अपने घर की छत से बटन दबाकर माता पिता को संदेश भेजा | उन्होंने संकेत प्राप्त करने के लिए संयत्र बनाकर अपने भाई अलंसो को पहाडी पर भेजा |

टेलीग्राफ भाषा में अंग्रेजी के S दर्शाते 3 Dot संकेत दिए और वह संकेत अलंसो ने दोहरा दिए | इस तरह रेडियो संकेत का आविष्कार हुआ | प्रारम्भिक शोधकार्य में वह 1 मील तक बेतार के तार का संदेश भेज पाए | 1896 में 2 मील की दूरी तक का संदेश फिर सन 1898 में इंग्लिश चैनल के पार महारानी विक्टोरिया ने ओस्वार्न हाउस से प्रिंस ऑफ़ वेल्स के पास संदेश भेजा | इस तरह 74 मील के फासले पर जलपोत द्वारा बिना तार के संदेशो का आदान प्रदान करने में सफलता अर्जित की |

1924 में मार्कोनी (Guglielmo Marconi) ने बेतार का तार की लहरियों अर्थात Wireless Wave से संदेश भेजा | उन्होंने कम शक्तिशाली ट्रांसमीटर बनाकर पॉप के महल तथा वैटिकन सिटी के बीच सम्पर्क स्थापित किया | इस तरह लगातार किये जाने वाले अपने प्रयोगों द्वारा मार्कोनी ने इस पार से उस पार नियमित वायरलेस संचार सेवा को जन्म दिया | उनकी इस खोज ने पृथ्वी को बेतार के तार की शक्ति द्वारा आकाश में उड़ने वाले वायुयानो को नियंत्रित करने में सफलता प्राप्त की |

इस तरह मार्कोनी (Guglielmo Marconi) ने दुनिया के समस्त संचार का माध्यम रेडियो कम्पनो पर आधारित कर दिया | आज वायरलेस सेट ,मोबाइल इत्यादि धुँआधार प्रयोग मार्कोनी की खोज से सफल हुआ | मार्कोनी (Guglielmo Marconi) ने अपनी इस महान खोज के लिए समस्त विश्व से कई पुरुस्कार और सम्मान प्राप्त किये | सन 1902 में इटली सरकार द्वारा  , 1903 में रोम सरकार द्वारा सम्मान मिला | 1909 में उन्हें भौतिक शास्त्र में नोबल पुरुस्कार मिला | सन 1915 में उन्होंने इटली की सीनेट का सदस्य भी बनाया गया |

मानवता के लिए समर्पित रहने वाल मार्कोनी (Guglielmo Marconi) ने यह साबित किया कि रेडियो तरंगे वायुमंडल की उपरी सतह तक जाकर फिर वहा से परावर्तित होकर आती है | दूरसंचार को नई दिशा देने वाले मार्कोनी ने 1905 में आयरलैंड की एक महिला से शादी की जिससे उन्हें एक लड़का और दो लडकिया हुयी | तलाक के उप्रात्न उन्होंने 12 जून 1927 में एक इटालियन लडकी मारिया से शादी की जिससे इलेक्ट्रा नामक पुत्री हुयी | मार्कोनी ने 200 फुट लम्बे भाप इंजन से चलने वाले यार्ट को अपनी प्रयोगशाळा में बनाया , जिसका नाम उन्होंने इलेक्ट्रा रखा |

आजीवन प्रयोग के लिए समर्पित मार्कोनी (Guglielmo Marconi) को 1936 में एक बार दिल का दौरा पड़ा | रोम वाले मकान में 19 जुलाई 1937 को उन्हें ऐसा तेज दौरा पड़ा कि वे कभी उठ नही पाए | इटली सरकार ने पुरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार करते हुए उनकी इच्छानुसार ही उन्हें पैतृक स्थान बेल्गोना में दफनाया |

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