Gulzar Biography in Hindi | कवि -निर्देशक गुलज़ार की जीवनी

Gulzar Biography in Hindi

Gulzar Biography in Hindi

मोरा गोरा रंग लेइले ……जैसा अति रोमानी गीत जब गुलजार (Gulzar) ने बिमल रॉय की फिल्म “बंदिनी” (1963) के लिए लिखा , तब इस गीत की रचनात्मकता में जो खुशबु महसूस की गयी ,उस खुशबु मात्र से समझ लिया गया था कि यह लेखक हिंदी सिनेमा के संसार में के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर साबित होगा | ऐसा हुआ भी | वह वैचारिक रूप से PWA अर्थात प्रोग्रेसिव राईतर्स एसोसिएशन से संबध थे | इस एसोसिएशन में एह कवि ,गीतकार की हैसियत रखते थे | बाद में वे बिमल रॉय से जुड़े |

दरअसल आज बॉलीवुड में गुलजार (Gulzar) का जो सम्मानित रचनाकार का स्थान है उसे हासिल करने की उनकी योग्य तैयारी स्वर्ण युग की ख़ास शख्सियत बिमल रॉय के सानिध्य में ही हो चुकी थी | वह बिमल रॉय के सहायक रहे | आगे चलकर उन्होंने ऋषिकेश मुखर्जी , असित सेन , बासु चटर्जी , बुध्दुदेव दासगुप्त , कुमार साहनी जैसे संवेदनशील और विचारवान फिल्मकारों के लिए पटकथाये लिखी | आज भी वह एक सफल गीतकार और निर्देशक है |

नित नई फिल्मो  के लिए वह अनवरत गीत लेखन कर रहे है | उनकी लिखी पटकथा पर आधारित चर्चित फिल्मे है आशीर्वाद (1968), खामोशी (1969) , सफर  (1970) , घरोंदा , खट्टा-मीठा (1977) ,मासूम (1982) आदि |  गौरतलब है कि गुलजार मूलतः उर्दू के लेखक है | उनका जन्म दीना , झेलम में 1936 में हुआ था जो कि अब पाकिस्तान में है | परन्तु कालान्तर में वह बांगला साहित्य से प्रभावित हुए | बांगला भाषा का लेखन उनके दिलो-दिमाग पर छा गया |

इसी प्रभाव के तहत उन्होंने सर्वप्रथम तपन सिन्हा की बांगला फिल्म “अपन जन” (1968) को हिंदी में “मेरे अपने” (1971) नाम से पुनर्प्रस्तुत किया | इसी परम्परा में उन्होंने आगे शरतचंद्र की रचना पर आधारित “किताब” और “नमकीन” का निर्माण किया | हिंदी में ये फिल्मे पृथक मिजाज की मानी जाती है जिनमे निहित सादगी और शुद्ध मनोरंजन के अतिरिक्त गम्भीर आशय की भी परिपृष्टि होती है |

वास्तव में 1972 में “कोशिश” तथा “परिचय” और 1973 में “अचानक” जैसी फिल्मो के निर्देशन के पश्चात गुलजार का दूसरा महत्वपूर्ण दौर 1975 से प्रारम्भ होता है जब वह हिंदी के वरिष्ट कथाकार द्वारा लिखित पटकथा पर आधारित फिल्मो “आंधी” और “मौसम” का निर्देशन करते है | “आंधी” एक बहुचर्चित फिल्म रही है | राजनितिक म्ह्त्वकांनशा और घर-परिवार के नोस्टाल्जिया की दुरभिसंधि पर खडी सी दिखने वाली “आंधी” की कहानी के साथ संजीव कुमार और सुचित्रा सेन के सशक्त अभिनय ने अद्भुद न्याय किया था |

गुलजार (Gulzar) की अन्य अहम फिल्मे है किनारा (1977), मीरा (1979) ,अंगूर (1981) , इजाजत ,लिबास (1988), लेकिन , माचिस (1990) आदि | इतना ही नही गुलजार ने छोटे पर्दे के लिए भी रचनात्मक कौशल का प्रदर्शन किया है | वर्ष 1988 में उन्होंने मिर्जा ग़ालिब के जीवन पर आधारित टीवी धारावाहिक प्रस्तुत किया | इस धारावाहिक में नसीरुद्दीन शाह ने काबिले तारीफ़ अभिनय किया | गुलजार द्वारा निर्मित कुछ वृत चित्र भी खासे महत्व के है |

गुलजार ने 1980 में अभिनेत्री मीना कुमारी के जीवन पर आधारित “शायरा” का निर्माण किया | इसी तरह 1990 में उस्ताद अमजद अली खा और 1992 में प.भीमसेन जोशी के जीवन पर आधारित वृतचित्रो में उन्होंने संगीत के इन अमर रचनाकारों के कौशल पर अपनी काबिलियत की छठा बिखेरी है | गुलजार अपने समय की चर्चित अभिनेत्री राखे के पति है | उनकी पत्नी मेघना गुलजार भी फिल्म-निर्माण और निर्देशन के क्षेत्र में सक्रिय है | उन्होंने फिलहाल (2001) जैसी चर्चित फिल्मे बनाई थी | फिल्मो में अपने अमूल्य योगदान के लिए गुलजार को वर्ष 2013 में दादा साहब फाल्के पुरुस्कार से नवाजा गया |

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  1. rajasthan news August 18, 2017

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