हजारी प्रसाद द्विवेदी की जीवनी | Hazari Prasad Dwivedi Biography in Hindi

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Hazari Prasad Dwivedi Biography in Hindi
Hazari Prasad Dwivedi Biography in Hindi

हजारी प्रसाद द्विवेदी (Hazari Prasad Dwivedi) का जन्म उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के दुबे का छपरा नामक गाँव में हुआ | उनक वंश ज्योतिषज्ञान के लिए प्रसिद्ध था | उनके पिता पंडित अनमोल द्विवेदी बहुत प्रसिद्ध ज्योतिषी तथा संस्कृत के जाने-माने विद्वान थे | हजारी प्रसाद की मिडिल तक की शिक्षा अपने गाँव में ही हुयी | इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने ज्योतिष तथा संस्कृत में शास्त्री और आचार्य की उपाधियाँ प्राप्त की | हजारी प्रसाद (Hazari Prasad Dwivedi) एक प्रसिद्ध भाषाविद रहे है जिनक पुराना शास्त्रीय भाषाओ तथा आधुनिक भारतीय भाषाओं पर पूर्ण अधिकार था |

संस्कृत के अतिरिक्त  पाली , प्राकृत भाषाओं का गहन अध्ययन उन्होंने किया था | आधुनिक भाषाओं में उन्हें बांगला , पंजाबी , गुजराती आदि का भी ज्ञान था | 18 नवम्बर 1930 को उन्होंने हिंदी के प्राध्यापक के रूप में शान्तिनिकेतन विश्वविद्यालय में पदभार ग्रहण किया जहां वह हिंदी भवन के निदेशक पर पद 1950 तक रहे | विश्वभारती में उनका सम्पर्क गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के साथ साथ नन्दलाल बोस , क्षितिमोहन सेन तथा गुरुदयाल मलिक से निरंतर रहा |

इन संबधो से उनके ज्ञान की समृद्धि बढी तथा उनकी रचनात्मकता में सौन्दर्यबोध ,हास्य तथा सूक्ष्म दृष्टिकोण विकसित हुआ | तत्पश्चात बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में भी हिंदी विभाग के प्रोफेसर तथा अध्यक्ष रहे | 1955 में राजकीय भाषा कमीशन के सदस्य भी रहे | बनारस में 1960 तक विश्वविद्यालय में सेवारत रहे | सेवानिवृति तक उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के हिंदी विभाग के प्रोफेसर तथा अध्यक्ष का कार्यभार उठाया |

भारतीय धर्म ,संस्कृति तथा इतिहास के विभिन्न पक्षों पर लिखे गये उनके साहित्यिक ग्रन्थ महत्वपूर्ण है | निबन्ध एवं आलोचना के क्षेत्र में भी उन्होंने श्रेष्ठ कृतियाँ दी है | मध्यकाल के संत कवि कबीर पर लिखा उनका ग्रन्थ अत्यंत शोधपरक तथा विश्लेषणपरक है जिसमे कबीर की विचारधारा , उनकी शिक्षाए समाज के लिए अत्यंत प्रासंगिक दिखाई पडती है | आलोचना के क्षेत्र में साहित्य की भूमिका तथा हिंदी साहित्य का इतिहास उनके अत्यंत प्रमाणिक ग्रन्थ है |

हजारी प्रसाद द्विवेदी (Hazari Prasad Dwivedi) का नाम उपन्यासों एवं निबन्धों के लिए भी प्रसिद्ध है | उनकी प्रमुख उपन्यास बाणभट्ट की आत्मकथा , अनामदास का पौधा तथा पुनर्नवा आदि है | निबन्ध संग्रहों में “नाख़ून क्यों बढ़ते है ?” , “अशोक के फुल” , “आलोकपर्व” आदि मशहूर है | हजारी प्रसाद ने अंग्रेजी ,संस्कृत एवं अन्य भारतीय भाषाओं में साहित्यिक कृतियी के अनुवाद भी किये है | जिनसे उनके सभी भाषाओं के गहन-ज्ञान की पृष्टि होती है | उनकी प्रमुख कृतियाँ प्रबंध चिंतामणि , पुरातन प्रबंध संग्रह और विश्व परिचय है |

उपलब्धिया

  • शान्ति निकेतन में हिंदी विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष (1930) |
  • बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष (1950-60) |
  • पंजाब विश्वविद्यालय , चंडीगढ़ में हिंदी विभाग के प्रोफेसर तथा अध्यक्ष (1960 से सेवानिवृत तक) |
  • प्रथम राजकीय भाषा कमीशन के सदस्य |
  • 1957 में पद्मभूषण से सम्मानित |
  • 1973 में साहित्य अकादमी आवार्ड |

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