James Van Allen Biography in Hindi | वैज्ञानिक जेम्स वान एलन की जीवनी

James Van Allen Biography in Hindi

James Van Allen Biography in Hindi

सम्पूर्ण ब्रह्मांड विभिन्न प्रकार के रहस्यों से भरा पड़ा है | समय समय पर होने वाली खोजे और अविष्कार जगत को विस्मित करते आये है किन्तु न जाने अभी कितने ओर ऐसे रहस्य है जिनका पता लगाना बाकी है | ऐसी ही विस्मयकारी खोज अमेरिका के वैज्ञानिक जेम्स एल्फ्रेड वान एलेन (James Van Allen) ने की थी | उनकी इस खोज में उन्होंने पता लगाया कि अन्तरिक्ष में भारी मात्रा में रेडिएशन मौजूद है जिसने पृथ्वी को चारो ओर से घेर रखा है | विज्ञान जगत में उनकी यह खोज बेहद रोमांचक एवं उत्साहभरी थी |

जेम्स एल्फ्रेड वान एलेन (James Van Allen) का जन्म 1914 ई. को अमेरिका के आयोवा नामक शहर में हुआ था | आरम्भ में ही इनकी रूचि भौतिक विज्ञान में थी | अपनी रूचि के क्षेत्र में ही ऐलन ने अपनी शिक्षा-दीक्षा पूर्ण की | जेम्स एल्फ्रेड 1951 ई. में आयोवा विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष नियुक्त हुए | अपने पद पर कार्य करते हुए उन्होंने अनेक प्रकार के अनुसन्धान कार्य किये | द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उन्होंने एक ऐसा फ्यूज विकसित किया था जो रेडियो तरंगो के आधार पर काम करता था और लक्ष्य के नजदीक होने पर उसकी उपस्थिति का पता लगा लेता था |

वान एलेन (James Van Allen) बहुत ही कुशल भौतिकविद थे | उनका सदैव प्रकृति द्वारा बनाई हुयी रचनाओं पर विशेष ध्यान रहता था | वे हमेशा प्रकृति में नई नई चीजे खोजने में लगे रहते थे | द्वितीय विश्वयुद्ध समाप्त होने के बाद एलन ने सैन्य राकेटो की सहायता से कॉस्मिक किरणों का अध्ययन किया | जब वे राकेटो की सहायता से कॉस्मिक किरणों पर अध्ययन कर रहे थे तब उन्होंने राकेटो में कुछ यंत्र रखकर अन्तरिक्ष में कॉस्मिक किरणों के अध्ययन हेतु भेजे | आरम्भ में उन्होंने जो कॉस्मिक किरण डिटेक्टर भेजे थे उनसे उन्हें ऐसा ज्ञात हुआ कि अचानक इनमे कॉस्मिक किरणों का आना बंद हो जाता था |

वान एलेन ने ऐसा डिटेक्टर बनाया जो सीसा धातु से चारो ओर से शील्ड था | इससे उन्हें ज्ञात हुआ कि अन्तरिक्ष में ऐसे विकिरण मौजूद है जो अपने आप में मृतक की भांति कार्य करते है | पृथ्वी के वायुमंडल में भूमध्य रेखा के उपर कुछ ऐसे विकिरण होते है जो मृतक के रूप में रहते है | वान एलेन की इस खोज का नाम उनके नाम पर ही वान एलेन बेल्ट रखा गया | वान एलेन बेल्टो में अधिकाँश मात्रा में विकिरण होते है | पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र के कारण विकिरण कण अवशोषित हो जाते है | बाद में पता लगा कि वान एलेन विकिरण घातक होते है |

वान एलेन बेल्टो का अविष्कार 1958 ई. में किया गया था | वान एलेन बेल्टे पृथ्वी से करीब 3200 किमी की ऊँचाई पर है इनका घनत्व बहुत ज्यादा है | सबसे बाहरी पेटी 16 हजार से 19,300 किमी की दूरी पर है | आंतरिक पेटी में अत्यधिक उर्जा है जिसमे प्रोटोन और इलेक्ट्रान है | बाहरी पेटी में मुख्यत: इलेक्ट्रान है | कदाचित इन कणों की उत्पति सूर्य की किरणों से होती है | ये कण एक्स-किरने पैदा करते है | आजीवन वान एलेन इन बेल्टो पर रीसर्च करते थे और अपने इस अद्भुद अविष्कार से विश्व प्रसिद्ध हो गये | वान एलेन (James Van Allen) की मृत्यु 2006 में अमेरिका में हुयी थी |

 

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