Jamsetji Framji Madan Biography in Hindi | सिनेमा के सौदागर जमशेद जी मदन की जीवनी

Jamsetji Framji Madan Biography in Hindi

Jamsetji Framji Madan Biography in Hindi

जमशेद जी (Jamsetji Framji Madan) मदन मूलतः पारसी व्यवसायी थे परन्तु कला , रंगमंच ,सिनेमा में उन्हें गहरी रूचि थी | मदन (Jamsetji Framji Madan) अपने दौर के अच्छे अभिनेता समझे जाते थे | कला और संस्कृति में उन्हें गहरी दिलचस्पी थी | उन्होंने सन 1902 से कोलकाता के प्रमुख केन्द्रों पर बड़े पैमाने पर फिल्म प्रदर्शन का व्वयसाय आरम्भ किया जिससे उन्हें अच्छी सफलता मिली | वास्तव में यह वो दौर था जब मुम्बई की तरह कोलकाता में भी फिल्म शो की नई गतिविधियों का जूनून कायम हो चूका था |

हिंदुस्तान में फिल्म निर्माण और उसके विकास में इन दो शहरों के कलाकारों और व्यवसायियो के जूनून ने एक क्रांतिकारी भूमिका अदा की है | वह सन 1870 से ही एल्फिन्स्टन नाट्य मंडली के नाटको में अभिनय करने लगे थे | कोलकाता में विदेशी फिल्मो के एकाधिक प्रदर्शन से वह काफी प्रभावित हुए | उन्हें इस क्षेत्र में व्यवसाय की असीम सम्भावनाये भी दिखी | लिहाजा उन्होंने सन 1902 में तम्बूनुमा थिएटरों में फिल्मो के प्रदर्शन का व्वयसाय आरम्भ किया | वह कभी कभी अपने नाटको में दृश्यों का भी प्रदर्शन किया करते थे |

भारत में पहला सिनेमा हॉल बनाने का श्रेय उन्ही को जाता है | उन्होंने 1907 में कोलकाता का एल्फिन्स्टन पिक्चर पैलेस बनवाया | दर्शको के लिए बकायदा सिनेमा हॉल में फिल्मे देखने का एक अलग ही अनूभव मिला | तम्बू या फिर मोबाइल थिएटर के बदले एक जगह बने सिनेमा हॉल की अवधारणा को लोगो ने खूब पसंद किया | कोलकाता के अलावा भी उन्होंने कई शहरों में सिनेमा हॉल बनवाये | सिनेमा हॉल बनाने के बाद उन्होंने फिल्म निर्माण की दिशा में भी कदम आगे बढाया |

उन्होंने मदन थिएटर नाम का बैनर स्थापित किया | इस बैनर के तले उन्होंने कई फिल्मे बनाई मसलन “बिल्व मंगल (1919)” , “ध्रुव चरित्र (सभी 1920-21)” , “पति]-भक्ति (1922) ” और “फैटल मैरिज (1930)” आदि | सिनेमा हॉल बनवाने के साथ साथ सिनेमा को व्यावसायिक स्टेटस दिलाने में जमशेद जी मदन (Jamsetji Framji Madan)का बड़ा योगदान समझा जाता है | कहते है उन्होंने ही भारत में व्व्यव्सयिक सिनेमा की नींव रखी |उन पर हॉलीवुड की फिल्मो का विशेष प्रभाव था | उनकी फिल्मो में हीरोइन एंग्लो-इंडियन होते थी | उनकी फिल्मो के दृश्यों के फिल्मांकन में पश्चिम की फिल्मो के समान दृश्यों की समानता होती थी | वे आधुनिक मिजाज और जमाने से कदमताल मिलाकर चलने वाल व्यवसायी फिल्मकार माने गये थे |

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