Jeevak Biography in Hindi | प्राचीन चिकित्सक जीवन की जीवनी

Jeevak Biography in Hindi

Jeevak Biography in Hindi

महात्मा बुद्ध के चिकित्सक जीवक (Jeevak) के जन्म और मृत्यु की तिथि तो ज्ञात नही है पर उनका काल ईसा पूर्व 600 से 500 माना जाता है | उनकी माता सलावती राजगृह , जो आधुनिक पटना है की प्रमुख गणिका (वेश्या) थी | पुत्र जन्म के पश्चात लोकलाज से बचने के लिए उन्होंने शिशु को कूड़ेदान में फेंक दिया था | जीवित शिशु को वहा देखकर लोगो ने राजकुमार अभय को सूचित किया , जिन्होंने शिशु को मंगाकर उसका लालन पालन किया | उसका नाम “जीवक” रखा गया | पर ज्यो ही बालक जीवक को जन्म-कथा का ज्ञान हुआ , वह बिना सुचना दिए महल छोडकर चल दिया |

जीवक (Jeevak) तक्षशिला पहुचा , जो उस समय विश्वविद्यालय था | वहा पर जीवक ने सात वर्षो तक आयुर्वेद की शिक्षा ग्रहण की | शिक्षा पुरी होने पर गुरु ने परीक्षा के रूप में जीवक से कहा कि तक्षशिला के आस-पास वनस्पतिया खोजकर लाओ , जिनमे कोई औषधीय गुण न हो | जीवक ने तक्षशिला से एक योजन दूरी तक सभी ओर उपलब्ध वनस्पतियों का गहन अध्ययन किया और गुरु के पास लौट आये | उन्होंने साफ़ साफ़ कह दिया कि ऐसी कोई वनस्पति नही मिली , जिनमे औषधीय गुण न हो | अत: उन्हें क्षमा कर दिया जाए |

गुरु ने जीवक (Jeevak) की शिक्षा पूर्ण घोषित की और विदा किया | जीवक साकेत (आधुनिक अयोध्या) पहुचे | उनके पास फूटी कौड़ी भी नही थी पर तभी उन्हें एक धनी व्यापारी मिला , जिसकी पत्नी सात वर्षो से अस्वस्थ थी और उस पर विभिन्न उपचारों का कोई प्रभाव नही पड़ रहा था | जीवक ने उसका उपचार करके शीघ्र स्वस्थ कर दिया | व्यापारी ने एक बहुत बड़ी राशि , यात्रा के लिए रथ , दास-दासी देकर जीवक को विदा किया |

अब जीवक (Jeevak) राजगृह पहुचे और अपने प्राणदाता अभय से मिले | उन्होंने अब तक प्राप्त सारा धन राजकुमार को सौंप दिया और अभय के पिता राजा बिम्बिसार का उपचार प्रारम्भ किया , जो भंगदर रोग से पीड़ित थे | जीवक ने उनके लिए एक लेप तैयार किया , जिसके प्रयोग से एक बार में ही राजा स्वस्थ हो गये | राजा ने जीवक को उपहार स्वरूप तमाम रत्न-आभुष्ण दिए और उन्हें अपना राजवैध तथा महात्मा बुद्ध का चिकित्सक भी नियुक्त किया |

जीवक (Jeevak) औषधि के लिए हर प्रकार के पदार्थ का उपयोग कर लेते थे | एक बार उज्जैन के रजा ने उपचार हेतु उन्हें बुलाया | राजा को घी से घृणा थी | जीवक ने औषधि में घी का प्रयोग किया | औषधि देकर वे वापस चल पड़े | बाद में राजा को पता चला कि घी का उपयोग किया गया है तो उसने सैनिक भेजकर जीवक को बंदी बनाने का आदेश दिया | सैनिको ने आकर जीवक को घेर लिया | जीवक उस समय बहेड़ा खा रहे थे | उन्होंने प्रेमपूर्वक सैनिको को भी बहेड़ा खाने के लिए दिया |इसके साथ ही सैनिको को दस्त होने लगे और भयंकर पेट-दर्द प्रारम्भ हो गया | उन्होंने आचार्य जीवक से प्राणरक्षा के लिए याचना की |

जीवक (Jeevak) ने कहा कि वे उन्हें स्वस्थ कर देंगे पर सैनिक वापस लौट जाए और उन्हें राजगृह जाने दे | आश्वासन मिलने पर जीवक ने उन्हें औषधि दी और चल दिए | उधर उज्जैन-नरेश जीवक की औषधि से स्वस्थ्य हो चुके थे | सैनिको से विवरण सुनकर उन्हें भयंकर पश्चाताप हुआ और उन्होंने बहुमूल्य वस्तुए जीवक को उपहार स्वरूप भेजी | पर जीवक अपने पास कुछ नही रखते थे और उन्होंने वे वस्तुए महात्मा बुद्ध को भेंट कर दी | वे औषधीय चिकित्सा के साथ शल्य चिकित्सा में भी निपुण थे | उन्होंने महात्मा बुद्ध के उदर रोग का भी उपचार किया |

जीवक (Jeevak) गरीबो का निशुल्क उपचार करते थे और अमीरों से प्राप्त धन बांटते रहते थे |राजा बिम्बिसार के बाद वे अजातशत्रु के राजवैध बने और उनके प्रभाव में अजातशत्रु ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया | जीवक बाल रोग चिकित्सा में भी निपुण थे | उनका उल्लेख बौद्ध ग्रंथो में प्रचुरता से मिलता है |

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