John Dunlop Biography in Hindi | टायर के अविष्कारक जॉन डनलप की जीवनी

John Dunlop Biography in Hindi | टायर के अविष्कारक जॉन डनलप की जीवनीगोल गोल रबड़ से बने , हवा से बढ़े टायर ; आज सम्पूर्ण विश्व में टायरो का प्रयोग किया जाता है | आधुनिक जीवन में भोजन की भांति टायर के अभाव में जनजीवन ठप्प पड़ने की सौ प्रतिशत सम्भावना है | यह बात हास्यास्पद होते हुए भी यथार्थ है | बिना वाहन के आधुनिक जन-जीवन की द्रुतगति ठहर जाने की आशंका है और कोई भी वाहन बिना टायर के चला पाना असम्भव है | भले ही वह साइकिल हो , मोटर साइकिल हो , स्कूटर हो अथवा कार ट्रक यहा तक कि आकाश में उड़ने वाला हवाई जहाज भी टायरो के बिना बेकार है | कोई भी मोटर वाहन बिना टायरो के सडक पर नही चल सकता | रबड़ के बने हुए ये टायर बहुत ही मजबूत होते है | इन्हें सही एवं ठोस आकार देने के लिए इनके भीतर वायु प्रवाहित की जाती है | इस टायर का अविष्कारक जॉन डनलप (John Dunlop) नामक वैज्ञानिक ने किया जाता है |

जॉन डनलप (John Dunlop) का जन्म सन 1840 ईस्वी को स्कॉटलैंड में हुआ | बचपन से ही डनलप को पशुओ से बड़ा लगाव था | स्कूली शिक्षा प्राप्त करने  पश्चात उन्होंने पशु चिकित्सा विज्ञान द्वारा अपनी शिक्षा पूर्ण की | जॉन डनलप (John Dunlop) स्कॉटलैंड में एक सफल पशु चिकित्सक थे | यह बात बेहद अजीब लगती है कि एक पशु चिकित्सक टायर का अविष्कारक बन गया किन्तु यह सत्य है | उनका क्षेत्र यद्यपि पशु चिकित्सा विज्ञान था फिर भी उन्होंने अपने क्षेत्र से हटकर आविष्कार किया | वह वेल फास्ट में अपनी प्रैक्टिस करते थे किन्तु टायर का आविष्कार करने के पीछे एक अहम कारण अवश्य था |

दरअसल सन 1887 ईस्वी में उन्होंने अपने नौ साल के बेटे के लिए एक ट्राईसाइकिल खरीदी थी | उस ट्राईसाइकिल में ठोस रबड़ के टायर लगे हुए थे | जब उनका बेटा उबड खाबड़ सडक पर साइकिल चलाता तो उसे झटके लगते थे | जब जॉन डनलप (John Dunlop) से उनके बेटे की शिकायत की कि वह साइकिल बेकार है तो उनके पिता ने मन ही मन निश्चय किया कि वह एक ऐसा टायर इजाद करेंगे जिसके प्रयोग से उनके बेटे की साइकिल को झटका लगेगा |

आखिर सन 1888 ईस्वी में जॉन (John Dunlop) ने एक ऐसे टायर का अविष्कार कर ही लिया , जिसमे हवा भरी हुयी रबड़ की ट्यूब थी | इस ट्यूब के कारण यह टायर उबड खाबड़ सडक पर चलने पर भी चालक को झटका नही दे सकता था | इस तरह जॉन डनलप (John Dunlop) ने पहले टायर का निर्माण किया | सन 1888 में उन्होंने अपना यह आविष्कार पेटेंट करवा लिया | इसके दो वर्ष बाद 1890 में वेल फ़ास्ट की के कम्पनी ने टायर का निर्माण आरम्भ कर दिया | इस कम्पनी में डनलप के 1500 शेयर थे | बाद में यह कम्पनी डनलप रबड़ कम्पनी के नाम से प्रसिद्ध हुयी |

इन टायरो से साइकिल निर्माण की दुनिया में एक क्रांति से आ गयी | साईकिल की लोकप्रियता बढने लगी | मोटर उद्योग में भी टायरो के आविष्कार ने क्रान्ति ला दी थी | यद्यपि 1846 ईस्वी में स्कॉटलैंड के इंजिनियर रोबर्ट विलियम थोमसन ने भी टायर के आविष्कार का पेटेंट कराया था किन्तु उनके द्वारा बनाये गये टायर ठोस रबड़ के थे | उन्होंने टायर के अविष्कार की कोई चेष्ठा नही की थी | जॉन डनलप (John Dunlop) के अविष्कार से डनलप कम्पनी का नाम सम्पूर्ण विश्व में फ़ैल गया |तरह तरह के यातायात वाहनों में रबड़ के इन टायरो का प्रयोग होने लगा था और आज भी होता है | जॉन डनलप (John Dunlop) का स्कॉटलैंड में सन 1921 में देहांत हो गया |

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