Julius Caesar Biography in Hindi | रोमन सम्राट जुलियस सीजर की जीवनी

Julius Caesar Biography in Hindi | रोमन सम्राट जुलियस सीजर की जीवनीरोम के पहले सम्राट जुलियस सीजर (Julius Caesar) का जन्म 13 जुलाई 100 ईस्वी पूर्व हुआ था | वो रोमन इतिहास के उथल पुथल भरे दौर में जन्मे थे जब साम्राज्य का विशाल स्तर पर विस्तार हो रहा था | उनके जीवन के पहले बीस वर्ष शत्रुओ तथा असेम्बली के बीच जीते | चुनाव पद्दति भ्रष्ट थी | जब वाणिज्यदूत सुला विदेश से लदकर लौटे तो उन्होंने शत्रुओ से पीछा छुड़ाने के लिए अभियान चलाया | अनेक राजदरबारी एवं अधिकारी मौत के घाट उतार दिए गये | फिर सुला ने स्वयं को तानाशाह घोषित कर दिया |

जुलियस (Julius Caesar) उनके शत्रु की पुत्री से विवाह कर चुके थे सुला ने आज्ञा दी कि वे अपनी पत्नी को तलाक दे दे | सीजर ने ऐसा करने से इनकार कर दिया | सुला की मौत के खबर सुनकर सीजर (Julius Caesar) रोम लौट आये | कई वर्षो तक वे वकालात का हुनर निखारते रहे | फिर वे शिक्षा पाने के लिए रोड्स जा रहे थे कि समुद्री डाकुओ ने पकड़ लिया | उन्होंने कसम खाई कि वो मुक्त होते हेई शत्रुओ को सूली पर चढ़ाएंगे और उन्होंने ऐसा ही किया |

रोम लौटने पर वे पहले क्वास्टर के लिए चुने गये | क्रासस के रूप में भी जनता के बीच काफी लोकप्रिय हो गये | वो 62 ईस्वी पूर्व में राजदरबारी बने | यह उनकी पहली स्वतंत्र सैनिक कमांड थी | गाल प्रांत के गर्वनर बनने पर उन्हें पता चला कि कोई स्विस जाति हमला करने आ रही थी | वे उस पर विजय पाने के लिए निकल पड़े | इस विजय के बाद उन्होंने राइन नदी के किनारे जर्मनों पर विजय प्राप्त की | इसके बाद उन्होंने विद्रोही बेल्गे जनजाति को भी सबक सिखाया |

जब वे इटली लौटे तो उनके सम्मान में पन्द्रह दिन का आभा प्रकटन किया गया | वे कई वर्षो तक विद्रोहियों का सिर कुचलते हुए रोमन साम्राज्य का विस्तार करते रहे | 54 ईस्वी पूर्व में वे 800 जहाजो के साथ ब्रिटेन रवाना हुए वहा भी शत्रुओ को उनके आगे झुकना पड़ा | वहा रोम में राजनितिक हिंसा जारी थी |जनरल पोम्पी ने अत्याचार मचा रखा था | सीजर (Julius Caesar) ने जनता के समर्थन के बल पर पोम्पी पर हमला किया तो वह जान बचाकर भागा |

सीजर (Julius Caesar) रोमन साम्राज्य के सर्वोच्च शासक बने लेकिन अपनी ही सेना ने विद्रोह कर दिया सीजर सारी समस्याए समाप्त क्र विजयी नायक के रूप में रोम लौटे | कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें भगवान की तरह मानता था | उन्हें Father of the Country की उपाधि दी गयी किन्तु षडयंत्र की सरगर्मिया अब भी जारी थी | 15 मार्च 44 ईस्वी पूर्व को सीजर दरबार ने अपने शाही सिंहासन पर बैठे रहे | एक षडयंत्रकारी ने उनके गले का वस्त्र खींच दिया दुसरे ने मौका पाते ही गर्दन दबोच ली | सम्राट ने बचने का प्रयास किया लेकिन बाकी लोग चाक़ू लेकर आ गये | शेष दरबारी मारे भय के कुछ नही कर पाए | सीजर के शरीर पर 23 घाव आये और उन्होंने पोम्पी की मूर्ति तले दम तोड़ दिया |

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