K. Kamaraj Biography in Hindi | राजनीति के किंगमेकर के.कामराज की जीवनी

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K. Kamaraj Biography in Hindi
K. Kamaraj Biography in Hindi

कामराज (K. Kamaraj) का जन्म जुलाई 1903 में जब धुर दक्षिण के एक छोटे से पिछड़े गाँव विरुद पट्टी में हुआ तो ग्रह-नक्षत्र देखकर ज्योतिषियों ने कहा था कि बालक कामराज (K. Kamaraj) की कीर्ति सूर्य के समान चमकेगी | निश्चय ही उनकी माँ श्रीमती शिवकामी और दादी पार्वती अम्मल ने सोचा होगा कि ज्योतिषी लोग ऐसी बाते तो माता-पिता को प्रसन्न करने के लिए बालको के संबध में कह दिया करते है पर उन्हें क्या पता था कि सचमुच वह एक दिन भारत में सूर्य के समान चमकेगा और भारतीय इतिहास में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा और “किंगमेकर” के रूप में प्रसिद्ध होगा |

विरुद पट्टी बहुत छोटा सा गाँव है और वहा के रहने वाल किसान बहुत पिछड़े हुए थे | वहा के लोग ताड़ी बनाने का धंधा करके अपना पेट भरते थे | इनके पिता श्री नतत्न मायकार कुदुमबम्ब इस गाँव के मुखिया थे | मुखिया होने के नाते गाँव की प्रत्येक समस्या उन्हें ही सुलझानी पडती थी परन्तु कुदमबम्ब को क्या पता था कि जिस प्रकार वह गाँव की छोटी -मोटी समस्याओ को सुलझाता है उसके बेटे को भारत की बड़ी बड़ी समस्याए सुलझानी होंगी |

प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल जी की मृत्यु के बाद भारत को नया प्रधानमंत्री खोजने की समस्या आयी तो इसे सुलझाने कामराज (K. Kamaraj) ही सामने आये | 19 महीने बाद जब लाल बहादुर जी का निधन हुआ तब प्रधानमंत्री बनाने की गुत्थी उन्होंने ही सुलझाई | भारत की राजनीति में श्री कामराज (K. Kamaraj) ने अनेक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई | “कामराज प्लान” इनमे बहुत महत्व रखता है | उस समय कुछ स्थिति ऐसी हो गयी थी कि बहुत से नेता लगातार कई वर्षो से एक ही पद पर चले आ रहे थे | इससे जनता में असंतोष फ़ैल रहा था |

कुछ लोगो ने तो नेहरु जी के लगातार प्रधानमंत्री बने रहने पर ही आपत्ति प्रारम्भ कर दी थी | ऐसा विशेष रूप से उस समय हुआ था जब चीन ने भारत पर आक्रमण किया | इसलिए लोगो का विचार था कि कुर्सी से चिपके रहने की नेताओ की प्रवृति को दूर किया जाए | यही कामराज प्लान था जिसके मुताबिक़ बड़े बड़े नेताओं को स्वेच्छा से त्यागपत्र देने के लिए एक योजना रखी गयी थी | बहुत से लोगो ने तो अपने त्यागपत्र दे दिए थे परन्तु फिर भी कुछ लोग बच गये थे |

इस प्रकार जब नेहरु जे के निधन के बाद देश का प्रधानमंत्री चुनने की समस्या आये तो संसद सदस्यों , नेताओ और मंत्रियों से विचार विमर्श करके लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री बनाया | 19 महीने बाद जब ताशकंद में शास्त्री जी का निधन हो गया तो देश के सामने फिर प्रधानमंत्री बनाने की समस्या आ उपस्थित हुयी | देश के चारो कोनो से लोग शास्त्री जी के दाह संस्कार में सम्मिलित होने के लिए दिल्ली पहुच रहे थे |  कामराज उन दिनों कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे | स्थिति को देखकर उन्होंने मन ही मन प्रधानमंत्री का चयन कर लिया था | कामराज चाहते थे कि सर्वसम्मति से इंदिरा गांधी को प्रधानमंत्री बनाया जाए परन्तु मोरारजी देसाई अड़ गये | वह स्वयं प्रधानमंत्री बनना चाहते थे इसलिए चुनाव करवाना पड़ा और श्री कामराज (K. Kamaraj) का प्रतिनिधि ही प्रधानमंत्री बना | वह थी श्रीमती इंदिरा गांधी |

पिता ने जब बालक कामराज की शिक्षा का प्रबंध किया तो थोड़े दिन बाद पिता चल बसे | परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा परन्तु कामराज ने हिम्मत नही छोड़ी | उनके विद्याथी जीवन के वीरता के अनेक कारनामे प्रसिद्ध है | उन्होंने कही से सुन लिया था कि हाथी की लीद खाने से हाथी जैसे मजबूती आती है | एक बार वे ऐसा कर रहे थे कि के हाथी बिगड़ गया | चारो ओर भगदड़ मच गयी पंरतु कामराज और उनके साथी निडर होक हाथी को वश में करने चल दिए | उन्होंने जंजीर लेकर हाथी की ओर फेंकी और हाथी खड़ा हो गया |

इसी प्रकार एक चोर को पकड़ने की कथा भी कामराज द्वारा संगठित बाल सेना की प्रसिद्ध है | गाँव में चोर था जिसे कोई पकड़ न पाता था | एक रात उन्होंने छिपकर चोर के मुंह पर ठंडे पानी की बाल्टी फेंक थी | पानी में लाल मिर्च थी |  मिर्च आँख में लगने के कारण चोर पकड़ लिया गया | पिता की मृत्यु के बाद कामराज के सामने यह समस्या थी कि घर का खर्चा कैसे चले | दादी और माँ की इच्छा थी कि कामराज की पढाई चलती रहे इसलिए माँ ने अपने गहने बेचकर तीन-चार हजार रूपये जुटाए और महाजन के पास रख दिए |

उनका विचार था कि सूद से उनकी पढाई चलती रहेगी परन्तु ऐसा न हो सका और कामराज (K. Kamaraj) को पढाई छोडनी पड़ी | जिस समय पिता की मृत्यु हुयी थी उस समय उनकी आयु छ: वर्ष थी | उसी समय से घर की दाल रोटी चलाने की चिंता इन पर आ पड़ी इसलिए वे उन खेलकूद के दिनों में मामा की दूकान पर बैठकर काम करने लगे | कामराज की इच्छा थी कि वे व्यापारी बनेंगे परन्तु विधाता को आर्थिक व्यापार की बजाय उनके लिए राजनीतिक क्षेत्र पसंद था |

तेरह वर्ष की आयु में श्रीमती एनी बीसेंट के होमरूल आन्दोलन तथा वंदेमातरम् गीत सुनकर कुछ करने के लिए कामराज का जी मचल उठा | दादी और माँ के साथ साथ उनके मामा को चिंता हुयी | उनका जो परिवार सदा से अंग्रेजो का स्वामिभक्त रहा था उसी परिवार का एक लड़का अंग्रेजो के विरुद्ध कार्य करे उन्हें पसंद न था इसलिए घरवालो ने सोचा कि कामराज की शादी कर दी जाए परन्तु कामराज के सामने रास्ता दूसरा ही था और उन्होंने शादी नही की और देश सेवा का व्रत ले लिया |

उन्ही दिनों जलियांवालाबाग़ हत्याकाण्ड की चर्चा और उसके विरुद्ध जन आक्रोश सारे देश में था | सारे देश में जगह जगह सभाए हो रही थी | उनके गाँव में भी के सभा हुयी जिसमे डा.नायडू ने भाषण दिया था | इस सभा का प्रबंध युवक कामराज (K. Kamaraj) ने ही किया था | दक्षिण भारत में छुआछुत एक बड़ी भयंकर बीमारी थी वैसे तो कुछ अब भी है | गांधीजी ने अछुतोद्वार के लिए जब आन्दोलन चलाया तो कामराज गांधीजी के प्रथम सत्याग्रही बने | उसके बाद तो गांधीजी का कोई भी आन्दोलन , चाहे वह नागपुर झंडा सत्याग्रह आन्दोलन था या फिर नमक सत्याग्रह आन्दोलन ,सभी में भाग लेते रहे |

जब कामराज जी (K. Kamaraj) को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सदस्य चुना गया तो उस समय उनकी आयु 28 वर्ष थी | कामराज ने तमिलनाडु की गतिविधियों में आगे बढकर भाग लिया | 1934 में कांग्रेस में जब प्रांतीय असेम्बलियो के लिए चुनाव लड़ा , कामराज ने उस कार्य में बड़ा योगदान दिया | 1937 में वे विरुद नगर चुनाव क्षेत्र से भारी बहुमत से चुने गये | यह स्थान सदा से अंग्रेजो के पिट्ठुओ का गढ़ माना जाता रहा था | उसके बाद वह अनेक आंदोलनों में भाग लेने के कारण बहुत बार जेल गये |

अगस्त 1942 में बम्बई में जब “भारत छोड़ो आन्दोलन” संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया तो उस समय तमिलनाडू प्रादेशिक कांग्रेस के अध्यक्ष थे | अपने प्रदेश में प्रस्ताव लागू करने का उत्तरदायित्व उन्ही पर था | बम्बई में सभी नेता गिरफ्तार कर लिए गये थे | मद्रास में इनकी गिरफ्तारी की प्रतीक्षा थी परन्तु वे बम्बई से मद्रास आते हुए स्टेशन से पहले ही उतर गये और अपने साथियो को आदेश देकर अगले दिन स्वयं अपने आपको पुलिस के हवाले कर दिया |

कामराज (K. Kamaraj) जिन दिनों तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने उनका विश्वास था कि मंत्रीमंडल जितना छोटे से छोटा हो उतना ही अच्छा | मुख्यमंत्री बनने पर भी कामराज में किसी भी प्रकार का अभिमान नही आया | वे छोटे से छोटे व्यक्ति से भी सदैव प्रेम से मिलते थे और उसकी समस्या हल करने के लिए पूरा प्रयत्न करते थे | नौ वर्ष के अपने मुख्यमंत्री काल में उन्होंने तमिलनाडु की उन्नति के लिए भरपूर प्रयत्न किये | कांग्रेस का अध्यक्ष पद सम्भालना भी एक बड़ा महत्वपूर्ण कार्य होता है उन्होंने अपने प्रयत्नों और कार्य चातुर्य से कांग्रेस की लोकप्रियता में कोई कमी नही आने दी |

कामराज (K. Kamaraj) जिस पद पर रहे , उन्होंने सदा गरीबो ,श्रमिको और दलित वर्ग का साथ दिया | भारत की राजनीति में कामराज जैसे व्यक्ति बहुत कम हुए है जिन्होंने बहुत कम शिक्षा और विशेष साधनों के न होने पर भी उतनी उन्नति ही हो और सर्वथा निर्लिप्त रहे हो | उनके सामने एक दो बार ऐसे अवसर आये कि वे किसी दुसरे देश का प्रधानमंत्री बनकर स्वयं सत्ता सभाल सकते थे किन्तु उन्होंने स्वयं “किंग” बनने की बजाय “किंगमेकर” का रोल अदा करना ही ठीक समझा |

अक्टूबर 1975 में यह लौह पुरुष और हाथी जैसे मजबूत दिल-दिमाग और शरीर वाला व्यक्ति जिसका तकिया कलाम “पार कलाम” था थोड़ी सी बीमारी के बाद ही उस संसार को छोड़ कर चल बसा | विदा होते समय विरुद पट्टी में उनकी माता की कच्ची-पक्की झोपडी के अतिरिक्त उनका अपना कुछ भे नही था परन्तु सम्मान और देशवासियों के कमजोर वर्ग से जो प्यार की पूंजी उन्हें प्राप्त हुयी थी उसके सामने बड़े से बड़ा धन तुच्छ था | वह पहले ही महान थे | भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत सन 1976 में भारत रत्न से विभूषित करके ओर भी महान बनाने का प्रयत्न किया |

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