के.आर.नारायणन की जीवनी | K. R. Narayanan Biography in Hindi

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के.आर.नारायणन की जीवनी | K. R. Narayanan Biography in Hindi
के.आर.नारायणन की जीवनी | K. R. Narayanan Biography in Hindi

भारत के दसवे राष्ट्रपति के.आर नारायणन (K. R. Narayanan) हुए | उनकी प्रारम्भिक पृष्टभूमि राजनितिक नही थी | उनसे पहले के अधिकाँश राष्ट्रपतियों ने राजनीति को पुरी तरह जिया था | नारायणन (K. R. Narayanan) ने एक राजनयिक के रूप में अपने जीवन के सर्वोत्तम वर्ष व्यतीत किये और भारतीय विदेश सेवा के सर्वोच्च पद विदेश सचिव से रिटायर हुए थे | उन्होंने अपने जीवन के अंतिम चरण में राजनीती में प्रवेश किया था |

के.आर.नारायणन का प्रारम्भिक जीवन

कोचेरिल रमण नारायणन (K. R. Narayanan )का जन्म 27 अक्टूबर 1920 को केरल के कोट्टायम जिले के उजाउर गाँव में एक दलित परिवार में हुआ था | नारायाणन जिस घर में पैदा हुए थे उसमे खाने के भी लाले थे | उनके पिता कोचिरल रमण वैधम जड़ी बूटियों से इलाज कर अपनी जीविका चलाते थे | यह वैधम नाम शायद इसी कारण पड़ा था | उनकी माता का नाम पप्पी अम्मा था | नारायणन सात भाई-बहन थे | इनमे से तीन बहने और चार भाई थे | उनका परिवार फूस की झोपडी में रहता था |

आर्थिक बदहाली के बावजूद नारायणन (K. R. Narayanan) के मन में शुरू से ही शिक्षा पाने की ललक थी | स्कूल जाने के लिए उन्हें कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता था | गरीब पिता  कई बार उनकी स्कूल फीस समय पर नही दे पाते थे जिससे नारायणन को अपने शिक्षको और सहपाठियों के सामने अपमान का सामना करना पड़ता था | पांचवी से आठवी तक की पढाई उन्होंने उजाउर के सरकारी विद्यालय से की |

इसके बाद कोराविल्नगद के सेंत मेरी बॉयज हाई स्कूल से उन्होंने शिक्षा प्राप्त की | स्कूली पढाई के दौरान उन्हें गांधीजी के हरिजन सेवक संघ से भी सहायता मिली | उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने छात्रवृत्तियो के आलावा ट्यूशन का भी सहारा लिया | नारायण ने त्रावणकोर विश्वविद्यालय से अव्वल दर्जे में अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. किया | त्रावणकोर जैसे पिछड़े प्रदेश में नौकरी की सम्भावना नही दिखने पर वे दिल्ली चले आये | यहाँ पर उन्हें सरकारी नौकरी मिल गयी |

इसी दौरान उन्हें इकोनॉमिक वीकली फॉर कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में काम करने का प्रस्ताव मिला | यधपि वेतन कम था लेकिन कार्य रूचि का था इसलिए उन्होंने इस पत्र में काम करना शुरू कर दिया | इसी बीच उन्होंने आगे पढाई जारी रखने के बारे में भी सोचा | टाटा उद्योग समूह की छात्रवृति से उनका यह सपना भी साकार हुआ और ब्रिटेन के लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में अध्ययन करने का मौका मिला |

यही उनके भाग्य ने करवट बदली | यहाँ वे राजनीती के विख्यात विद्वान एवं लेखक प्रो.लास्की के सम्पर्क में आये | वे भी नारायणन से प्रभावित हुए बिना नही रह सके| पंडित जवाहरलाल नेहरु भी प्रो.लास्की के छात्र रह चुके थे | जब नारायणन स्वदेश लौटे तो प्रो.लास्की ने उन्हें पंडित नेहरु के नाम एक पत्र दिया , जिसमे उनकी योग्यता को सराहा गया था | नारायणन जब यह पत्र लेकर पंडित नेहरु से मिले तो उन्होंने नारायणन को भारतीय विदेश सेवा में नियुक्त करवा दिया | इस प्रकार नारायणन बिना किसी प्रतियोगिता का सामना किये 1949 में भारतीय विदेश सेवा में शामिल हो गये |

के.आर.नारायणन का कार्यकारी जीवन

विदेश सेवा में उनकी पहली पदस्थापना रंगून के भारतीय दूतावास में हुयी | यहाँ उन्होंने द्वितीय वित्त सचिव के रूप में कार्य किया | इसके बाद वे लन्दन , टोकियो और ऑस्ट्रेलिया में भी रहे | रंगून प्रवास के दौरान ही उनकी मुलाकात मा टिंट टिंट नामक बर्मी लडकी से हुयी , जिन्होंने अपना नाम बदलकर उषा कर दिया | 08 जून 1951 को नारायणन और उषा विवाह सूत्र में बंध गये | विदेश सेवा के दौरान नारायणन (K. R. Narayanan) ने कई महत्वपूर्ण पदों को सम्भाला | वे थाईलैंड और तुर्की में भी राजदूत रहे |

1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद जब 1976 में दोनों देशो के मध्य राजनयिक संबध स्थापित हुए तो नारायणन को वहां का राजदूत नियुक्त किया गया | विदेश सेवा के दौरान ही उनकी अध्यययन अध्यापन की रूचि कायम रही | उन्होंने जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय सहित कई विश्वविद्यालयो में अध्यापन का कार्य भी किया | 1976 में उन्हें विदेश सचिव बनाया गया | 1978 में सेवानिवृत होने के बाद उन्हें जवाहरलाल नेहर विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया | नारायणन के भाग्य का सितारा बुलंदी पर था | 1980 में उन्हें प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने संयुक्त राज्य अमेरिका का राजदूत बनाया | इस महत्वपूर्ण पद वे चार साल तक रहे |

के.आर.नारायण का राजनितिक जीवन

अमेरिका से लौटने के बाद उनकी राजनीती में रूचि जागृत हुयी | उन्होंने अपना पहला चुनाव केरल के कोट्टायम आरक्षित क्षेत्र से लड़ा और विजय हासिल कर लोकसभा में पहुचे | वे आठवी ,नवी और दसवी लोकसभा के सदस्य रहे | 1984 में उन्हें योजना राज्य मंत्री बनाया गया | इसके आलावा उन्हें विदेश विभाग , विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी , अणुशक्ति और इलेक्ट्रॉनिक्स , स्पेस तथा सामुद्रिक विकास आदि मंत्रालयो की जिम्मेदारी भी सौंपी गयी | प्रधानमंत्री पी.वी नरसिंह राव के काल में उन्हें 21 अगस्त 1992 को उपराष्टपति चुना गया | उपराष्ट्रपति के साथ उन्होंने राज्यसभा के अध्यक्ष पद को भी संभाला जहां वे निष्पक्ष ,साहसी एवं विनम्र साबित हुए |

25 जुलाई 1997 को उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली |राष्ट्रपति पद के प्रत्याक्षी के रूप में उन्हें तीनो प्रमुख दल कांग्रेस ,संयुक्त मोर्चा और भाजपा ने समर्थन दिया ,जिससे उन्हें 94.97 मत प्राप्त हुए | इस पद के लिए उनका मुकाबला पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन.शेषन से था | वे पहले मलयाली व्यक्ति थे जिन्होंने राष्ट्रपति भवन में स्थान पाया | इसके साथ ही वे देश के छठे ऐसे उपराष्ट्रपति थे जिन्हें राष्ट्रपति होने का गौरव मिला |

राष्टपति बनने के चार महीने बाद ही उन्हें गम्भीर राजनितिक संकट का सामना करना पड़ा जब 28 नवम्बर 1997 को इंद्र कुमार गुजराल की सयुक्त मोर्चा सरकार से कांग्रेस ने समर्थन खींच लिया | गुजराल सरकार के त्यागपत्र देने के साथ लोकसभा भंग करने की अनुशंषा भी नही की थी लेकिन अल्पमत सरकार को शासन में रखा भी नही जा सकता था | उनके समक्ष यह कठिनाई थी कि सरकार बनाने योग्य बहुमत किसी दल के पास नही था |

उन्होंने संविधान विशेषज्ञ से विचार विमर्श किया अंतत: सरकार लोकसभा भंग करने को राजी हो गयी और राष्ट्रपति ने 4 दिसम्बर 1997 को 11वी लोकसभा को भंग कर दिया | उनके इस सटीक फैसले का सभी ने स्वागत किए | उन्हें अपने पूर्ववर्तियो की तुलना में विदेशो से काफी सम्मान मिला | उनको न्युयोर्क में वर्ल्ड स्टेट्समैन पुरुस्कार 1998 में सम्मानित किया गया | उन्हें कई विश्वविद्यालयो ने मानद उपाधियाँ दी थी |

नारायणन (K. R. Narayanan) पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्होंने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था | फरवरी 1998 में हुए लोकसभा चुनावों में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ निर्वाचन केंद्र पर पंक्ति में खड़े होकर मतदान में भाग लिया | वास्तव में वे योग्य और क्षमतावान राष्ट्रपति के साथ संविधान के अक्षर-अक्षर में विश्वास रखने वाले राष्ट्राध्यक्ष थे | दलित की झोपडी से राष्ट्रपति पद तक पहुचने वाले वे प्रथम व्यक्ति थे | निष्पक्ष , न्यायप्रिय और कविहृदय के.आर.नारायणन (K. R. Narayanan) 9 नवम्बर 2005  निधन हो गया |

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