Kabir Das Biography in Hindi | संत कबीरदास की जीवनी

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Kabir Das Biography in Hindi
Kabir Das Biography in Hindi

प्रसिद्ध संत कबीर (Kabir Das) के जन्म में विद्वान एकमत नही है | कुछ उनका जन्म 1398 ईस्वी में मानते है | कहा जाता है कि वे एक विधवा ब्राह्मणी की सन्तान थे जिन्हें वह लोकलाज के कारण वाराणसी के निकट लहरताला तालाब के किनारे छोड़ गयी थी |वहा से उन्हें नीरू नाम के जुलाहे और उसकी पत्नी नीमा अपने घर ले गये और बच्चे का पालन-पोषण किया | जबलपुर विश्वविद्यालय के कुलपति डा.राजबली पाण्डेय का मत इससे भिन्न है | उनका कहना है कि कबीर का जन्म 1500 ईस्वी के लगभग इस जुलाहा जाति से हुआ जो कुछ ही पीढ़ी पहले हिन्दू से मुसलमान हुयी थी जिसके अंदर बहुत हिन्दू संस्कार जीवित थे |

इसी प्रकार कबीर (Kabir Das) के विवाह एक संबध में भी दो मत है | कबीरपंथी उन्हें आजन्म ब्रह्मचारी मानते है जबकि उनके पदों में आये नामो के आधार पर कुछ लोग उन्हें लोई नाम की स्त्री का पति और कमाल (पुत्र) एवं कमाली (पुत्री) का पिता बतलाते है | कबीर काशी के प्रसिद्ध संत रामानन्द के शिष्य थे | उनका समय बड़ी अस्थिरता का काल था | लोदी वंश की कट्टरता चरम सीमा पर थी | ऐसे में कबीर (Kabir Das) ने समस्त ब्र्ह्मचारो को अंत करके मानव समाज को प्रेम के धरातल पर आने का संदेश दिया |

उनके विचारों पर हिन्दू संतो और मुसलमान सूफियो दोनों का प्रभाव था | वे हिन्दू मुसलमानों में कोई भेद नही मानते थे | दोनों एक ही मिटटी के पुतले थे | राम और रहीम एक थे | उनकी न मन्दिर में आस्था थी न मस्जिद में | जुलाहे का काम करते हुए उन्होंने लोगो को सन्मार्ग पर लाने का प्रयत्न किया | कबीर पढ़े लिखे नही पर उच्च कोटि के ज्ञानी थे | अपनी बाते उन्होंने बड़ी सरल भाषा में कही | कहते है कि उनके भक्त उनके कथनों को लिख लिया करते थे | उनकी “साखियो” और “सब्दो” का विपुल साहित्य है | इनमे कबीर ने अद्वैत मत का प्रतिपादन किया है

जन्म की भांति कबीर (Kabir Das) के निधन के संबध में भी लोक में एक मान्यता प्रचलित है | उस समय यह विशवास किया जाता था कि काशी में प्राण त्यागने से स्वर्ग और मगहर में मरने से नर्क मिलता है | इस विश्वास को मिथ्या साबित करने के लिए कबीर मृत्यु के समय मगहर चल्ले गये थे \ उनकी मृत्यु के बाद शव को लेकर हिन्दू-मुसलमानों में विवाद आरम्भ हुआ तो लोगो ने देखा कि मृत देह के स्थान पर कुछ पुष्प ही पड़े है | जहा कबीर का देहांत हुआ वहा पर चाहरदीवारी के अंदर मन्दिर और मस्जिद बने है | कबीर (Kabir Das) का निधन 1518 ईस्वी माना जाता है |

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