Kanhaiyalal Biography in Hindi | जीवंत चरित्र अभिनेता कन्हैयालाल की जीवनी

Kanhaiyalal Biography in Hindi

Kanhaiyalal Biography in Hindi

बात पहले कन्हैयालाल (Kanhaiyalal) की | उनका पूरा नाम पं. कन्हैयालाल चतुर्वेदी था और वो वाराणसी के रहने वाले थे | पढाई-लिखाई ज्यादा नही की थी लेकिन किरदारों को ऐसे निभाते थे मानो जिन्दगी का सारा फलसपा क्षण भर में ही व्यक्त कर जाते हो | सन 1940 में महबूब खा की फिल्म “औरत” में कन्हैयालाल ने चतुर साहूकार की भूमिका निभाई थी चूँकि “औरत” की कामयाबी के बाद भी महबूब खा उस फिल्म से काफी संतुष्ट नही थे , उन्हें लगता था कि वो जो कहना चाहते थे वह “औरत” में कह नही पाए है लिहाजा सत्रह साल बाद उन्होंने उसी कथानक पर “मदर इंडिया” फिल्म बनाई ,जिसमे एक बार फिर कन्हैयालाल ने चतुर साहूकार का किरदार निभाया था जिसका नाम था सुखी लाला |

कहते है “मदर इंडिया” में उन्होंने “औरत” के सारे कलाकार बदल दिए लेकीन साहूकार के किरदार के लिए कन्हैयालाल (Kanhaiyalal) को बदल पाना उनके लिए नुमकिन नही हो सका | अपने एक साक्षात्कार में महबूब खान के ये शब्द थे “मैंने कन्हैयालाल से जब यह कहा कि आप लाला की भूमिका फिर से करने वाले है तो उनकी आँखों में चमक आ गयी | बात सच भी थी कि “मदर इंडिया” की सारी कास्टिंग को अंतिम रूप देने में मुझे अडचन आयी लेकिन लाला की भूमिका में मै कन्हैयालाल के अलावा किसी ओर के बारे में सोच भी नही पाया” |

गौरतलब है कि “मदर इंडिया” फिल्म में जिसकी सबसे ज्यादा चर्चा होती है वह है नरगिस और महबूब खान लेकिन कन्हैयालाल के बिना क्या यह सम्भव था ? सुनील दत्त ने अपने एक साक्षात्कार में कहा था “मै तो अक्सर कैमरे के पीछे खड़े होकर उनकी परफॉरमेंस को देखता था | कभी ऐसा नही लगता कि वो अभिनय कर रहे है | इतने विन्रम और सादगी पसंद इंसान थे कि उन्हें इस बात का जरा भी अहसास नही था कि वे कैमरे के सामने क्या चमत्कार कर जाते है “|

“मदर इंडिया” के बाद भी तमाम ऐसी फिल्मे है जिनमे कन्हैयालाल के अभिनय का जादू देखने को मिला है | “गंगा जमना” , “उपकार” , “दुश्मन” , “अपना देश” , “गोपी” , “धरती कहे पुकार” और “हम पांच” आदि | “गंगा जमना” ,इ साथ काम कर चुके ट्रेजेडी किंग कहे जाने वाले दिलीप कुमार ने उनके बारे में कहा था कि “मै उनकी प्रस्तुति से बहुत घबराता था | संवाद अदायगी के दौरान वे जिस तरह से सामने वाले कलाकार को रिएक्शन देते थे उसका सामना करना बहुत मुश्किल होता था “| राजेश खन्ना ने जब “दुश्मन” में उनके साथ काम किया तो उन्हें भी कहना पड़ा “वो तो बहुत नेचुरल एक्टिंग करते थे” | “दुश्मन” में उनका एक संवाद काफी लोकप्रिय हुआ “कर भला तो हो भला” |

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