Kapil Dev Biography in Hindi | कपिल देव की जीवनी

Kapil Dev Biography in Hindi | कपिल देव की जीवनीविश्व के सर्वश्रेष्ठ All Rounders में से एक तूफानी गेंदबाजी के मशहूर , तेज रन बनाने वाले , हरफनमौला खिलाड़ी एवं विश्व कप में भारत को पहली जीत दिलाने वाले एकमात्र खिलाड़ी कप्तान कपिल देव ((Kapil Dev) ने भारत को ही नही अपितु विश्व को भी गौरवान्वित किया है | आइये आज आपको कपिल देव (Kapil Dev) की जीवनी के बारे में विस्तार से बताते है |

कपिल देव (Kapil Dev) का जन्म 6 जनवरी 1959 को चंडीगढ़ में हुआ था | बचपन से ही कपिल की क्रिकेट में इस कदर दिलचस्पी थी कि ये हाथ से बनाई हुये बल्ले या लकड़ी के पट्टे से खेला करते थे | 6 फूट के इस नौजवान ने हरियाणा स्कूल से पंजाब के विरुद्ध खेलते हुए शानदार खेल का प्रदर्शन किया | 1975-76 में इन्होने रणजी ट्रॉफी मैचो में हिस्सा लिया और इसके बाद 1978 में पाकिस्तान दौरे पर जाने वाली भारतीय टीम में इन्हें शामिल कर लिया गया |वेस्टइंडीज के विरुद्ध दिल्ली में खेले जाने वाले पांचवे टेस्ट में कपिल ने जीवन का पहला शतक लगाया |

भारतीय खिलाडियों में सबसे कम उम्र में शतक बनाने वाले खिलाडियों में ये भी एक है | कपिल देव (Kapil Dev) एक तेज गेंदबाज होने के साथ साथ तेज बल्लेबाज भी है | कम गेंदों में अधिक रन बनाना इनकी विशेषता रही है | इन्होने अपने टेस्ट जीवन में 5000 से अधिक रन और 432 विकेट लिए है | सर रिचर्ड हेडली के सर्वाधिक विकटों का रिकॉर्ड इन्होने ही तोडा था | 20 वर्ष की उम्र में 27 जनवरी 1979 को इन्होने दिल्ली में वेस्ट इंडीज के विरुद्ध सर्वाधिक 126 नाबाद रन बनाये | इसी वर्ष सर्वाधिक विकेट इन्होने लिए | 17 टेस्ट में 74 विकेट लिए | 25 मैचो में 100 विकेट तथा 1000 रन भी बनाये |

1983 का विश्व कप जीतकर कपिल देव (Kapil Dev) ने सनसनी फैला दी थी | 23 फरवरी 1983 में भारतीय क्रिकेट टीम का नेतृत्व करते हुए इन्होने जिम्बाबे के विरुद्ध एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच में 16 चौको और 6 छक्को की मदद से नाबाद 175 रन बनाये , वह भी 17 रन पर 5 विकेटों के गिरने पर | 25 जून 1983 को तीसरे विश्वकप में विश्व विजेता वेस्ट इंडीज को 43 रनों से हराकर भारत को विश्व विजेता होने का सर्वप्रथम गौरव दिलाया | 16 नवम्बर 1983 को इन्होने अपने जीवन की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी कर 83 रन देकर 9 विकेट झटके | 1986 में कानपुर ग्रीन पार्क में श्रीलंका के विरुद्ध 165 गेंदों में 163 रन बनाये ,जिसमे 19 चौके एवं 1 छक्का शामिल था |

इतना ही मात्र 74 गेंदों में शतक भी लगाया | 1990 की तीन टेस्टों की श्रुंखला के पहले टेस्ट में इंग्लैंड के विरुद्ध 6 छक्के मारकर विश्व कीर्तिमान बनाया | इन्होने 131 टेस्ट में 5248 रन 31.05 की औसत से बनाये व आठ शतक तथा 432 विकेट 29.64 की औसत से लेकर 64 कैच भी लिए |

इस हरफनमौला महान खिलाड़ी को सन 2002 में शताब्दी के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर का सम्मान मिला | इनके बेहतरीन खेल के लिए 1979 में अर्जुन पुरुस्कार ,1982 में पद्मश्री तथा 1991 में पद्मभूषण से नवाजा गया | कपिल देव (Kapil Dev) ने 2 नवम्बर 1994 को अंतर्राष्ट्रीय किकेट को अलविदा कह दिया किन्तु ये भारतीय टीम के प्रशिक्षक भी रहे | क्रिकेट के अलावा इनकी गोल्फ और फूटबाल खेलने में भी रूचि रही है | नि:संदेह विश्व के सर्वश्रेष्ठ All Rounder है | भारत को पहली बार विश्व कप विजेता बनाने का चमत्कार कपिल देव (Kapil Dev) ही कर सकते थे |

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