Kundanlal Saigal Biography in Hindi | कुंदनलाल सहगल की जीवनी

Kundanlal Saigal Biography in Hindi

Kundanlal Saigal Biography in Hindi

कुंदनलाल का जन्म जम्मू में हुआ | उनके पिता अमरचंद जम्मू और कश्मीर के दरबार में तहसीलदार थे | उनकी माता केसर बाई एक धार्मिक महिला थी तथा उन्हें संगीत का शौक था | प्रारम्भिक शिक्षा के बाद स्कूली पढाई छोड़ वे रेलवे में Time Keeper की नौकरी करने लगे | फिर उन्होंने Remington Typewriter Company में एक सेल्समेन के रूप में काम करना शुरू किया | पुरे भारत में वे Typewriters बेचने के लिए घूमते रहे |

लाहौर में श्री मेहरचंद जैन उन्हें मिले जिन्होंने उनकी गीत गाने की उनकी प्रतिभा को पहचाना और प्रोत्साहन दिया | कुछ समय बाद वे कलकत्ता चले गये क्योंकि तब वह नगर संगीत , नाटक तथा फिल्मो का केंद्र था | कलकत्ता में वे न्यू थिएटर से जुड़े तथा पंकज मलिक के.सी.डे और पहाडी सान्याल से मिले | इसी बीच भारतीय ग्रामोफोन कम्पनी ने सहगल का एक रिकॉर्ड जारी किया जिसमे हरिश्चन्द्र बाली के संगीत से सजे गीत थे |

1932 में उन्होंने कई फिल्मो में अभिनय भी किया जैसे मुहब्बत के आंसू , सुबह का सितारा ,जिन्दा लाश आदि | 1933 में पूरन भगत के चार भजनों ने उनको प्रसिद्ध कर दिया | देवदास में शराबी नायक की भूमिका ने तो उन्हें अमर कर दिया | इस फिल्म के उनके गाये गीत “बालम आन बसों मेरे दिल में” तथा “दुःख के अब दिन बीतत नाही” पुरे देश में अत्यंत लोकप्रिय हो गये थे | अभिनेता एवं गायक के रूप में दिनोंदिन सहगल प्रसिद्ध होते गये |

कलकत्ता में रहते हुए उन्होंने बंग्ला भाषा पर अच्छा अधिकार कर लिया था | लगभग 7 बंग्ला फिल्मो में अभिनय और गायन दोनों ही किये | Street Singer (1938) में “बाबुल मोरा नैहर छुटो जाए” गीत गाते हुए उन्होंने अत्यंत भावपूर्ण अभिनय किया | दिसम्बर 1941 में वे रणजीत मूवी टोन के साथ काम करने बम्बई आ गये | भक्त सूरदास (1942) और तानसेन (1943) इस दौर की सबसे प्रसिद्ध फिल्मे थी | 1944 में वापस कलकत्ता जाकर न्यू थिएटर की “मेरी बहन ” पुरी की | इस फिल्म केगीत संगीत प्रसिद्ध रहा | “दो नैना मतवारे” और “ए कातिब ए तकदीर मुझे इतना बता दे” जैसे गीत इस फिल्म के थे जिन्होंने सहगल को अमर बना दिया |

के.एल.सहगल की आवाज की विशिष्टता ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया | लता मंगेशकर , मोहम्मद रफी , मुकेश आदि सभी ने उन्हें संगीत और अभिनय का सम्राट माना | देखा जाए तो फिल्म जगत के “प्रथम सुपरस्टार” वही थे | दुर्भाग्य रह रहा कि उन्हें शराब पीने की लत लग गयी | गीत गाने से पूर्व वे जरुर पीते थे | लगातार कई वर्षो तक पीने के कारण उनका स्वास्थ्य गिरने लगा | उनकी अंतिम फिल्म थी शाहजहाँ जिसमे उनके तीन गाने हिट रहे थे | जब दिल ही टूट गया प्रसिद्ध गीत इसी फिल्म का था जिसक संगीत नौशाद ने दिया था | परवाना (1947) उनकी मृत्यु के बाद रिलीज हुयी थी | 42 वर्ष की उम्र में जालन्धर में 18 जनवरी 1947 को उनके मृत्यु हो गयी | वे अपने पीछे पत्नी आशा रानी तथा दो पुत्र और एक पुत्री छोड़ गये | उनकी असमय मृत्यु ने उनके प्रशंशको को दुखी कर दिया |

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  1. HindiApni August 10, 2018

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