M.S.Swaminathan Biography in Hindi | विश्वप्रसिद्ध कृषि विशेषज्ञ एम.एस.स्वामीनाथन की जीवनी

M.S.Swaminathan Biography in Hindi | विश्वप्रसिद्ध कृषि विशेषज्ञ एम.एस.स्वामीनाथन की जीवनीभारत के कृषि प्रधान देश है लेकिन सन 1964-65 की अवधि में हमारे खेतो से अनाज की उत्पत्ति कम हो चली थी | विशाल जनसंख्या वाले देश में खाध्य पदार्थो की कम उत्पत्ति के कारण लोगो को बैचैनी बढ़ चली थी | ऐसे टेढ़े समय में डा.स्वामीनाथन (M.S.Swaminathan) देश में हरित क्रांति लेकर आये जिससे अनाज की उत्पति कई गुना हो गयी और देशवासियों की भोजन की समस्या हल हो गयी | डा.स्वामीनाथम भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान में विज्ञानिक पद पर कार्य कर रहे थे | इन्ही दिनों नोबल पुरूस्कार विजेता बोरलोग ने मैक्सिकन ड्वार्फ किस्म के गेंहू के बीज का आविष्कार किया |

डा.स्वामीनाथन (M.S.Swaminathan) का दावा था कि गेहू की यही ड्वार्फ किस्म हमारे देश की अन्न उत्पादन समस्या को हल कर सकती है | स्वामीनाथन की प्रार्थना पर बोरलोग को भारत बुलाया | उन्होंने भारत आकर यहा की कृषि समस्या को समझा और उन्होंने मैक्सिकन ड्वार्फ किस्म के गेंहू के कई प्रकार के बीज बो दिए | वे हमारे देश के खेतो में गेंहू के उत्पादन को बढाने में बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुए | इनसे गेंहू का उत्पादन काफी अधिक हो गया | दस वर्ष की अवधि में गेंहू का उत्पादन दुगुना हो गया | इस प्रकार स्वामीनाथन हरित क्रांति लाने में सफल हुए | इससे देश में अन्न समस्या का समाधान हुआ |

स्वामीनाथन (M.S.Swaminathan) का जन्म 7 अगस्त 1925 को कुम्मा कोनम में हुआ था था | इनकी मूल शिक्षा तमिलनाडु में हुयी | इसके बाद ये पी.एच.डी. करने के लिए इंग्लैंड के कैब्रिज विश्वविद्यालय में चले गये | वहा से इन्होने Ph.D. की उपाधि ली और इसके बाद 20 साल की अवधि तक भारतीय कृषि अनुसन्धान में अनेक विषयों पर कार्य किया | इन्होने गेंहू और चावल की अनेक किस्मे विकसित की | इन्होने आलू की भी अनेक किस्मे विकसित की जिससे देश में आलू की अच्छी फसल पैदा हो सकी |

स्वामीनाथन (M.S.Swaminathan) बहुत ही सफल प्रबन्धक और सामाजिक कार्यकर्ता रहे है | उन्होंने कृषि उत्पादन के लिए अनेक योजनाये चलाई | सन 1971 में इन्हें रोमन मेघा से पुरुस्कार प्रदान किया गया | सन 1973 में वे रॉयल सोसाइटी के फेलो चुने गये | इन्हें शांति स्वरूप भटनागर , बीरबल साहनी मैडल और मैंडल मेमोरियन पुरुस्कार मिल चुके है | इसके बाद वे अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसन्धान संस्थान , जो फिलीपींस में है के निदेशक रहे |

डा.स्वामीनाथन (M.S.Swaminathan)  एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक है जिन्हें हम कभी नही भुला सकते | इनका गेंहू की किस्मे पैदा करने में विशेष योगदान रहा है | इनकी और किसानो की बदौलत देश में अन्न समस्या का समाधान हुआ | आज हमारा देश अन्न विषय में आत्मनिर्भर है | स्वामीनाथन (M.S.Swaminathan) की उम्र 90 से अधिक हो चुकी है और अभी भी देशहित में कार्यरत है |

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