Malala Yousafzai Biography in Hindi | मलाला युसुफजई की जीवनी

Malala Yousafzai Biography in Hindi | मलाला युसुफजई की जीवनी

Malala Yousafzai Biography in Hindi | मलाला युसुफजई की जीवनी

मलाला युसुफजई (Malala Yousafzai) ने पाकिस्तान में तालिबान का हुक्म मानने से इन्कार करते हुए लड़कियों की शिक्षा की आवाज बुलंद की , फलत: एक तालिबानी बंदूकधारी ने सन 2012 में उसके सिर में गोली मार दी लेकिन मलाला बच गयी | मलाला (Malala Yousafzai) का जन्म पाकिस्तान के मिंगोरा में 12 जूलाई 1997 को हुआ था | बचपन से ही लडकियो को भी लडको की तरह शिक्षा का हक देने की आवाज बुलंद करनी आरम्भ कर दी | इससे बौखलाकर तालिबान ने उसकी जान लेने की कोशिश की | वर्ष 2013 और 2014 में उसका नाम नोबल शान्ति पुरूस्कार के लिए नामित दिया गया |

स्वातधारी एक हरी भरी घाटी है जहा मलाला का गाँव है | कुछ समय तक यह स्थान पर्यटकों का पसंदीदा गर्मिया बिताने का स्थान रहा | यह अपने ग्रीष्म उत्सवो के लिए भी जाना जाता था | तालिबान के दखल के बाद इस इलाके की शान्ति भंग हो गयी और पर्यटक यहाँ से दूर हो गये | मलाला अपने पिता जियाउद्दीन युसुफजई के स्कूल में पढती थी | जब तालिबान इलाकाई लडकियों के स्कूलों को निशाना बनाने लगे तो मलाला ने सितम्बर 2008 में एक भाषण दिया ,जिसका शीर्षक था “तालिबान शिक्षा के मेरे बुनियादी अधिकार को छीनने की हिमाकत कैसे कर सकते है ?”

वर्ष 2009 के आरम्भ में मलाला (Malala Yousafzai)  BBC के उर्दू में Blogging शूरू कर दी और दुनिया को तालिबान की धमकियों को शिक्षा से वंचित रखने के उनके फरमान के बारे में बताने लगी | अपनी पहचान छुपाने के लिए वह छद्म नाम “गुल मकई” का इस्तेमाल करती थी लेकिन आखिर इसी वर्ष दिसम्बर में उसकी पहचान सार्वजनिक हो गयी | उसने लिखना नही छोड़ा | उसने बताया कि तालिबान ने उनका सड़क पर खेलना , TV देखना , गाने सुनना तक सब बंद करवा दिया था | उसने अपने Blog के जरिये लोगो को जागरूक किया और उन्हें लडकियों की शिक्षा के लिए प्रेरित किया |

इस प्रकार दुनिया भर में मलाला (Malala Yousafzai) को पहचान मिली | उसकी समाज सुधार की पहल और बहादुरी के लिए 2011 में उसका नाम अंतर्राष्ट्रीय बाल शान्ति पुरुस्कार के लिए नामित किया ,लेकिन उस वर्ष वह जीत नही पाई , बाद में 2013 में उसे यह पुरुस्कार मिला | वर्ष 2011 में पाकिस्तान सरकार ने उसे राष्ट्रीय युवा शान्ति पुरुसक्र से सम्मानित किया | मलाला जब 14 की थी तालिबान ने उसके विरुद्ध मौत का फतवा जारी कर दिया | उसके पिता भी तालिबान के मुखर विरोधी थे | परिवार को जान का खतरा था लेकिन उन्होंने ये सपने में भी नही सोचा था कि रुढ़िवादी तालिबान एक बच्ची को नुकसान पहुचा सकते है |

9 अक्टूबर 2012 को जब मलाला (Malala Yousafzai )स्कूल से घर लौट रही थी के आदमी बस में चढ़ा और पुछने लगा कि “मलाला कौन है ” | सब बच्चे मलाला की ओर देखने लगे | आदमी को इशारा मिल गया और उसने मलाला के सिर में गोली दाग दी | दो अन्य लडकिया भी जख्मी हुयी | गम्भीर मलाला का पहले पेशावर के सैनिक अस्पताल में इलाज चला फिर उसे बर्घिकम इंग्लैंड ले जाया गया | कई ऑपरेशन के बाद लगभग पाँच महीने में वह ठीक हुयी और बर्घिकम में रहकर पढने लगी | दुनिया भर में उसके समर्थको की संख्या बढ़ गयी |

अपने 16वे जन्मदिन पर वर्ष 2013 में उसने संयुक्त राष्ट्र में भाषण दिया | I am Malala शीर्षक से अपनी आत्मकथा भी लिखी जो अक्टूबर में प्रकाशित हुयी मलाला आज भी शिक्षा के अधिकार की वकालत करती है | 10 अक्टूबर 2013 को उसके उल्लेखनीय कार्यो के लिए यूरोपीय ससंद ने उसे सखारोव पुरुस्कार से सम्मानित किया | 2014 में मलाला (Malala Yousafzai) नोबल पुरुस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की विजेता बनी | मलाला आज लडकियों की आवाज है लेकिन दुर्भाग्य से वे अब भी तालिबान के निशाने पर है इसलिए वो इंग्लैंड में रह रही है |

One Response

  1. Samir Ansari May 7, 2018

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