Malik Muhammad Jayasi Biography in Hindi | मशहूर कवि मलिक मुहम्मद जायसी की जीवनी

Malik Muhammad Jayasi Biography in Hindi

Malik Muhammad Jayasi Biography in Hindi

हिंदी के प्रसिद्ध कवि और सूफी संत मलिक मुहम्मद जायसी (Malik Muhammad Jayasi) का जन्म परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के जायस नामक कस्बे में 1466 ईस्वी में हुआ था | जायस का प्राचीन नाम “उद्यान नगर” था जहा उपनिषद काल के ऋषि उद्दालक आश्रम बना कर रहते थे | जायसी गृहस्थी थे और खेती करते थे | उनका झुकाव आरम्भ से ही सूफी मत की ओर था | साथ ही उन्होंने हिन्दू धर्म के दार्शनिक सिद्धांतो का भी ज्ञान प्राप्त कर लिया था | ऐसा माना जाता है कि एक दुर्घटना में उनके पुत्र की मृत्यु होने के बाद उन्होंने गृष्ट जीवन त्याग दिया और सूफी संत बन गये | इसका प्रभाव उनकी रचनाओं में मिलता है |

जायसी (Malik Muhammad Jayasi) के ग्रंथो की संख्या 20 बताई जाती है जिनमे से ये पांच मिलते है “पद्मावत” “अखरावट” “आखिरी कलाम” “कहरनामा” और “चित्ररेखा” | इनमे पद्मावत सबसे प्रसिद्ध महाकाव्य और प्रेमाख्यान है | जायसी के निधन के संबध में दुखद प्रसंग मिलता है | कहते है अमेठी के राजा को जब उनकी काव्य प्रतिभा का पता चला तो वे सूफी कवि को ससम्मान अपने यहा ले गये और मंगरा के वन में रहने की व्यवस्था कर दी | जायसी ने एक बार राजा से कहा कि “मै योगबल से पशुओ का रूप धारण कर सकता हु”|

इस पर राजा ने निकटवर्ती वनों में शिकार पर प्रतिबन्ध लगा दिया | एक बार के शिकारी को बाघ की आवाज सुनाई दी तो उसने आत्मरक्षा में गोली चला दी | वह गोली जायसी को लगी और वे चल बसे | यह घटना 1543 ईस्वी की बताई जाती है | जायसी (Malik Muhammad Jayasi)अवधी भाषा के कवि थे | उनकी अपनी विशेष शैली थी | पद्मावत में राजा रत्नसेन और रानी पद्मिनी की कहानी के माध्यम से उन्होंने सूफी मत का प्रतिपादन किया था | उन्होंने एक सिद्ध कवि के रूप में श्रुगार के संयोग और वियोग दोनों पक्षों का निरूपण किया है उन पर वियोग पक्ष अधिक मर्मस्पर्शी है |

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