Manmohan Desai Biography in Hindi | संवेदना के सौदागर मनमोहन देसाई की जीवनी

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Manmohan Desai Biography in Hindi
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साठ के दशक में शम्मी कपूर के साथ “ब्लफमास्टर” और “बदतमीज” जैसी फिल्मो से अपने करियर की शुरुवात करने वाले और खासतौर पर सत्तर और अस्सी की दशक में मानवीय संवेदना के बेमिसाल सौदागर कहलाने वाले मनमोहन देसाई (Manmohan Desai) का जन्म 26 फरवरी 1937 को मुम्बई में हुआ था | उन्हें फिल्म निर्माण-निर्देशन की कला विरासत में मिली थी | उनके पिता किकुभाई देसाई Paramount Studios  के संस्थापक थे जिस बाद में फिल्मालय के नाम से जाना जाता था |

मनमोहन (Manmohan Desai) के छोटे भाई सुभाष देसाई भी फिल्म निर्माता बने यानि पूरा परिवार फिल्म उद्योग को समर्पित रहा | अपने पिता के Studio से बहुत कुछ सीखने के बाद मनमोहन देसाई ने पचास के दशक में बाबुभाई मिस्त्री के सहायक बन गये | इस दौरान उन्होंने फिल्म निर्माण की बारीकियाँ सीखी | इसके पश्चात उन्होंने फिल्म निर्माण में कदम रखा |

सन 1970 में “सच्चा-झूठा” (राजेश खन्ना) और सन 1971 में “भाई हो तो ऐसा” (जितेन्द्र) की सफलता के बाद उन्हें पारिवारिक जज्बातों से भरपूर मनोरंजक फिल्मकार की संज्ञा दी गयी | मनमोहन देसाई अपनी फिल्मो में ज्यादातर दो भाइयो या माँ-बेटे के मिलने-बिछड़ने की कहानी कहते रहे है मसलन धर्मवीर(1977) , अमरअकबरअन्थोनी (1978), नसीब (1981) या फिर गंगा-जमुना-सरस्वती (1988) | मनमोहन देसाई (Manmohan Desai) ने सर्वाधिक फिल्मे अमिताभ बच्चन के साथ बनाई |

बॉलीवुड की सफल केमिस्ट्री का जब भी विश्लेषण किया जाता है तो मनमोहन देसाई (Manmohan Desai) के महान पारिवारिक मनोरंजक मसाला की चर्चा अवश्य की जाती है | उनकी एक भी फिल्म में व्यावसायिक घाटा नही हुआ | वह अत्यंत सफल फिल्मकार साबित हुए | उनका सिनेमा पुरे परिवार को समेट कर और पुरे समाज को एक सूत्र में पिरोकर चलने वाला सिनेमा है | “अमर अकबर अन्थोनी” जैसा सर्व-धर्म समभाव , “देश-प्रेमी” जैसी सामाजिकता और राष्ट्रीय एकता का संदेश देने वाली फिल्मे गिनी-चुनी है |

मनमोहन देसाई (Manmohan Desai) ने “मर्द” जैसी फिल्म भी बनाई जिसमे गम्भीरता नही थी लेकिन “किस्मत” और “रोटी” जैसी कालजयी फिल्मे उन्ही की सोच की देन है | “खोया-पाया” की जिस आवधारणा का बीज एस.मुखर्जी ने 1943 में “किस्मत” फिल्म से किया था उसे व्यावसायिक तौर पर पल्लवित मनमोहन देसाई ने सत्तर और अस्सी के दशक में किया | मिलने-बिछड़ने के सारे खेल देखते हुए दर्शको की आँखों का भर जाना | तालियों की गडगडाहट से हॉल गूंज जाना – मनमोहन देसाई की सिनेमा का यही रचना संसार है रिश्तो की भावुक संवेदना है जहा मानवतावादी विचारों का स्प्रहुर्नीय दर्शन है |

मनमोहन देसाई (Manmohan Desai) की पत्नी जीवनप्रभा का देहांत 1979 में हो गया था इसके बाद वो 1992 से उनकी मृत्यु तक अभिनेत्री नंदा से भी जुड़े रहे | मनमोहन देसाई का एक पुत्र केतन देसाई है जो भी अपने पिता की तरह संवेदनशील फिल्मो के लिए जाने जाते है | केतन देसाई का विवाह कंचन कपूर से हुआ है जो शम्मी कपूर और गीता बाली की बेटी है | 01 मार्च 1994 को गिरगांव में मनमोहन देसाई बालकनी झुकते समय नीचे गिर गये , जिसकी वजह से उनका देहांत हो गया और फिल्म इंडस्ट्री का एक चमकता निर्माता इस दुनिया से चला गया |

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