Max Planck Biography in Hindi | क्वांटम सिद्धांत के अविष्कारक मैक्स प्लांक की जीवनी

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Max Planck Biography in Hindi | क्वांटम सिद्धांत के अविष्कारक मैक्स प्लांक की जीवनीजो लोग भौतिकी का अध्ययन करते है उन्हें मैक्स प्लांक (Max Planck) द्वारा प्रतिपादित क्वांटम सिद्धांत पढना पढ़ता है | यह एक युग-परिवर्तनकारी सिद्धांत है जिसे इन्होने सन 1900 में खोजा था | इस सिद्धांत के आविष्कार के लिए मैक्स प्लांक (Max Planck) को सन 1918 का भौतिक विज्ञान का नोबेल पुरुस्कार प्रदान किया गया था | इस सिद्धांत में उन्होंने प्रकाश के क्वांटम सिद्धांत का आविष्कार किया था जो प्रचलित भौतिकी से बिलकुल अलग था | जनसामान्य द्वारा इस सिद्धांत को समझना काफी मुश्किल कार्य है |

जर्मनी के कील नामक स्थान पर जन्मे इस विश्वप्रसिद्ध वैज्ञानिक मैक्स प्लांक (Max Planck) की शिक्षा म्यूनिख और बर्लिन विश्वविद्यालयो में हुयी | बर्लिन विश्वविद्यालय में इन्होने किरचौफ और हैल्महोल्ज जैसे वैज्ञानिकों के साथ काम किया | सन 1879 में इन्होने Ph.D. की उपाधि म्यूनिख विश्वविद्यालय से प्राप्त की | वहा ये 6 वर्ष तक भौतिकी पढाते रहे | सन 1885 में ये कील विश्वविद्यालय में एसोसिएट प्रोफेसर बना दिए गये | किरचौफ़ के साथ इनके काफी घनिष्ट संबध थे |

सन 1889 में इन्हें किरचौफ के स्थान पर भौतिकी के प्रोफेसर का पद प्रदान किया गया | अवकाश प्राप्त करने तक वो इसी पद पर कार्य करते रहे | इनके क्वांटम सिद्धांत के आधार पर अल्बर्ट आइन्स्टाइन ने प्रकाश के विद्युत प्रभाव की नये तरीके से विवेचना दी |इसी विवेचना के लिए आइन्स्टाइन को नोबल पुरूस्कार दिया गया | मैक्स प्लांक (Max Planck) ने अपने जीवन काल में क्वांटम सिद्धांत के अतिरिक्त ऊष्मा गति के क्षेत्र में विकिरणों के उपर अनेक कार्य किये | उन्होंने ब्लैक बॉडी विकिरणों के अध्ययन संबधी नये परिणाम प्राप्त किये जो पहले पता नही थे |

सन 1926 में मैक्स प्लांक (Max Planck) को रॉयल सोसाइटी का फेलो नियुक्त किया गया और सन 1928 में उन्हें रॉयल सोसाइटी का कोप्ले पदक प्रदान किया गया | सन 1926 में अवकाश प्राप्त करने के बाद उन्होंने विज्ञान के कार्य करने नही छोड़े | उसके बाद वो कैंसर सोसाइटी के अध्यक्ष चुने गये | सन 1926 के बाद हिटलर की तनाशाही के के कारण जर्मनी की हालत बहुत खराब हो गयी थी |मैक्स प्लांक (Max Planck) को जीवन में बहुत सी कठिनाईयो का सामना करना पड़ा | वो यहूदी नीतियों के कट्टर विरोधी थे |

उनको जीवन में सबसे बड़ा धक्का सन 1944 में लगा जब उनके बेटे को हिटलर की हत्या करने के असफल प्रयास के लिए फाँसी पर चढ़ा दिया गया | दुसरे विश्वयुद्ध के अंतिम सप्ताहों में उनका घर बम वर्षा से नष्ट हो गया | 4 अक्टूबर 1947 को इस महान वैज्ञानिक मैक्स प्लांक (Max Planck) की मृत्यु हो गयी | प्लांक के इतने महान कार्यो के लिए उन्हें कभी नही भुलाया जा सकता है | इनके साथी इनका बहुत आदर करते थे | वो संगीत के बहुत प्रेमी थे | उनके नाम पर एक स्थिरांक प्रयोग किया जाता था जिसे प्लांक स्थिरांक कहते है | यह उनके प्रति आदर का सूचक है | इसे h से प्रदर्शित किया जाता है | संसार में ऐसे वैज्ञानिक बहुत कम होते है |

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