Mehboob Khan Biography in Hindi | अविस्मरणीय फिल्मकार महबूब खान की जीवनी

Mehboob Khan Biography in Hindi | अविस्मरणीय फिल्मकार महबूब खान की जीवनी

Mehboob Khan Biography in Hindi

हिंदी सिनेमा के 100 से भी अधिक वर्ष का इतिहास मूल रूप से प्रेम के चित्रण का इतिहास रहा है | फिल्मो में तो नायक-नायिका का प्यार हमेशा दिखाया जाता है लेकिन कुछ ऐसे फ़िल्मकार भी रहे है जो पर्दे पर नायिका का प्यार दिखाते दिखाते अंत में पर्दे के पीछे ही नायिका के प्यार में पागल हो बैठे | उन्ही में से एक थे बहुचर्चित महान फिल्मकार महबूब खान (Mehboob Khan) |

महबूब खान (Mehboob Khan) का जन्म गुजरात के सुरत शहर के निकट के छोटे से गाँव में 7 सितम्बर 1906 को एक गरीब परिवार में हुआ था | शुरू से ही वो एक मेहनतकश इन्सान थे इसलिए उन्होंने अपने निर्माण संस्थान महबूब प्रोडक्शन का चिन्ह हंसिया हथौड़े को दर्शाता हुआ रखा | जब वह 1925 के आसपास बम्बई नगरी में आये तो इम्पीरियल कम्पनी वाल ने उन्हें अपने यहा हेल्पर के रूप में रखा लिया | कई वर्ष बाद उन्हें फिल्म “बुलबुले बगदाद” में खलनायक का किरदार निभाना पड़ा |

महबूब खान (Mehboob Khan) शूरवात में बहुत शराब पीते थे और उनके नाम के साथ कई प्रेम कहानिया भी जुडी | वह जिस अभिनेत्री को भी अपनी फिल्म में मौका देते उससे प्यार कर बैठते | उनके निर्देशन में पहली फिल्म “अलहिलाल” 1935 में बनी जो सागर मुवीटोन वालो की फिल्म थी | उसमे अभिनेत्री अख्तरी मुरादाबादी के साथ काम करते करते वह उनके प्यार में उलझ गये | आजादी से पूर्व फिल्म “औरत”का निर्देशन किया जिसकी नायिका सरदार अख्तर पर भी महबूब आशिक हो गये और उनका प्यार 24 मई 1942 को शादी में बदल गया | उनकी कोई सन्तान नही हुयी |

फिल्म “बहन” में एक नायिका हुस्न बानो ने काम किया | उसका असली नाम था रोशन आरा | महबूब खान (Mehboob Khan) उसके प्यार में भी उलझ गये | निम्मी की माँ वहीदन महबूबबाई भी महबूब से बहुत प्यार करती थी | महबूब खान (Mehboob Khan) जब तीसरी दशक में मुम्बई आये तो उन्होंने सबसे पहले सागर मुवीटोन वालो की लगभग एक दर्जन फिल्मो में सिर्फ अभिनय किया | इसके पश्चात सागर वालो ने सर्वप्रथम फिल्म “अह्लिवाल” में महबूब को निर्देशन का मौका दिया | इसके पश्चात तो महबूब के निर्देशन में सागर कम्पनी वालो की “मनमोहन” “एक ही रास्ता” तथा “अलीबाबा” जैसी फिल्मे आयी |

1940 में महबूब खान (Mehboob Khan) सागर कम्पनी छोडकर नेशनल स्टूडियो में आ गये | यहा आकर उन्होंने सर्वप्रथम फिल्म “औरत” का निर्देशन किया | अनिल विस्वास के संगीत से सजी फिल्म में नायिका सरदार अख्तर के साथ सुरेन्द्र तथा अरुण आदि कलाकारों ने काम किया | इसके पश्चात उनके निर्देशन में नेशनल फिल्म वालो की फिल्म “बहन” और “रोटी” आयी | 1942 में उन्होंने अपनी निर्माण संस्था महबूब प्रोडक्शन की स्थापना की और निर्माता-निर्देशक के रूप में अभिनेता अशोक कुमार को लेकर पहली फिल्म “नजमा” का निर्माण किया | इसके पश्चात तो महबूब प्रोडक्शन के अंतर्गत उन्होंने “तकदीर” “अनमोल घड़ी” “एलान” “अनोखी अदा” “अंदाज” “आन” “मदर इंडिया” “सन ऑफ़ इंडिया” जैसी फिल्मो का निर्माण किया |

महबूब (Mehboob Khan) की फिल्मो की सफलता का मुख्य कारण था प्रख्यात संगीतकार नौशाद का संगीत | उनके संगीत ने उन्हें पहली पंक्ति के फिल्मकारों में ला खड़ा किया | महबूब निर्माता-निर्देशक होने के साथ ही बेहतरीन लेखक भे थे | उनकी फिल्मे बड़े कलाकारों से पहले खुद के उनके नाम से जानी जाती थी | वह ऐसे फिल्मकार रहे जो भारत-पाक विभाजन पर भी पाकिस्तान नही गये | भारत में रहकर ही उन्होंने दर्जनों फिल्मो का निर्माण किया | उन्होंने फिल्म “औरत” को दोबारा “मदर इंडिया” के नाम से बनाया जो भारत की सरताज फिल्म कहलाई | इस फिल्म का गीत-संगीत नौशाद ने बहुत ही मधुर धुनों में पिरोया |

महबूब खान (Mehboob Khan) की फिल्म “अनमोल घड़ी” में नूरजहाँ , सुरैया ,सुरेन्द्र “अनोखी अदा ” में नसीम बानो ,सुरेन्द्र “अंदाज” में दिलीप कुमार ,मधुबाला ,निम्मी जैसे बड़े लोकप्रिय कलाकारों ने अपने अभिनय का जौहर दिखाए | उनकी सबसे चर्चित फिल्म “मदर इंडिया” में एक बार फिर महबूब ने राजकुमार ,राजेन्द्र कुमार ,सुनील दत्त ,नरगिस आदि कलाकारों को लिया जो फिल्म इतिहास के सबसे चर्चित कलाकार कहलाये | उनकी आखिरी फिल्म “सन ऑफ़ इंडिया” बुरी तरह असफल रही | भले ही इस फिल्म का गीत-संगीत काफी चर्चित रहा हो लेकिन महबूब (Mehboob Khan) को यह फिल्म घाटा दे गयी | इस सदमे से उनका स्वास्थ्य खराब होता गया और 27 मई 1964 को उनका निधन हो गया |

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