Milkha Singh Biography in Hindi | फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह की जीवनी

Milkha Singh Biography in Hindi | फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह की जीवनीओलम्पिक खेलो में दौड़ प्रतियोगिताये भी काफी लोकप्रिय रही है पहले ये प्रतियोगिताये घास के प्राकृतिक मैदान में होती थी अब ये कृत्रिम Tartan Track पर होती है | 5 प्रकार की इस प्रतियोगिता में विभिन्न दूरियों में 100 मीटर से लेकर 10,000 मीटर तक की सामान्य दौड़ो के अलावा 25-30 हजार की दौड़े ,रिले दौड़ ,बाधा दौड़ तथा स्टेपल चेस दौड़ होती है | इन दौड़ो में समय मापन के लिए इलेक्ट्रॉनिक यंत्रो का प्रयोग किया जाता है | हमारे देश में जिस खिलाड़ी ने 1960 के ओलम्पिक खेल में 400 मीटर की दौड़ में महत्वपूर्ण उपलब्धी हासिल कर देश का गौरव बढाया वो थे उडन सिख मिल्खा सिंह (Milkha Singh) |

मिल्खा सिंह (Milkha Singh) का जन्म 20 नवम्बर 1935 को पाकिस्तान में हुआ था | 1947 में जब ये अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दिल्ली आये तब उनकी उम्र मात्र 12 वर्ष ठी | मिल्खा सिंह के परिवार के अधिकतर लोग सेना में थे जिनमे इनके बड़े भाई माखन सिंह सेना में हवलदार थे | नवमी कक्षा तक शिक्षा प्राप्त करने वाले मिल्खा सिंह (Milkha Singh) का ध्यान पढाई लिखाई में न होकर खेल मे था | अपनी आजीविका के लिए ये पढाई छोडकर एक ढाबे में काम करने लगे | इनके भाई ने 1953 में इन्हें सेना में भर्ती करा दिया |

सौभाग्यवश उस समय सेना में खिलाडियों को महत्वपूर्ण स्थान दिया जाता था | सेना की ओर से खेलते हुए एक बार उन्होंने 5 मील करर दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लिया जिसमे ये दुसरे क्रम में थे | इनके प्रशिक्षको ने इन्हें सुझाव दिया कि इन्हें छोटे फासले की दौड़ो में हिस्सा लेना चाहिये | अत: ये 400 मीटर की दौड़ की दूरी की दौड़ का अभ्यास करने लगे | सेना में नौकरी के बाद अभ्यास के दौरान 400 मीटर की दौड़ को 1 मिनट 30 सैकंड में पूरा करते थे | उस समय का भारतीय रिकॉर्ड 48 सैकंड था |

निरंतर अभ्यास ,कठिन परिश्रम के बाद जब इन्होने पटियाला की एक दौड़ में हिस्सा लेकर 47.9 सैकंड का नया राष्ट्रीय कीर्तिमान स्थापित किया तो इन्हें 1956 के मेलबोर्न ओलम्पिक में भेजा गया | वहा 48.9 सैकंड में जो दूरी उन्होंने तय की वह विश्व रिकॉर्ड से काफी पीछे थी | उस समय 400 मीटर की विश्व विजीता अमेरिकी खिलाड़ी जैकिंस ने इन्हें जो सुझाव दिए उस पर चलते हुए मिल्खा सिंह ने 1957 की 22वी राष्ट्रीय एथेलेटिक्स प्रतियोगिता में इस दौड़ को 47.5 सैकंड में पूरा कर नया राष्ट्रीय कीर्तिमान बनाया |

1958 में टोकियो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलो में उन्होंने यह दूरी 47 सैकंड में पुरी की | 200 मीटर दौड़ 21.6 सैकंड में पुरी कर दोनों में प्रथम स्थान अर्जित किया | वेल्स के पांचवे राष्ट्रमंडल खेलो में यह दूरी उन्होंने 46.6 सैकंड में पुरी की थी | 1960 के ओलम्पिक खेलो में 400 मीटर की फाइनल दौड़ में ये कांस्य पदक जीतने से (0.1 सैकंड) बाल बाल चुके | चौथे स्थान पर रहे | अपने यथासम्भव प्रयत्न के बाद भी ये विजयी स्थान न पाकर भी हमारे लिए गौरव के पात्र है | 45.6 सैकंड का इनका जो राष्ट्रीय रिकॉर्ड है वह 46 वर्ष आड़ भी कोई नही तोड़ पाया | आज ये प्रशिक्षक के तौर पर अपनी सेवाए देश को दे रहे है |

उडन सिख मिल्खा सिंह (Milkha Singh) पर सारे देश को हमेशा गर्व रहेगा कि इन्होने एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में अपनी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से सारे राष्ट्र को प्रेरणा दी है | हॉकी ,लॉन टेनिस तथा निशानेबजी में पदक अर्जित करने वाला भारत अब तक दौड़ प्रतियोगिता में पिछड़ा था है | यह अत्यंत लज्जा की बात है हमारे इतने बड़े देश में आज मिल्खा सिंह (Milkha Singh) जैसे दृढ़ संकल्पी खिलाड़ी बहुत कम है |

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