Morarji Desai Biography in Hindi | मोरारजी देसाई की जीवनी

Morarji Desai Biography in Hindi

Morarji Desai Biography in Hindi

कुछ लोग ऐसे होते है जो असफलता के भय से कार्य आरम्भ ही नही करते , कुछ लोग कष्ट आने पर प्रांरभ किये हुए कार्य से विमुख हो जाते है कार्य छोड़ देते है परन्तु कुछ व्यक्ति ऐसे होते है जो अनेक कष्टों-बाधाओ के आने पर भी अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहते है | मोराराजी भाई (Morarji Desai) ऐसे ही व्यक्ति थे | उन्होंने साधारण परिवार से जन्म लेकर भी भारत के प्रधानमंत्री के पद तक पहुचकर यह सिद्ध कर दिया कि ऊँचे पद तक पहुचने के लिए सम्पन्न परिवार में जन्म लेने की आवश्यकता नही , आवश्यकता है केवल कर्तव्य पालन और निष्ठा की |मोरारजी की एक सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उनका व्यक्तित्व अपने ही ढंग का था | वे गांधीजी के सिधान्तो में अटल विश्वास के साथ भारतीय जीवन की परम्पराओं में अटूट श्रुधा और निष्ठा रखते थे |

उनका जीवन बहुत ही सीधा-साधा और अपने आप में अपूर्व था | वे विज्ञान और आधुनिकता के विरोधी नही थे परन्तु उनके जीवन को यह बाते प्रभावित नही कर पायी | उनका जीवन अंत तक पूर्णतया सात्विक बना रहा | मोरारजी (Morarji Desai) को अपनी विशिष्ट गांधीवादी जीवन शैली , निर्भीकता ,स्पष्टवादिता तथा विभिन्न स्थितियों में रहकर देश की सेवा में लीन रहने के कारण 1991 में देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से विभूषित किया गया |मोरारजी की दिनचर्या और सात्विक वृति के कारण उनके संबध में आम धारणा बन गयी थी कि वे आयु के सम्बन्ध में मानदण्डो के अनुसार सौ वर्षो तक जीवित रहेंगे परन्तु वे कुछ समय पूर्व ही चल बसे परन्तु उनके दीर्घ जीवन से पता चलता है कि उनमे कितनी प्रबल जीजिविषा थी |

मोरारजी (Morarji Desai) का जन्म गुजरात की उस पूण्य-भूमि पर हुआ जहा गांधीजी ,सरदार पटेल और दयानंद सरस्वती जैसी महान हस्तियों ने जन्म लिया था | मोरारजी बलसाड जिले के भदेली नामक छोटे से गाँव में 29 फरवरी 1896 को पैदा हुए थे | इनके पिता रणछोड़ भाई देसाई भावनगर रियासत के एक मिडल स्कूल में हेडमास्टर थे | इनके पिता का जीवन भी अपने ही ढंग का सीधा साधा और अनुशासन से बंधा हुआ था | वे सदा धोती. कोट और पगड़ी पहनते थे | इसी प्रकार का अनुशासन मोरारजी के जीवन में भी विकसित हुआ |

रणछोड़ भाई अपने बेटे को प्यार से “मुर” कहकर पुकारत थे गुजराती में मुर का अर्थ मोर होता है | इनकी प्रारम्भिक शिक्षा भारत के एक छोटे से नगर में हुयी | यहा भी इनकी विशेषता थी कि वे स्कूल से कभी भी गैरहाजिर नही हुए | खेल-कूद में अच्छे होने पर भी संकोच-शील स्वभाव होने के कारण उन्होंने कभी प्रतियोगिताओं में भाग नही लिया | मोरारजी की आयु अभी लगभग पन्द्रह वर्ष की थी कि अचानक पिता की मृत्यु हो गयी परन्तु इस दुर्घटना से पूर्व मोरारजी का विवाह उनके नाना ने निश्चित कर दिया था |

कन्या की आयु ग्यारह वर्ष थी और वह माल अधिकारी की बेटी थी गजराबेन | पिता से अत्यंत लगाव के बावजूद उस समय की प्रथा के कारण पिता की मृत्यु के तीसरे-चौथे दिन नाना ने इनका विवाह कर दिया | उन पर दुःख का पहाड़ टूट पड़ा – वे भारी बोझ के नीचे दब गये परन्तु इतने दुःख पर भी मैट्रिक में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने पर उन्हें दस रुपया मासिक छात्रवृति मिली | इसके बाद उन्होंने बम्बई के विल्सन कॉलेज में दाखिला लिया | होस्टल में मेधावी छात्रों का रहना-खाना मुफ्त होता था इसलिए वे छात्रवृति का अधिकाँश पैसा माँ को भेज देते थे जिससे घर का खर्च चल सके |

इन दिनों बम्बई नगर राजनीति का केंद्र बनता जा रहा था | यहा उन्होंने गोपाल कृष्ण गोखले , लोकमान्य तिलक और सरोजिनी नायडू के भाषण सुने और विदेशी वस्तुओ का परित्याग कर दिया | स्नातक विज्ञान विषय लेकर किया और प्रथम श्रेणी से पास हुए | इस पर पचास रुपया छात्रवृति मिली | वे एम.एस.सी. करके प्रोफेसर बनना चाहते थे परन्तु प्रयत्न करने पर इन्हें प्रांतीय सिविल सर्विस में नौकरी मिल गयी | मई 1918 में अहमदाबाद के डिप्टी कलेक्टर नियत हो गये | वे बारह वर्षो तक सरकारी नौकरी में रहे परन्तु भारतीय अधिकारियों से अंग्रेजो का व्यवहार ठीक नही रहता था इसलिए वे अधिक समय तक यह सहन न कर सके और 1930 में सरकारी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया |

देश में रोलेट एक्ट के विरुद्ध आन्दोलन चलाने की तैयारी हो रही थी | मोरारजी ने भी देश के लिए सर्वस्व अर्पण करने की ठान ली | उन्होंने विदेशी कपड़े छोडकर खादी पहनना आरम्भ कर दिया | पूर्णतया स्वदेशी के रंग में रंग गये | ब्रिटिश सरकार के जुल्मो का एक नमूना जलियांवालाबाग़ हत्याकांड इससे भी मोरारजी के मन पर भारी प्रभाव पड़ा | पंजाब और खिलाफत आन्दोलन के कारण गांधीजी ने ब्रिटिश सरकार से असहयोग का शुभारम्भ कर दिया था |

मोरारजी (Morarji Desai) ने सरदार पटेल के साथ गुजरात में किसान आन्दोलन में भाग लिया था इसलिए गांधीजी उन्हें चाहने लगे थे | मोरारजी कांग्रेस कमेटी के सदस्य बन गये और पूर्ण रूप से देश सेवा के कार्यो में लग गये | सरकारी शिक्षण संस्थानों का बहिस्कार आरम्भ हो चूका था | मोतीलाल नेहरु ,सरदार पटेल , सी.आर.दास .राजगोपालचार्य और राजेन्द्र प्रसाद आदि नामी वकीलों ने कचहरियो का काम छोडकर गांधीजी के आदेश अनुसार स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेना आरम्भ कर दिया था | उन्हें अनेक आंदोलनों में भाग लेने के कारण गिरफ्तार किया गया था | अन्य नेताओं के साथ मोरारजी को भी नमक कानून तोड़ने के कारण गिरफ्तार किया गया | उसके बाद तो गिरफ्तारियो का सिलसिला आरम्भ हो गया |

नमक सत्याग्रह में गिरफ्तारी के बाद मोरारजी को गुजरात प्रदेश कांग्रेस का प्रधान बनाया गया | उसके बाद मोरारजी को दो-तीन बार गिरफ्तार किया गया परन्तु 1934 में गांधीजी द्वारा असहयोग आन्दोलन वापिस लेने पर सभी नेताओं को रिहा कर दिया गया | मोरारजी भी रिहा हुए | ब्रिटिश सरकार के 1935 के इंडिया एक्ट के अनुसार सभी प्रान्तों में असेम्बलियो के चुनाव हुए | कांग्रेस को भारी बहुमत मिला | मोरारजी वलसाड चुनाव क्षेत्र से विजयी होकर बम्बई विधानसभा के सदस्य बने | वहा कांग्रेस मंत्रीमंडल बना तो खेर मुख्यमंत्री बने और मोरारजी (Morarji Desai) को राजस्व मंत्री बनाया गया | मोरारजी ने इस पद पर रहते हुए अनेक सुधार किये |

इन्ही दिनों विश्व रंगमंच पर भारी उथल-पुथल हो रही थी | हिटलर ने 1 सितम्बर 1936 में पोलैंड पर आक्रमण करके द्वितीय विश्वयुद्ध प्रारम्भ कर दिया था | ब्रिटेन में चेम्बरलेन के असफल रहने पर अनुदार दल की सरकार बनी जिसके प्रधानमंत्री चर्चिल थे | उनके भारत विरोध के सम्बन्ध में सभी परिचित है | ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत को युद्ध में भागीदार बना लेने के प्रश्न पर फिर आन्दोलन खड़ा हुआ और प्रान्तों के कांग्रेसी मंत्रीमंडलो ने त्यागपत्र दे दिए और फिर गिरफतारिया होने लगी |

भारतीय नेता नही चाहते थे कि ब्रिटिश सरकार की सहायता के लिए भारतीयों का किसी प्रकार का सहयोग हो | भारतीयों ने इसका विरोध किया जिस पर नेताओं की धर-पकड़ की गयी | इतने में “भारत छोड़ो आन्दोलन” आया और मोरारजी समेत सभी नेता गिरफ्तार कर लिए गये | अंततः 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली और 1952 में भारतीय संविधान के अनुसार जो चुनाव हुए और उसमे मोरारजी बम्बई राज्य के मुख्यमंत्री बने |

मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये | उन्होंने मंत्रीमंडल बहुत छोटा रखा | हिन्दुओ का एक से अधिक विवाह करने के विरुद्ध कानून बना , भूमि सुधार किये गये , काश्तकारों की स्थिति सुधारने के कानून बना ,भूमि सुधार किये गये , काश्तकारों की स्थिति सुधारने के कानून बने , नशाबन्दी लागू की गयी | सच्चे गांधीवादी होने के कारण मोरारजी भाई के लिए नशाबन्दी करवाना आवश्यक था क्योंकि कांग्रेस पहले से ही शराबखोरी के विरुद्ध आन्दोलन करती रही थी | मोरारजी (Morarji Desai) ने इस दिशा में पहल की |

प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु मोरारजी देसाई के दृढ़-निश्चय , निर्भीकता और गांधीवादी विचारों से बहुत प्रभावित थे | उन्हें अपने से भिन्न विचार रखने वाले व्यक्तियों के साथ काम करने में एक विचित्र आनन्द का अनुभव होता था | नेहरु जी ने मोरारजी को केन्द्रीय मंत्रीमंडल में सम्मिलित होने का न्योता दिया | अधिक आग्रह पर वे केंद्र में आ गये | पहले उद्योग और वाणिज्य मंत्री रहे , बाद में वित्त मंत्री बने | उस समय भारत की वित्तीय स्थिति काफी कठिन थी | मोरारजी ने बहुत योग्यता से स्थिति को सुधारा |

1959 में वे भारतीय शिष्टमडंल के नेता के रूप में अंतर्राष्ट्रीय बैंक के गर्वनरो की बैठक में भाग लेने वाशिंगटन गये | उसके बाद उन्होंने अनेक देशो की यात्रा की और अनेक समझौते किये | कामराज योजना का वास्तविक ध्येय यह था कि अधिकांश नेता जो लम्बे समय से सरकार के ऊँचे पदों पर बने हुए थे त्याग पत्र देकर पार्टी का कार्य करे परन्तु आगे चलकर वह योजना ध्येय से भटक गयी लेकिन 1963 में मोरारजी ने स्वेच्छा से पद त्याग किया और लगभग चार वर्ष तक पार्टी का कार्य करते रहे |

1967 के चुनावों में सुरत से लोकसभा के लिए चुनाव जीते | इंदिरा जी प्रधानमंत्री बनी और मोरारजी उप प्रधानमंत्री तथा वित्त मंत्री बने परन्तु 1969 में इंदिरा जी ने वित्त विभाग मोरारजी (Morarji Desai) से ले लिया | इसके विरोध में उन्होंने उप-प्रधानमंत्री पद से भी त्यागपत्र दे दिया और दस दिन का उपवास रखा | मोरारजी का कहना था कि जब सरकार लोकतान्त्रिक पद्धति से हट जाए तो उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए उपवास रखा जा सकता है | यह उनका विशुद्ध गांधीवादी ढंग था विरोध जताने का |

1969 में राष्ट्रपति चुनाव के प्रश्न पर कांग्रेस में विभाजन हुआ | इंदिरा जी ने पार्टी की तरफ से राष्ट्रपति के कांग्रेसी उम्मीदवार श्री नीलम संजीव रेड्डी के विरूद्ध श्री वी.वी.गिरी का नाम रखा | इस मतभेद के कारण कांग्रेस (इ) और कांग्रेस (ओ) दो खेमो में में बंट गयी | मोरारजी कांग्रेस (ओ) दल के नेता चुने गये | वे लोकसभा में विपक्ष में बैठने लगे | 1971 में इंदिरा जी ने “गरीबी हटाओ” का नारा दिया और बांग्लादेश का निर्माण हुआ |

इंदिरा जी के साहसपूर्ण कार्यो के कारण जनता का विश्वास था कि बैंकों का राष्ट्रीयकरण और राजाओ के प्रिवी पर्स इंदिरा जी ही समाप्त कर सकती है परन्तु देश की आर्थिक स्थिति दिनों-दिन बिगड़ रही थी और महंगाई आकाश छूने लगी थी | लोग इन बातो का कारण देश में फ़ैल रहे भ्रष्टाचार और काले धन का फैलाव बता रहे थे | इस समय लोकनायक जयप्रकाश नारायाण ने सरकार और भ्रष्टाचार के विरुद्ध आन्दोलन किया उनका कहना था कि “सम्पूर्ण क्रांति अब नारा है भावी इतिहास हमारा है “| वे इस आन्दोलन द्वारा देश में सम्पूर्ण बदलाव चाहते थे |

यह आन्दोलन पटना में एक विशाल मौन जुलुस से आरम्भ हुआ था और इसकी चिंगारी सारे भारत में फ़ैल गयी | इन्ही दिनों उत्तर प्रदेश और गुजरात विधानसभाओं के चुनावों का मामला भी उठा | गुजरात में चुनावों के लिए मोरारजी ने उपवास आरम्भ किया | सातवे दिन मध्यावधि चुनावों की बात मान ली गयी | उत्तर प्रदेश क्र रायबरेली के चुनावों में धांधली को लेकर इंदिरा ही के चुनाव को 12 जून 1975 को इलाहाबाद कोर्ट ने रद्द कर दिया परन्तु बीस दिन तक निर्णय लागू न करने की छुट भी दी गयी |

इस दौरान अनेक प्रदर्शन इंदिरा जी के समर्थन में हुए परन्तु फैसला न बदला जा  सका | विपक्ष ने इंदिरा जी के त्यागपत्र की मांग की – मोरारजी ने इस मांग का समर्थन किया | श्री जयप्रकाश जी ने मोरारजी की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जिसका कार्य इंदिरा जी को प्रधानमंत्री पद से त्यागपत्र देने के लिए जोर डालना था | उन दिनों फखरुद्दीन अली अहमद राष्ट्रपति थे | इंदिरा जी ओर कोई चारा न देख आपातकालीन स्थिति लागू करने के लिए उनसे स्वीकृति ले ली |

अमरजेंसी लगाने के बाद जयप्रकाश नारायण ,मोरारजी देसाई ,  अटलबिहारी वाजपेयी , राजनारायण ,जोर्ज फर्नांडिस , लालकृष्ण आडवाणी , मधु दंडवते आदि को गिरफ्तार कर लिया गे | कांग्रेस के चंद्रशेखर और रामधन को भी गिरफ्तार कर लिया गया | इसके अतिरिक्त देशभर में अन्य अनेक महत्वपूर्ण व्यक्तियों को भी गिरफ्तार कर लिया गया | इस प्रकार लोगो की गिरफ्तारिया और लोकतंत्र विरोधी कार्यो के कारण जनता में कांग्रेस के विरुद्ध रोष फ़ैल गया | इसका परिणाम यह हुआ कि 1977 में लोकसभा के चुनावों में कांग्रेस की पराजय हुयी | इससे पहले कांग्रेस के अनेक नेता इंदिरा जी के तानशाही रवैये के कारण उनसे अलग हो चुके थे |

कांग्रेस के विकल्प के रूप में चार दलों ने मिलकर जनता पार्टी बनाई | मोरारजी देसाई (Morarji Desai) को जयप्रकाश नारायण के परामर्श दल का नेता अर्थात प्रधानमंत्री चुना गया | 25 जून 1975 को जनता पार्टी की सरकार बनी और आपात-स्थिति में लगाये गये नियन्त्रण और समाचार पत्रों पर लगी सेंसरशिप पर लगी सेंसरशिप सम्पात कर दी गयी | मोरारजी ने अपने कार्यकाल में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किये | उन्हें पुराने कांग्रेसियों तथा अन्य राष्ट्रीय नेताओं का सहयोग प्राप्त हुआ |मोरारजी देसाई नवम्बर 1977 से जुलाई 1979 तक प्रधानमंत्री रहे परन्तु जनता पार्टी के एक वरिष्ट सहयोगी चौधरी चरणसिंह के असहयोग के कारण मोरारजी को प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा परन्तु चौधरी चरण सिंह भी अधिक दिन तक प्रधानमंत्री न रह सके |

मोरारजी (Morarji Desai) का जीवन नियम और आत्म-संयम का दर्पण रहा है | वे 99 वर्ष की आयु तक सात्विक जीवन और अपने सुनिश्चित नियमो पर अटल रहे | वे सूर्योदय से पूर्व उठ जाते थे | योगासन , प्रभु स्मरण और चरखा कताई उनके अटल नियम थे | वे पूर्णतया शाकाहारी और मिताहारी रहे | वे एक समय भोजन करते थे | भोजन में दूध ,खजूर ,फल और सादा फुल्का एवं हरी सब्जिया लेते थे | 1921 के बाद उन्होंने कभी चाय-काफी का प्रयोग नही किया | वे आयुर्वेद की चिकित्सा में विश्वास करते है | इंजेक्शन लगवाने से साफ़ इनकार कर देते थे |

उनका जन्मदिन 29 फरवरी था | फरवरी 29 दिन का लीप वर्ष में होता है जो चार वर्ष बाद आता है इसलिए उन्होंने अपने जीवन के 81वे वर्ष में पत्रकारों से कहा कि मुझे 81 वर्ष का न समझकर 16 वर्ष का समझे क्योंकि तारीख के हिसाब से वे अभी 16 जन्म दिन मनाने के हकदार है | इससे स्पष्ट हो जाएगा कि वे अपने आप को कितना स्वस्थ समझते थे | अंतिम वर्षो में अपना अधिक समय गुजराती विद्यापीठ की ओर लगा रहे थे क्योंकि यह उनके द्वारा स्थापित प्रिय संस्था थी | अंतिम वर्ष में वे कुछ अस्वस्थ हुए और 100 वर्ष पूर्ण होने से कुछ पहले ही चल बसे | उनके पुत्र कान्ति भाई के अनुसार मोरारजी (Morarji Desai) के लिए गुजरात विद्यापीठ के निकट अंतिम विश्राम स्थल चुना गया था |

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