Mother Teresa Biography in Hindi | मदर टेरेसा की जीवनी

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Mother Teresa Biography in Hindi
Mother Teresa Biography in Hindi

अनाथो ,रोगियों और उपेक्षितो की सेवा के लिए आजीवन समर्पित करने वाली मदर टेरेसा (Mother Teresa) का जन्म 27 अगस्त 1910 ईस्वी में युगोस्लाविया के एक छोटे से गाँव में हुआ था | उनका नाम एग्नेस रखा गया | 7 वर्ष की उम्र में पिता का देहांत होने के बाद एग्नेस की देखरेख का भार उनकी धर्मप्राण माता के उपर पड़ा | माँ के साथ गिरिजाघर जाते हुए बालिका के मन में छोटी उम्र में ही नन बनने का विचार पैदा हो गया | 18 वर्ष की होने पर उन्होंने आयरलैंड जाकर मिशन में दीक्षा ले ली |

कुछ समय तक अंग्रेजी भाषा सीखने के बाद 1917 में मिशन में उन्हें मिशन के स्कूलों में शिक्षिका के रूप में भारत भेज दिया गया | भारत पहुचने पर एग्नेस ने कुछ समय दार्जिलिंग में अध्यापन कार्य किया और उसके बाद कोलकाता के सेंट मेरी स्कूल में आ गयी | यहा रहकर उन्होंने पहले अध्यापिका के रूप में और बाद में प्रधानाचार्य के रूप में कार्य किया | तभी उन्होंने अपना टेरेसा रख लिया | पहले वे सिस्टर टेरेसा और प्राचार्या बनने के बाद मदर टेरेसा (Mother Teresa) के नाम से जानी गयी |

भारत आने के बाद 30 वर्षो तक वे बंगाल के बहर नही गयी | मदर टेरेसा (Mother Teresa) ने 1942-43 का बंगाल का भीषण अकाल ,साम्प्रदायिक दंगो में लोगो की दुर्दशा आदि देखी थी | उनका स्कूल भी मलिन बस्ती के निकट ही था | वहा की स्थिति से भी वे परिचित थी | यह सब देखकर मदर (Mother Teresa) के मन में यह बात उठी कि उन्हें दीन-दुखियो के लिए भी कुछ करना चाहिए | यह काम वे कान्वेंट छोडकर ही कर सकती थी | उनकी निष्ठा देखकर कान्वेंट ने उन्हें संस्था से अलग रहकर सेवा करने की अनुमति दी |

इसके बाद मदर टेरेसा (Mother Teresa) ने दीन-दुखियो ,अपहिजो ,अनाथो ,तिरुस्क्रुतो आदि की सेवा का जो कार्य प्रारम्भ किया वह निरन्तर बढ़ता ही गया | उनकी संस्था “चेरिटी ऑफ़ मिशनरीज” की शाखाए देश में ही नही अनेक बाहरी देशो में खुलती गयी | उनके कार्य की सबने सराहना की | उन्हें अनेक पुरुस्कार मिले जिनमे अंतर्राष्ट्रीय सद्भाव के लिए नेहरु पुरुस्कार ,नोबल शांति पुरुस्कार ,फिलीपाइन सरकार का मैग्सेस पुरुस्कार ,पॉप पॉल द्वारा दिया गया पुरुस्कार आदि प्रमुख है |

देशी-विदेशी दान-दाताओं ने उनके कार्य के लिए प्रचुर मात्रा में आर्थिक सहायता दी | संसार-भर में दीन-दुखियो की आश्रयदाता के रूप में प्रसिद्ध मदर टेरेसा का 5 अगस्त 1997 को कोलकाता में देहांत हो गया | वे 1948 में भारत की नागरिक बन गयी थी | उन्होंने संसार के विभिन्न देशो की यात्रा करके और राष्ट्र-अध्यक्ष से सम्पर्क कर उनका ध्यान लोगो के कष्ट दूर करने की ओर आकृष्ट किया था | यद्यपि वे जन्म से भारतीय नही थी फिर भी उनके सेवा कार्यो के सम्मान में भारत सरकार ने उन्हें सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से अलंकृत किया था |

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