रसायनशास्त्री नागार्जुन की जीवनी | Nagarjuna The Ancient Scientist Biography in Hindi

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रसायनशास्त्री नागार्जुन की जीवनी | Nagarjuna The Ancient Scientist Biography in Hindi
रसायनशास्त्री नागार्जुन की जीवनी | Nagarjuna The Ancient Scientist Biography in Hindi

विज्ञान के क्षेत्र में भौतिक जीवन तथा रसायनशास्त्र का विशेष महत्व है | विज्ञान की समस्त चमत्कारिक उपलब्धियों एवं तत्वों में इन तीनो का स्वरूप अभिन्न रहा है | प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों में अपनी चिकित्सा पद्दति में युगीन साधनों का प्रयोग कर उसे मानव के हित में प्रयुक्त किया था | चाहे वह शल्यक्रिया हो या कोई अन्य उपचार  , किसी वस्तु को चिरकाल तक सुरक्षित ,सुंदर और प्राकृतिक तथा यथावत स्थिति मर रखने के लिए विभिन्न रसायनों का प्रयोग किया जाता रहा है | हम आधुनिक विज्ञान में रसायन के इस बहुआयामी उपयोग की बात छोडकर प्राचीन भारतीय विज्ञान की बात करे तो ज्ञात होता है कि हमारा देश रसायन विज्ञान के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण अद्वितीय उपलब्धियों का देश रहा है | हमारे यहा प्रमुख रसायनवेत्ता हुए है उनमे नागार्जुन (Nagarjuna) का नाम विशिष्ट है |

नागार्जुन (Nagarjuna) का जन्म की ईसा की दुसरी शताब्दी में महाराष्ट्र के विदर्भ प्रदेश में एक ब्राह्मण कुल में हुआ था | तिब्बती साहित्य में चौरासी सिद्धो में एक नागार्जुन को माना गया है जिनमे प्रदर्शित चित्रों में नागार्जुन को गले में सर्प डाले चित्रित किया है | नागार्जुन ने रसायनशास्त्र पर आधारित जो पुस्तक लिखी , उसका नाम रस रत्नाकर या रसेन्द्र मंगल है जो संस्कृत भाषा में लिखी गयी है | इसमें रसायन की कई विधियों का वर्णन किया गया है |

नागार्जुन (Nagarjuna) प्राचीन भारत के महान रसायनज्ञ रहे है | तिब्बती साहित्य में उनके विषय में यह कथा प्रचलित है कि उन्होंने रसायन की विद्या एक ब्राह्मण से अत्यंत चमत्कारिक ढंग से प्राप्त की थी | कहा जाता है कि व्यालि नाम का एक धनी ब्राह्मण आदमी को अमरत्व प्रदान करने की खोज करने निकल पड़ा | उसने विभिन्न प्रयोगों से भरी हुयी अपनी लिखी पुस्तक को व्यर्थ समझकर फोर्मुले नदी में प्रवाहित कर दिए | नगर की एक वेश्या ने नदी में स्नान करते समय उस पुस्तक को देखा जो पानी में डूबकर भी सुखी हुयी थी | यह देखकर उसे आश्चर्य हुआ |

वह उसे कौतूहलवश अपने घर ले आयी |  कहा जाता है कि वेश्या एक दिन अपनी पाकशाला में खाना बना रही थी |सौभाग्यवश व्यालि उस वेश्या का अतिथि था | अपनी पुस्तक को पुन: पाकर उसने अमृत बनाने की विधि प्रारम्भ कर दी | इधर वेश्या का खाना पक रहा था उधर व्यालि अपने अमृत रसायन संबंधी प्रयोगों में लगा हुआ था | वेश्या ने गलती से चुटकी भर मसाला व्यालि के अमृत रसायन में डाल दिया \ बस फिर क्या था पूर्णरूपेण अमृत रस तैयार हो गया |

व्यालि उस अमृत रस को लेकर जंगल इसलिए भाग गया ताकि उस अमृत रस का लाभ कोई अन्य न ले सके | वह दलदलीय भूमि की के चट्टान पर जाकर रहने लगा | नागार्जुन को जब यह ज्ञात हुआ तो उसने व्यालि का पता लगाकर अमृत रस का रहस्य पता कर लिया | कहते है कि उस रसायन के सेवन से चेहरे की झुर्रिया गायब हो जाती थी सफेद बाल काले हो जाते थे बूढ़ा आदमी जवान हो जाया करता था | नागार्जुन ने भी के यक्षिणी की 12 वर्षो तक साधना क्र पारा बांधने की विधि प्राप्त की थी | उन्होंने पीले गंधक को पलाश के गोंड के रस से शोधित कर गोबर के कन्डो की आग पर पकाकर चाँदी को सोने में बदलने की विधि मर प्रवीणता हासिल की थी |

नागार्जुन (Nagarjuna) ने पारे की औषधि के रूप में विभिन्न स्थानों पर प्रयोग किया था | इसके लिए उन्होंने पारे की पिष्ट का भस्म तैयार करने के लिए गर्भयंत्र का प्रयोग किया जिसमे फूंकनी ,गोबर की कंडिका ,धौकनी ,विभिन्न प्रकार की संद्सियो को प्रयोग में लाया गया | रसायनशास्त्र के इतिहास में नागार्जुन पहले व्यक्ति थे जिन्होंने क्ज्ज्की (Black Sulfide of Mercury )का पर्पीटकारस नाम की औषधि के रूप में प्रयोग किया था |रस रत्नाकर के अध्ययन से नागार्जुन द्वारा प्रयुक्त किये गये विभिन्न प्रकार के रसायनों का परिचय मिलता है जो तत्कालीन समय में असाधारण था |

यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि नागार्जुन (Nagarjuna) प्राचीन भारतीय समय के श्रेष्ठ रसायनवेत्ता रहे होंगे | उनके द्वारा प्रयुक्त किये गये रसायन तो आधुनिक विज्ञान में भी प्रयोग लाये जाते है | सिमित साधनों एवं अल्प सुविधाओं के बीच नागार्जुन ने अपने अथक परिश्रम एवं बुद्धिबल से जो कुछ भी प्राप्त किया विज्ञान के क्षेत्र में निश्चय ही वह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है |

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