Napoleon Bonaparte Biography in Hindi | नेपोलियन बोनापार्ट की जीवनी

Napoleon Bonaparte Biography in Hindi | नेपोलियन बोनापार्ट की जीवनी

Napoleon Bonaparte Biography in Hindi

नेपोलियन बोनापार्ट (Napoleon Bonaparte) एक फ़्रांसिसी सैन्य अधिकारी और राजनितिक नेता था | वह फ्रांसीसी क्रान्ति के बाद के चरणों के दौरान प्रमुखता से छाया रहा | नेपोलियन (Napoleon Bonaparte) ने अपने सफल अभियानों , कुटनीतिक चातुर्य , संधियों और वैवाहिक संबंधो से यूरोप का नक्शा ही बदल दिया था | विश्व इतिहास में उसका हस्तक्षेप अनेक परवर्ती महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह बना |

नेपोलियन (Napoleon Bonaparte) का जन्म फ्रांस के कोर्सिका शहर में 15 अगस्त 1769 को हुआ था | उसने बींचेंन और पेरिस के सैन्य स्कूलों में शिक्षा प्राप्त की थी | मात्र 16 वर्ष की उम्र में ही वह फ्रांसीसी सेना में भर्ती हो गया था | तुलों पर ब्रिटेन के हमले के समय वह उनके बचाव के लिए आया और अंग्रेजो को वहा से मार भगाने में कामयाब रहा | रोंल्सपियरे के पतन के बाद नेपोलियन बंदी बना लिया गया था | वह गिलोरिन की भेंट चढ़ गया होता लेकिन उसका कौशल और भाग्य मुश्किल समय में उसके काम आया |

अपदस्थ सम्राट के वफादारो को कुचलकर नेपोलियन डायरेक्टरों और साथ ही अपने सफल इटली अभियान से जनता की नजरो में चढ़ गया | सन 1799 से सन 1804 तक वह प्रीमियर कौनुसुल की हैसियत से फ्रांस का शासक नियूक्त किया गया | सन 1804 से सन 1815 तक तथा सन 1815 से सौ दिनों के लिए वह फ्रांस का सम्राट और इटली का राजा रहा | अक्टूबर 1813 में लाइजपिंग में पराजय के पूर्व वह करीब एक दशक तक सम्पूर्ण पश्चिमी और मध्य यूरोप का स्वामी बना रहा था |

नेपोलियन (Napoleon Bonaparte) सम्पूर्ण यूरोप का एकच्छत्र शासक बनना चाहता था | उसने ब्रिटेन की महाद्वीपीय नाकेबंदी करने की कोशिश की औ भारत पर आक्रमण करने के प्रयोजन से मिस्त्र पर आक्रमण किया तथा रूस अभियान में मास्को तक धावा बोला | नेपोलियन ने अपनी प्रथम पत्नी जोसेफिन के निसंतान रहने पर ऑस्ट्रिया के सम्राट की पुत्री मेरी लुईस से दूसरा विवाह किया , जिससे उसे सन्तान की प्राप्ति हुयी | अपने अनेक सफल अभियानों को पूरा करने के बाद महानायक नेपोलियन को ब्रिटिश सेनापति नेल्सन से मात खानी पड़ी |

सन 1815 में वाटरलू की लड़ाई में नेपोलियन की पराजय हुयी | इस निर्णायक पराजय से उसके विराट सपने को , जो उसने देखा था सदा के लिए भंग कर दिया | पराजय के बाद नेपोलियन (Napoleon Bonaparte) को बंदी बना लिया गया | तथा सेंट हेलेना द्वीप पर भेज दिया गया | नेपोलियन बोनापार्ट की मौत को लेकर तरह तरह की बाते कही जाती है | अधिकांश इतिहासकार यह मानते है कि पेट के कैंसर की वजह से नेपोलियन की मौत हुयी थी | वाटरलू की लड़ाई में हार जाने के बाद नेपोलियन को सेंट हेलेना द्वीप निर्वासित कर दिया गया था जहा 52 साल की उम्र में उसकी मृत्यु हो गयी |

वर्ष 2001 में फ्रांसीसी विशेषज्ञो ने नेपोलियन (Napoleon Bonaparte) के बाल का परीक्षण करके पाया कि उसमे “आर्सनिक” नामक जहर था | यह माना जाता है कि सम्भवत: सेंट हेलेना के तत्कालीन ब्रिटिश गर्वनर ने फ्रांस के काउंट के साथ मिलकर नेपोलियन की हत्या की साजिश रची थी लेकिन अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बिल्कुल अलग व्याख्या की | उन्होंने कहा कि नेपोलियन की बीमारी का जो उपचार किया गया था उसी ने उसे मार दिया | नेपोलियन को नियमित रूप से पौटेशियम तार्त्रेट नामक जहरीला नमक दिया जाता था जिससे वह उल्टी कर सके और एनिया लगाया जाता था | इससे नेपोलियन के शरीर में पौटेशियम की कमी हो गयी जो कि हृदय के लिए घातक होती है | नेपोलियन (Napoleon Bonaparte) को उसकी आंतों की सफाई के लिए 600 मिलीग्राम मरक्यूरिक क्लोराइड दिया गया और दो दिन बाद ही उसकी मृत्यु हो गयी |

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