नेल्सन मंडेला की जीवनी | Nelson Mandela Biography in Hindi

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Nelson Mandela Biography in Hindi
Nelson Mandela Biography in Hindi

नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) दक्षिणी अफ्रीका के महान हीरो थे | गोरो की रंगभेद निति के विरूद्ध संघर्ष में जिस व्यक्ति ने अपनी भरी जवानी के लगातार 27 वर्ष दक्षिणी  अफ्रीका के जेल में काट दिए , उसके मानसिक संतुलन और अपने देश की आजादी की अदम्य लालसा का अनुमान लगाना सहज हो सकता है परन्तु रंगभेद के विरुद्ध दीर्घकालीन संघर्ष में उनके जो साथी बिछुड़ गये अथवा आजादी के संघर्ष में काम आये – उनकी व्यथा का अनुमान नही लगाया जा सकता |

दक्षिणी अफ्रीका के रंगभेद के संघर्ष में कितने अफ्रीकी लोगो का नरसंहार हुआ , जिन्हें केवल सामान्य आधिकारो से वंचित रखा गया , जिनसे मानव के तरह नही वरन पशुओं जैसा व्यवहार होता रहा , जिन्हें गोरो की बस्तियों से दूर गंदे स्थानो में रखा गया , आखिर उन्हें नेल्सन मंडेला के नेतृत्व के कारण आजादी के वातावरण में साँस लेने का अवसर प्राप्त हुआ | दक्षिणी अफ्रीका की रंगभेद निति के विरुद्ध संघर्ष में जिसने अपने स्वर्णिम काल जेल में काट दिया वो बाद में देश का राष्ट्रपति बना |

10 मई 1994 को राष्ट्रपति पद का शुभारम्भ पर नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) ने कहा था “इतिहास के स्मरण ने मुझे शक्ति दी है | बीसवी शताब्दी के पहले दशक में दक्षिणी अफ्रीका के गोर लोगो ने यहा के निवासियों पर जो कठोरतम अमानवीय अत्याचार किये थे इसी बीसवी शताब्दी के अंतिम दशक ने उस सड़ी गली व्वयस्था को नकार दिया है और रंगभेद की चिंता किये बिना सबके सम्मान अधिकारों को स्वीकार कर लिया है ” | रंगभेद की निति के कारण भयंकर रक्तपात हुआ है परन्तु इस संघर्ष ने जो हीरो पैदा किये है वे सम्भवत: अपने उत्साह ,बुद्धिमता और उदारता के कारण बेजोड़ है | ऐसे लोग फिर पैदा होंगे कभी नही |

नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) जब जेल से मुक्त हुए थे तो उन्होंने कहा था “हमारा ध्येय जुल्म सहने वालो और जुल्म करने वाले दोनों को मुक्त करना था | अभी तक हम इस ध्येय में सफल नही हुए है | सच्चाई यह है कि हम अभी तक मुक्त नही है | हमने इस आजादी में जुल्म न सहने का अधिकार प्राप्त किया है | अभी इस आजादी की जंग जारी है “| भारत और दक्षिणी अफ्रीका के संबध बहुत पुराने है | गांधीजी के बैरिस्टर बनने के बाद एक मुकदमे की पैरवी के लिए दक्षिणी अफ्रीका गये थे तो रंगभेद निति उस समय भी जोरो पर थी |

गांधीजी समान मानव अधिकारों के समर्थक थे परन्तु वहा की गोरी सरकार के लोगो और पुलिस ने जो उंनसे व्यवहार किया उससे बहुत दुखी हुयी और मुकदमे के बाद पूर्णतया वहा के गोरो की रंगभेद निति का सामना अहिंसा से आरम्भ कर दिया | बाद में उन्होंने वहा आश्रम बनाया जो गोरो की निति के विरोध का प्रतीक बना | गांधीजी वहा से जब भारत आये तो वही अहिंसा का अस्त्र यहा के अंग्रेजो के विरुद्ध अपनाया | गांधीजी अफ्रीका में जो कुछ कर रहे थे भारतवासी उसे बड़ी उत्सुकता से देखते थे |

भारत के स्वतंत्रता आन्दोलन की दिशा उस समय बदली जब गांधीजी यहा आये और दक्षिणी अफ्रीका जैसा अहिंसा और असहयोग का सिलिसला जारी हुआ | भारत तो 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया परन्तु दक्षिणी अफ्रीका की अल्पमत गोरी सरकार ने वहा के मूल निवासियों पर अत्याचार जारी रखे | स्वतंत्र भारत विश्व के सभी मंचो से दक्षिणी अफ्रीका की आजादी का समर्थन करता रहा | कई बार तो ऐसा समझा जाने लगता था कि दक्षिणी अफ्रीका की आजादी का संघर्ष भारतीयों का ही है |

इस बात की ओर संकेत करते हुए नेल्सन मंडेला ने अक्टूबर 1990 में भारत आने पर भारत और दक्षिण अफ्रीका के परम्परागत संबधो के विषय में कहा था “गांधीजी का अविस्मरणीय स्वतंत्रता का आन्दोलन दक्षिण अफ्रीका की धरती से आरम्भ हुआ था इसलिए कह सकते है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में हमारा ही योगदान है “| नेल्सन मंडेला 1990 में 27 वर्ष की कैद के बाद मुक्त हुए तब पहली बार भारत आये तो उन्हें सर्वोच्च अफ्रीकी नेता के रूप में यहा सम्मान मिला |

इसके अतिरिक्त उन्हें भारत की ओर से सर्वोच्च नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से भी सम्मानित किया गया | उस समय तक नेल्सन मंडेला दक्षिणी अफ्रीका के राष्ट्रपति नही चुने गये थे | 10 मई 1994 को वे दक्षिणी अफ्रीका के राष्ट्रपति चुने गये | उसके बाद वे भारत की गणतन्त्र दिवस परेड 1995 के मुख्य अथिथि होकर दुसरी बार भारत आये | वे जब भी भारत आते थे तो भारतीय उन्हें अपने मध्य पाकर प्रसन्नता का अनुभव करते थे | इसी प्रकार वे जो भी आत्मीयता पाते है उसका भी कोई सानी नही | इसका स्पष्ट उदाहरण उन्हें “भारत रत्न ” से सम्मानित किया जाना है | कोई भी अनुभव कर सकता है   कि वे भारत  कितने निकट   है |

नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) का जन्म 1918 में हुआ | उन्होंने अपने जीवन में होश सम्भालते ही दक्षिणी अफ्रीका के मूल निवासियों पर गोरो के अत्याचार होते देखे तो शिक्षा के बाद पूर्णतया गोरी सरकार से मुक्ति के कार्यो में सहयोग देने लगे | मंडेला पेशे से वकील थे परन्तु उन्हें जीवन का कोई भी सुख उठाने का अवसर ही नही मिला क्योंकि 1964 में ही जेल में उन्हें डाल दिया गया | भारत ने दक्षिण अफ्रीका की आजादी का सदैव ही समर्थन किया है और उसी का परिणाम है कि मंडेला की सरकार बनते ही भारत ने राजनयिक संबध स्थापित कर लिए जबकि वहा की गोरी सरकार के रहते ऐसा उचित नही समझा गया |

मंडेला (Nelson Mandela) अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष भी थे | उन्हें इस बात का दुःख थ कि आजादी के संग्राम में सहायक उनके बहुत से साथी मारे गये | इनमे कुछ वे लोग भी है जिनके प्रयत्नों से दक्षिण अफ्रीका की विभिन्न पार्टियों में आपसी सहयोग का समझौता हो सका और मंडेला राष्ट्रपति चुने गये |

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