पंडित भीमसेन जोशी की जीवनी | Pandit Bhimsen Joshi Biography in Hindi

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Pandit Bhimsen Joshi Biography in Hindi
Pandit Bhimsen Joshi Biography in Hindi

भारत सरकार ने 2008 का सर्वोच्च नागरिक “भारत रत्न” पुरूस्कार प्रसिद्ध संगीतज्ञ एवं गायक कलाकार पंडित भीमसेन जोशी (Pandit Bhimsen Joshi) को प्रदान किया है | भारत में प्राचीन काल से ही एक से बढकर एक संगीतज्ञ और कलाकार हुए है | इसी परम्परा को आगे बढाने वाले बीसवी शताब्दी के संगीतज्ञ गायक कलाकार का नाम है पंडित भीमसेन जोशी (Pandit Bhimsen Joshi )| पंडित भीमसेन जोशी का जन्म उत्तरी कर्नाटक के गडग जिले में 4 फरवरी 1922 को हुआ था | उनके पिता गुराचार्य जोशी एक स्कूल में अध्यापक थे | उनके सोलह संताने थी जिनमे भीमसेन सबसे बड़े है | भीमसेन (Pandit Bhimsen Joshi) की माता का देहांत उनके बचपन में ही हो गया था | उनका लालन पालन उनकी सौतेली माता ने किया था |

20वी शताब्दी के उत्तरार्ध तक गुरु-शिष्य परम्परा का मुख्या अंग ख्याल गायकी था | भीमसेन (Pandit Bhimsen Joshi) ने संगीत की शिक्षा श्री सवाई गन्धर्व महाराज से ली , जो संगीत गुरु अब्दुल करीम खा के मुख्य शिष्य थे | अब्दुल करीम खा ने अपने चचेरे भाई वहीद खा के साथ मिलकर भारतीय संगीत के किराना घराना की स्थापना की | बचपन में अब्दुल करीम खां का गायन सुनकर भीमसेन को गायक बनने की प्रेरणा मिली | 1933 को जब वे मात्र 11 वर्ष के थे उन्होंने संगीत गुरु की खोज में अपना घर छोड़ दिया |

रेल के सहयात्रियों से पैसा लेकर वे धारवाड़ से पूना होते हुए अंत में ग्वालियर पहुचे और माधव संगीत स्कूल में प्रवेश ले लिया जिसका संचालन महाराजा ग्वालियर प्रसिद्ध सरोद वादक हाफिज अली खा की सहायता से करते थे | वे तीन वर्ष तक उत्तर भारत में गुरु की खोज में घूमते रहे | गुरु की खोज में दिल्ली ,कोलकाता ,ग्वालियर ,लखनऊ और रामपुर आदि भी गये | आखिरकार उनके पिता उनको जालन्धर से पकडकर घर ले आये |

अंत में 1936 में धारवाड़ के प्रसिद्ध संगीतज्ञ सवाई गन्धर्व ने उन्हें अपना शिष्य बनाना स्वीकार कर लिया | भीमसेन (Pandit Bhimsen Joshi) उनके साथ उनके घर पर ही रहे और गुरु-शिष्य का पारम्परिक गायन सीखा | ज्ञान के उत्सुक भीमसेन ने गुरु से उसी समय शिक्षा ली जब भी उनके गुरु ने कहा ,इसके साथ -साथ वे गुरु के घर में काम भी करते थे | किराना घराना की एक ओर संगीतज्ञा गंगुबाई हंगल भी उनके साथ ही श्री गन्धर्व महाराज से संगीत की शिक्षा लेती थी | जोशी ने 1940 तक गन्धर्व महाराज से संगीत की शिक्षा ग्रहण की |

1943 में वह मुम्बई चले गये , जहा उन्होंने रेडियो पर संगीत का कार्यक्रम देना प्रारम्भ कर दिया | 19 वर्ष की आयु में उन्होंने अपना प्रथम स्टेज कार्यक्रम प्रस्तुत किया | 22 वर्ष की आयु में उनका पहला रिकॉर्ड बाजार में आया | इसमें कुछ कन्नड़ और हिंदी के भक्ति गीत थे इसको प्रसिद्ध रिकॉर्ड निर्माता कम्पनी कम्पनी HMV ने तैयार किया था | भीमसेन के संगीत को आलोचकों और आम जनता के द्वारा अत्यंत पसंद किया गया |

उनके प्रदर्शन की विशेषता होती थी उनकी समय के अनुसार तान की गति , उसका सुर जोकि उन्होंने अपने स्वर के विशेष अभ्यास के द्वारा प्राप्त की थी और जब वह तान देते थे तो ऐसा लगता था कि तारो से भी आगे निकल आये है | भीमसेन ने बहुत कम अवसर और तिहाई का अपने संगीत में प्रयोग किया है अधिकतर उन्होंने अपनी रचनाओं में किराना घराना की परम्पराओं को ही अपनाया है | जिन रागों के लिए प्रसिद्ध है वह है शुद्ध कल्याण , मियाँ की तोडी , पुरिया धनाश्री , मुल्तानी , पुरिया , धनाश्री , मुल्तानी ,दरबारी और रामकली आदि |

अब्दुल करीम खां के अतिरिक्त पंडित भीमसेन जोशी (Pandit Bhimsen Joshi) केसर बाई ,बेगम अख्तर और उस्ताद अमीर खा जैसे संगीतज्ञो से भी प्रभावित है | पंडित भीमसेन की गायकी का एक अपना अलग रंग है | उन्होंने कुछ फिल्मो में भी अपनी गायन कला का परिचय दिया है जैसे कि “बसंत बहार” , “तानसेन” और “आँखे” आदि | कन्नड़ औ मराठी में उनके भक्ति गीत अत्यंत प्रसिद्ध है | वे प्रत्येक वर्ष अपने गुरु सवाई गन्धर्व की स्मृति में पुणे में एक संगीत उत्सव का आयोजन करते है |

राष्ट्रीय एकता के लिए जारी “मिले सुर मेरा तुम्हारा” ने उन्हें एक वैश्विक पहचान दी | पंडित भीमसेन (Pandit Bhimsen Joshi) का विवाह छोटी आयु में ही उनकी चचेरी बहन सुनन्दा कट्टी से हो गया था जिनसे भीमसेन के दो पुत्र है राघवेन्द्र और आनन्द | दोनों ही शास्त्रीय गायक है | सुनन्दा की मृत्यु 1992 में हो गयी | इसके अलावा उन्होंने वत्सला मधोलकर से भी विवाह किया था जिनकी मृत्यु 2004 में हो गयी | वत्सला से पंडित भीमसेन जोशी के दो पुत्र और एक पुत्री है | बड़े पुत्र जयंत एक चित्रकार और छोटे पुत्र श्रीनिवास संगीतज्ञ एवं गायक है उनके कुछ व्यावसायिक एल्बम भी बाजार में आ चुके है |

भारत रत्न के अतिरिक्त उन्हें कई पुरुस्कार भी मिल चुके है | उन्हें 1972 में पद्मश्री , 1976 में संगीत नाटक अकादमी पुरुस्कार , 1985 में पद्म भूषण , 1985 में ही गायकी में राष्ट्रीय फिल्म पूरस्कार , 1999 में पद्म विभूष्ण , 2000 में आदित्य बिडला क्लाशिखर पुरुस्कार , 2001 में कर्नाटक विश्वविद्यालय द्वारा नदोजा पुरुस्कार , 2002 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा महाराष्ट्र भूषण , 2003 में केरल सरकार द्वारा स्वाति संगीत पुरुस्कार , 2005 में कर्नाटक रत्न , 2008 में हरिदास पूरस्कार , 2010 में एस सी नारायाण स्वामी राष्ट्रीय पुरुस्कार और 2009 में दिल्ली सरकार द्वारा लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड आदि | 24 जनवरी 2011 को बीमारी की वजह से इस महान विभूति का देहांत हो गया |

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