Pele Biography in Hindi | महान फूटबॉलर पेले की जीवनी

Pele Biography in Hindi | महान फूटबॉलर पेले की जीवनीफूटबाल विश्व के सबसे लोकप्रिय खेलो में से एक है जिसे विश्व के लगभग सभी देश खेलते है | हमारे देश में फूटबाल का खेल राष्ट्रीय स्तर पर अधिक खेला जाता है | यदि हम फूटबाल के जादूगर की बात करे तो ब्राजील के उस अश्वेत खिलाड़ी का नाम अता है जिसका नाम पैले (Pele)  है | आइये इस महान फूटबालर की जीवनी से आपको रूबरू करवाते है |

पेले (Pele) का पूरा नाम Edson Arantes do Nascimento है जिनका जन्म Brazil के बाउस नामक के एक छोटे से नगर में 23 अक्टूबर 1940 को हुआ था | जब ये केवल 10 वर्ष के थे तभी से उन्होंने फूटबाल खेलना शुरू कर दिया था | बचपन में इनके पास फूटबाल खेलने के लिए जूते नही हुआ करते थे इसलिए ये नंगे पाँव ही फूटबाल खेला करते थे | 11 साल की उम्र उन्होंने बाऊस क्लब की ओर से खेलने का विचार बनाया | पेले की पिता भी पेशवर फूटबाल खिलाड़ी थे | 16 साल की उम्र ही उन्होंने सांतोस क्लब से खेलना आरम्भ कर दिया | इसके बाद पेले स्कूल छोडकर नेशनल टीम में शामिल हो गये |

फूटबाल के जादूगर पेले (Pele) के पैरो में संतुलन असाधारण था और ये दोनों पैरो से समान रूप से खेलने में माहिर थे | इनकी रफ्तार इतनी तेज थी कि फूटबाल को जल्दी काबू में ले लेते थे | कठिन से कठिन अवसर पर भी उन्होंने कभी अपना धैर्य नही खोया | इनके बारे में कुछ ऐसी कहानिया भी प्रचलित है कि पेले अपनी पुरी ताकत से फाल्स जम्प लगाते थे और इनकी नजर बॉल पर टिकी रहती थी | इस तरह छकाकर ये गोल मार ही लेते थे | विपक्षी टीम का पूरा ध्यान पेले को घायल करने में लगा रहता था ताकि पेले के मैदान से बाहर जाते ही विपक्षी टीम जीत सके |

पेले (Pele) हमेशा खेल को खिलाड़ी की भावना से खेलते थे | 1964 में अर्जेंटीना के विरुद्ध खेलते हुए इन्हें विपक्षी टीम का खिलाड़ी बार बार किक मार रहा था | रैफरी ने इस खिलाड़ी को निकालने की बजाय पेले को निकालकर यह साबित करना चाहा कि लोग उसे पेले को निकालने वाले रेफरी के रूप में जाने | पेले में देशप्रेम की भावना कूट कूटकर भरी थी | इनका खेल देखकर इटली के एक क्लब ने इन्हें साल भर के लिए 25 लाख रूपये देने का प्रस्ताव रखा | अल्जीरिया के एक क्लब ने तो इन्हें पेट्रोल और कोयले से भरा एक जहाज देने का प्रलोभन दिया लेकिन पेले नही माने | पेले ने 14 सालो तक अपने देश का नेतृत्व किया |

अपने खेल जीवन में पेले (Pele) ने 1959 में 126 गोल किये | 1969 में इन्होने 1131 गोल करके फूटबाल से सन्यास लेने की घोषणा की | उनकी इस घोषणा से ब्राजीलवासी खूब फुटफुटकर रोये थे | इनके देश में तो फूटबाल की ऐसी दीवानगी है कि लोग हारने पर आत्महत्या तक कर लेते है और जीतने पर नाचते ,गाते ,हुडदंग करते सडक पर नजर आते है | फूटबाल तो वहा का राष्ट्रीय खेल है | बचपन से निर्धन पेले ने फूटबाल खेलकर अपार धन कमाया |पेले के दीवाने प्रशंशको ने इन्हें लाखो का मुकुट 1970 में पहनाकर सम्मानित किया | इनके उपस्थित होने मात्र से ब्राजील की टीम ने 3 बार विश्व विजेता होने का गौरव हासिल किया |

लोकप्रियता का दम्भ उन्हें छू तक नही पाया था | सन 1966 में इन्होने एक गौरी युवती रोजमेरी डोस से शादी कर ली | सच है कि गुणवान लोगो का कौशल ही देखा जा सकता है | Black Diamond और Football King के नाम से विभूषित किये जाने वाले पेले के पास इतना धन प्रसिद्धि पाकर भी अत्यंत विनम्र ,सहृदय एवं सहज  है | विज्ञापनों ,शराब तथा तम्बाकू सेवन से जीवन भर दूर रहने वाले पेले (Pele) ने जब सन्यास लिया तो युगोस्लाविया के राष्ट्रपति टीटो ने इन्हें राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया |

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