Plato Biography in Hindi | दार्शनिक प्लेटो की जीवनी

Plato Biography in Hindi | दार्शनिक प्लेटो की जीवनीप्लेटो (Plato) पाश्चात्य जगत का प्रथम राजनितिक दार्शनिक थे जिन्होंने राजनैतिक दर्शन का मानवता के लिए अमर संदेश दिया था | उन्होंने अपने राज्य को मानव के मन का प्रतीक ही माना था | प्लेटो ने अपने न्याय संबंधी सिद्धांत में कहा था कि “न्याय मानव आत्मा की उचित अवस्था और मानवीय स्वभाव की प्राकृतिक मांग है | यह समाज की एकता का सूत्र है |” प्लेटो (Plato) ने अपने शिक्षा दर्शन से शिक्षा को सामाजिक प्रक्रिया मानते हुए मानव में सद्गुणों का संचार करनने वाली प्रक्रिया माना है | प्लेटो ने साम्यवाद तथा आदर्श राज्य के स्वरूप पर भी अपने आदर्शवादी विचार व्यक्त किये | उसने राज्य के शासक को धनवान ,महत्वकांक्षी और चतुर होने की बजाय बुद्धिमान होने हेतु आवश्यक शर्त बनाया |

प्लेटो (Plato) का जन्म एथेंस के कुलीन परिवार में 428 ईस्वी पूर्व में जन्म हुआ था | उनके पिता एरिस्त्र्रो एथेंस के अंतिम सम्राट कादरस के वंशज थे | उनकी माँ परिक्तियनी सोलन वंशज थी | प्रारम्भिक शिक्षा के बाद प्लेटो ने सुकरात के सानिध्य में 8 वर्ष अध्यययन किया | प्लेटो का पारिवारिक नाम आरिस्तोक्लीज था | बचपन में उन्हें संगीत ,व्यायाम आदि में अच्छी रूचि थी | उनकी सुंदर हृष्ट पृष्ट कया को देखकर व्यायाम शिक्षक ने उन्हें प्लेटो (Plato) नाम दिया |

प्लेटो (Plato) सक्रिय राजनीति में जाने के इच्छुक थे लेकिन 399 ईस्वी पूर्व में जब सुकरात को जहर दे दिया गया तो उनके जीवन पर इतना आघात लगा कि उन्होंने दार्शनिक जीवन अपना लिया | इस तरह मैक्सी ने लिखा है कि “प्लेटो में सुकरात पुन: जीवित हो गया”| सुकरात की मृत्यु के बाद एथेंस के निकटवर्ती नगर मेग्रा चले गये | जीवन के 12 वर्ष इटली ,यूनान ,मिश्र यहा तक कि भारत के गंगा तट पर भी घूमते रहे | विभिन्न देश तथा उनकी संस्कृति का अध्ययन करने के बाद उसने एथेंस वापस लौटकर 386 ईसवी पूर्व में अपनी अकैडमी खोली | जीवन के 40 वर्ष उन्होंने यही बिठाये |

अकादमी में राजनीति ,कानून और दर्शन के सभी विषयों की शिक्षा की सुविधा थी लेकिन ज्यामितीय ,गणित ,खगोलशास्त्र तथा भौतिकशास्त्र की शिक्षा के साथ साथ राजनीतिज्ञ , कानूनवेत्ता तथा दार्शनिक बनने की शिक्षा भी दी जाती थी | 367 ईस्वी पूर्व में डायोनिसियस की मृत्यु के बाद उनके पुत्र डियोन को राजनितिक पथ प्रदर्शन के लिए प्लेटो (Plato) की आवश्यकता थी | 70 साल की उम्र में प्लेटो ने उसे दार्शनिक सिद्धांतो के व्यावहारिक रूप में शिक्षा दी किन्तु कुछ चाटूखोरो ने उनके बीच गम्भीर मतभेद पैदा कर दिए | प्लेटो (Plato) 366 इस्वी पूर्व एथेंस लौट आये |

प्लेटो (Plato) ने लगभग 38 ग्रंथो की रचना की जिसमे द रिपब्लिक ,स्टेट्समेन .लॉज ,फिलब्स ,क्रीशस , अपोलोजी ,मीनो आदि है | प्लेटो की रिपब्लिक रचना वास्तव में विद्यालयीन शिक्षा पद्दति का श्रेष्ठतम उदाहरण है | इसे राजनीति ,नितिशास्त्र ,मनोविज्ञान , कला ,दर्शन का समन्वित रूप मानना चाहिए जिसकी शैली नाटकीय ,कवित्व प्रधान तथा कल्पना प्रधान है | प्लेटो ने सद्गुण को ही सच्चा ज्ञान माना है | व्यक्ति और राज्य दोनों में सद्गुण समान है | उन्होंने स्त्रियों और सम्पति की साम्यवाद पर भी विस्तार से लिखा है | जो सत्ता चाहते है उन्हें मूल्य चुकाना होता है |

आदर्श राज्य नियन्त्रण के अभाव में निरंकुश और आततायी राज्य के रूप में पुर्तित हो जाता है | न्याय की आत्मा के अन्त:करन की वस्तु मानते हुए उस व्यक्तिगत ,सामजिक तथा राज्य से सम्बन्धित न्याय के रूप में विभाजित किया है | इन्द्रिय तृष्णा , शौर्य तथा बुद्धि का उचित समन्वय जीवन में न्याय की सृष्टि करता है | न्याय कर्तव्य कर्म है स्वधर्म है व्यक्तिगत आयर सामजिक धर्म है | प्लेटो ने अपनी शिक्षा पद्दति में प्राथमिक ,माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा को महत्व दिया | रिपब्लिक में उन्होंने जनवादी शिक्षा को भी महत्व दिया है |

शिक्षा द्वारा शरीर ,मन और आत्मा के विकास के साथ साथ बालक के सद्गुणों की आदतों का विकास होना चाहिए | उन्होंने बालको को आदर्श मानकर अपनी शिक्षा संबंधी योजना प्रस्तुत की | वो शिक्षा में खेल विधि को महत्व देते थे | शिक्षा पद्दति में आदर्श राज्य की कल्पना का उन्होंने विशेष महत्व दिया | साम्यवाद तथा सुनियोजित शिक्षा प्रणाली के बिना राज्य विवेकशून्य हो जाता है | प्लेटो ने सम्पति संबधी मनोविज्ञान ,दर्शन ,राजनीती के आधार पर प्रस्तुत करते हुए कहा है कि सकरार पर धन का दूषित प्रभाव किसी भी स्थिति में नही होना चाहिए |

प्लेटो ने साम्यवाद को अरस्तु ने आध्यात्मिक बुराइयों का भौतिक निदान कहा है | परिवार विषयक साम्यवाद में उसने अभिभावक वर्ग को पारिवारिक मोह से मुक्त होने को कहा | परिवार के कारण ही राज्य की एकता और न्याय खतरे में पड़ जाते है | पुरुषो की तरह स्त्रियों को भी सार्वजनिक जीवन क्षेत्र में कार्य करने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए नही तो उनकी मानसिक शक्ति चूल्हे-चौके में नष्ट हो जाती है | वह राष्ट्र-हित में श्रेष्ट नस्ल की सन्तान उत्पन्न करने पर बल देता था |

जिस प्रकार मानवीय आत्मा का निर्माण वासना ,साहस ,विवेक के तीन तत्वों से हुआ है उसी तरह राज्य को उत्पन्न करने के लिए आर्थिक तत्व ,सैनिक तत्व एवं दार्शनिक तत्व अत्यावश्यक है जिसमे उत्पादक वर्ग ,सैनिक वर्ग और शासन वर्ग होने चाहिए | राज्य तभी आदर्श स्वरूप ग्रहण कर सकता है जब शासक निस्वार्थ , ज्ञानी एवं दार्शनिक हो | आदर्श राज्य के मौलिक सिद्धांत ,न्याय ,शिक्षा ,दार्शनिक राजा का शासन ,नर-नारियो के समान आधिकार है |

राज्य उत्तम जीवन बिताने के लिए है | वह जगत को अवास्तविक और विचारों को वास्तविक मानता है | उन्होंने अपनी पुस्तक स्टेट्समेन में कानून को विशेष महत्व दिया है | लॉज में उन्होंने आदर्श राज्य की कल्पना करते हुए लोकतंत्र और राजतन्त्र के मिश्रित संविधान ,अनिवार्य तथा सामान्य सामान्य शिक्षा ,न्याय और कानून प्रणाली को सर्वोच्च स्थान दिया है | ऐसे महान शिक्षाशास्त्री ,दार्शनिक ,न्यायशास्त्री ,कानूनवेत्ता प्लेटो ने अपने पीछे अरस्तु जैसे श्रेष्ट शिष्यों को छोडकर संसार से 81 वर्ष की उम्र में 347 ईस्वी पूर्व चले गये |

प्लेटो (Plato) ने राज्य को सर्वोच्च स्थान प्रदान करते हुए व्यक्ति को गौण माना है | प्लेटो ने न्याय सिद्धांत को मानव के लिए आवश्यक उपयोगी बताया है | सुकरात की तरह सद्गुण ही ज्ञान है कहकर उन्होंने शासक को विवेकी ,बुद्धिमान ,दार्शनिक होने हेतु अनिवार्य माना है | वो पहले व्यक्ति थ जिन्होंने कानून की प्रभुसत्ता को सर्वोपरि माना | पुरुषो की तरह स्त्रियो को समान अधिकार दिए | राज्य और नैतिकता का शाश्वत चिरन्तन सिद्धांत दिया | नगर और राज्य बुराइयों से तब तक मुक्त नही हो सकते ,जब तक शासक दार्शनिक गुणों से सम्पन्न न हो और राज्य के निवासी श्रेष्ट नागरिक गुणों से परिपूर्णन हो | वह ऐसे महामानव की खोज में थे जो राज्य की आदर्शारूप सृष्टि करे |

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