Pratap Singh Baharat Biography in Hindi | प्रताप सिंह बाराहठ की जीवनी

Pratap Singh Baharat Biography in Hindi

Pratap Singh Baharat Biography in Hindi

प्रताप सिंह बाराहठ (Pratap Singh Baharat) सुप्रसिद्ध राष्ट्रभक्त एवं क्रांतिकारी केसरीसिंह के पुत्र थे | केसरीसिंह के भाई किशोरसिंह सम्मानीय इतिहासकार थे और जोरावरसिंह भी प्रसिद्ध क्रांतिकारी थे जिन्होंने लार्ड होर्डिंग पर बम फेंका था | केसरीसिंह संस्कृत , पाली और प्राकृत , बंगला , मराठी एवं गुजराती भाषाओं के जानकार एवं विद्वान थे | वह राजस्थानी और हिंदी के ख्यातिप्राप्त कवि थे | उन्होंने 1907 में अपने पिता को एक पत्र लिखकर गृहस्थ के कार्यो के बजाय मातृभूमि की परतन्त्रता की बेडिया काटने के लिए अपना जीवन न्योछावर करने को कहा था | उनकी पत्नी माणिक कंवर जोधपुर शहीद प्रतापसिंह की माँ थी वह भी अपने पति की सहयोगी थी | उन्होंने अपने पति के वियोग का वर्षो दुःख सहन किया था |

केसरीसिंह को उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों के कारण जेल जाना पड़ा और उनकी जागीर और घर सब कुछ सरकार ने जब्त कर लिया | केसरीसिंह बाराहठ का जन्म 1872 में देवपुरा गाँव जो पूर्व शाहपुरा राज्य में था जन्म हुआ था | ऐसे राष्ट्रभक्त एवं क्रांतिकारी परिवार में 25 मई 1893 के दिन प्रतापसिंह का जन्म उदयपुर में हुआ था | उसमे वे धन कमाकर सुख का जीवन व्यतीत कर सकते थे जबकि वे एक आदर्श जागीरदार परिवार में जन्मे थे | राजस्थान के राजा-महाराजा प्रताप के परिवार का बहुत सम्मान करते थे | उनके पिता उदयपुर के महाराजा की सेवा में थे परन्तु कोटा के महाराज ने उनको अपने यहा बुला लिया था |

प्रताप (Pratap Singh Baharat) को राजपरिवार का अभिजात्य जीवन आकर्षित नही कर सका | वह सारे सुख अरु जीवन के प्रति वीतरागी थे | प्रताप राजस्थान के क्रांतिकारियों में बीच अभिमन्यु था | उदयपुर , कोटा और अजमेर में उन्होंने शिक्षा प्राप्त की | उनके पिता केसरीसिंह समाज सुधारक और शिक्षाशास्त्री थे | उन्होंने प्रताप को जयपुर के अर्जुनलाल सेठी के वर्धमान विद्यालय में भर्ती करवाया , जहा बच्चो को मातृभूमि की स्वतन्त्रता के लिए प्राणों की बाजी लगाने की शिक्षा दी जाती थी |

सेठीजी एक पक्के राष्ट्रभक्त थे जो राष्ट्रीयता की भावना जागृत करने के लिए सारे देश में प्रसिद्ध थे | क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद भी उनके पास आते थे | शहीद अशफाक़उल्ला खा काकोरी काण्ड वाले तथा मेरठ काण्ड वाले शौकत उस्मानी जब भूमिगत थे उनके पास आकर रहते थे | केसरीसिंह बाराहठ ने अपने भाई जोरावरसिंह , पुत्र प्रतापसिंह और दामाद ईश्वरदान आशिया को महान क्रांतिकारी रास बिहारी बोस से मिलवाया था | उन्होंने दिल्ली के मास्टर अमीरचंद से भी उन्हें मिलवाया था परिणामस्वरूप ये मातृभूमि को स्वतंत्र कराने के लिए प्राणपण से जुट गये थे |

23 दिसम्बर 1912 को दिल्ली में जब वायसराय लार्ड होर्डिंग पर जोरावरसिंह ने बम फेंका तो प्रताप भी उनके साथ थे | बम फेंकने के बाद वे यमुना पुल के नीचे जाकर छिपे थे | प्रतापसिंह (Pratap Singh Baharat) यमुना में कूदकर थोड़ी देर तेरे परन्तु थककर बेहोश हो गये | उसी समय दो सिपाही संदेह के कारण प्रताप की ओर आ रहे थे | जोरावरसिंह ने अपने रिवोल्वर से एक सिपाही को मार दिया और प्रताप को अपनी पीठ पर लेकर बच निकले |

21 फरवरी 1915 को क्रांतिकारी दलों ने निश्चय किया कि ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध सशस्त्र क्रान्ति की जाए | राजस्थान में भी पुरी तैयारी की गयी , अरावली पर्वत श्रुंखला में हजारो हथियारबंद लोग एवं क्रांतिकारी जंगल में छिपकर बैठे थे और लड़ाई शुरू करने की प्रतीक्षा में थे | वे नसीराबाद की छावनी ,अजमेर एवं ब्यावर पर आक्रमण करने को तैयार थे परन्तु किसी एक धोखेबाज व्यक्ति ने इसकी सुचना अंग्रेजो को दे दी और सब क्रांतिकारी बंदी बना लिए गये | ब्रिटिश सेना के कई सैनिको पर संदेह होने के कारण उनको सजा दी गयी और कुछ को मृत्यदंड दिया गया |

प्रतापसिंह (Pratap Singh Baharat) राजस्थान के क्रान्तिकारियो में श्रेष्ठ क्रांतिकारी थे जिनको राजस्थान की क्रान्ति का भार सौंपा गया था | उस समय रास बिहारी बोस नवद्वीप पश्चिमी बंगाल से क्रान्ति का संचालन कर रहे थे | प्रताप ने नवद्वीप जाकर उनसे परामर्श किया | उसी समय प्रताप पर बनारस षड्यंत्र के लिय उन पर वारंट जारी हो चूका था | जब वे सिंध हैदराबाद से रेल से बीकानेर आ रहे थे | उनके मित्र स्टेशन मास्टर ने गद्दारी की और उनको बंदी बना लिया गया | प्रताप को दिल्ली और बनारस की जेलों में रखा गया |

सेंट्रल इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों को विशवास था कि वे शारीरिक यातनाये देकर उनसे षडयंत्रो का राज मालुम कर लेंगे किन्तु जब उनको इसमें सफलता नही मिली तो एक अंग्रेज अधिकारी ने उनसे कहा “तुम्हारी माँ तुम्हारे लिए बहुत रो रही है वह तुम्हारे अभाव में दुखी है | यदि तुमने सरकार का साथ नही दिया तो तुम्हे सजा हो जायेगी और तुम्हारी माँ तड़प तड़प कर मर जायेगी “| यह मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर उनसे रहस्य ज्ञात करने का प्रयास किया गया किन्तु असफल रहा |

प्रताप (Pratap Singh Baharat) ने उसको जवाब दिया “मेरी माँ को रोने दो | मैंने इस पर ध्यान से विचार किया है और मै इस निर्णय पर पहुचा हु कि यदि मै रहस्य बता देता हु तो हजारो माताओं के बेटो को धोखा देना होगा जो मेरी मृत्यु से अधिक दुखदायी होगा और उससे मेरी माँ कलंकित हो जायेगी ” | बरेली जेल में प्रताप पर अनेक अत्याचार किये गये परन्तु उसमे रहस्य नही खोले | विदेशी सरकार के क्रूर अधिकारियों ने उसको 7 मई 1918 को शारीरिक यातना देकर मार डाला | प्रताप ऐसा क्रांतिकारी थे जो यातनाये सहता रहा परन्तु उसके चेहरे पर कोई दुःख नही दिखाई पड़ा | मातृभूमि का सच्चा सपूत स्वतन्त्रता की बलिवेदी पर कुर्बान हो गया |

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