Prithviraj Chauhan Biography in Hindi | पृथ्वीराज चौहान की जीवनी

Prithviraj Chauhan Biography in Hindi

Prithviraj Chauhan Biography in Hindi

अजमेर और दिल्ली के प्रतापी राजा पृथ्वीराज (Prithviraj Chauhan) का जन्म साक्म्भरी के चौहानपुर में हुआ था | उनके पिता राजा सोमेश्वर बड़े वीर और योग्य व्यक्ति थे | उनकी देखरेख में पृथ्वीराज को यथोचित शिक्षा मिली | पिता की मृत्यु  के समय पृथ्वीराज की उम्र कम थी इसलिए 1177 ईस्वी में उसके राजगद्दी पर बैठने के बाद भी कुछ समय तक राज्य का कार्य उनके माता कस्तुरी देवी देखती रही | पृथ्वीराज ने समय आने पर अपने राज्य विस्तार करने का विचार किया , पर उसी समय गौर का शासक शहाबुद्दीन गौरी ने भारत पर आक्रमण कर दिया और सोमनाथ के मन्दिर को नष्ट कर डाला

लेकिन उसके इस आक्रमण में पृथ्वीराज (Prithviraj Chauhan) से गौरी का सामना नही हुआ क्योंकि वह गुजरात के राजा से पराजित होकर लौट गया था | अत: पृथ्वीराज को राज्य विस्तार की सबसे बड़ी लड़ाई जेजाक मुक्ति (बुन्देलखण्ड) के राजा परमाल के साथ हुयी | इसमें परमाल की सेना के आल्हा-उदल की वीरता का बखान आज तक होता है | महोबा पर पृथ्वीराज का अधिकार हो गया | पृथ्वीराज (Prithviraj Chauhan) की राजधानी अजमेर थी और उसकर राज्य की सीमाए उत्तर पश्चिम में हिसार और सरहिंद तक तथा उत्तर में दिल्ली तक फ़ैली थी | उसका एक सामंत गोविन्द राज दिल्ली का राज्यपाल था |

एक बार पराजित होने के बाद शहाबुद्दीन गौरी ने फिर भारत पर आक्रमण किया | 1190-91 ईस्वी में दिल्ली से कुछ दूर तराईन के मैदान में पृथ्वीराज ने उसका सामना किया और घायल शहाबुद्दीन को मैदान छोडकर भागना पड़ा लेकिन वह ओर बड़ी सेना लेकर फिर आ धमका | 1192 में तराईन के दुसरे युद्ध में पृथ्वीराज की सेना की पराजय हो गयी क्योंकि गौरी ने इस बार संधि की बात चलाकर पीछे से आक्रमण कर दिया था |

कुछ का मत है कि पृथ्वीराज (Prithviraj Chauhan) युद्ध स्थल में मारा गया परन्तु कुछ इतिहासकारों के अनुसार शत्रुओ ने उसे पकड़ लिया था और उसी की राजधानी में जाकर उसे मार डाला | पृथ्वीराज कन्नौज राजा जयचंद का समकालिक और मुख्य प्रतिद्वंदी था | जयचंद की पुत्री संयोगिता ने अपने पिता की इच्छा के विरुद्ध स्वयम्वर में पृथ्वीराज का वरन किया था और पृथ्वीराज ने 1175 में संयोगिता का अपहरण कर लिया था | कहते है कि इसका प्रतिशोध लेने के लिए जयचंद ने शहाबुद्दीन गौरी की सहायता की थी |

पृथ्वीराज (Prithviraj Chauhan) की गणना भारत के वीर राजाओं में होती है पर इतिहासकारों के अनुसार उसमे राजनीतिज्ञ सूझ बुझ की कमी थी | उसने अपने उत्तर पश्चिमी सीमा की रक्षा का समुचित प्रबन्ध करने की ओर ध्यान दिया होता तो भारत में गजनी के मुस्लिम शासको का शासन स्थापित नही होता | पृथ्वीराज के साथ ही चौहान वंश का अंत हो गया |

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